सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह ताप विद्युत संयंत्रों पर बायोमास सह-दहन मानदंडों का पालन न करने पर करीब 61.85 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाया

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह ताप विद्युत संयंत्रों पर लगभग 61.85 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) लगाया है। यह कदम संयंत्र में कोयले के साथ धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट के 5 प्रतिशत मिश्रण का उपयोग करने के अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने पर उठाया गया है। तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग करने संबंधी पर्यावरणीय नियम , 2023 के अनुसार , सभी कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के लिए कोयले के साथ 5 प्रतिशत बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का उपयोग अनिवार्य है। पर्यावरण क्षतिपूर्ति से बचने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सह-दहन की न्यूनतम सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इन वैधानिक प्रावधानों को फसल अवशेषों के स्थल प्रबंधन को बढ़ावा देने , धान की पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। आयोग ने दिनांक 17.09.2021 ...
हाल की पोस्ट

सरकार ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत दो प्रमुख संस्थानों को भंडार गृह के रूप में अधिसूचित किया

  राष्ट्रीय भंडार नेटवर्क को और सशक्त किया गया , जिससे जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा अनुसंधान और नवाचार को सुगम बनाया जा सकेगा राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के परामर्श से , दो संस्थानों- कोच्चि स्थित समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई) को ' रेफरल केन्द्र भवसागर ' और आघारकर अनुसंधान संस्थान , पुणे स्थित ' महाराष्ट्र एसोशिसन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस ( MACS) सूक्ष्मजीव संग्रह और राष्ट्रीय कवक संवर्धन संग्रह '--- को जैविक विविधता अधिनियम , 2002 की धारा 39 के तहत ' निर्दिष्ट भंडार ' के रूप में अधिसूचित किया है। यह धारा केंद्र सरकार को विभिन्न श्रेणियों के जैविक संसाधनों के लिए संस्थानों को भंडार (रिपॉजिटरी) के रूप में नामित करने का अधिकार देती है। ये भंडार जैविक सामग्रियों , जिनमें वाउचर नमूने भी शामिल हैं , के सुरक्षित संरक्षण में सहायता करेंगे तथा साथ ही , नई खोजी गई प्रजातियों और अनुसंधान एवं वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जा...

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण-एनबीए ने भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो जैव विविधता, अनुसंधान, नवोन्‍मेषण और औद्योगिक विकास के बढ़ते समन्वय को दर्शाती है।

जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम , 2023 के तहत नियामक सुधारों के कारण बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी दस्तावेजों की फाइलिंग में भारी वृद्धि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण-एनबीए ने भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है , जो जैव विविधता , अनुसंधान , नवोन्‍मेषण और औद्योगिक विकास के बढ़ते समन्वय को दर्शाती है। यह वृद्धि जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम , 2023 का प्रत्यक्ष परिणाम है , जिसने जैविक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को सुदृढ़ और स्पष्ट किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत , अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत आने वाले आवेदकों को भारत में उत्पन्न जैविक संसाधनों पर आधारित बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट सहित) के लिए आवेदन करने से पहले एनबीए से पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) प्राप्त करना अनिवार्य है। इस अनिवार्यता से बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली में अनुपालन , पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है , साथ ही यह सुनिश्चित हुआ है कि जैविक संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय कानून और संरक्षण तथा निष्पक्ष...

नागोया प्रोटोकॉल के अंतर्गत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा

नागोया प्रोटोकॉल ऑन एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (एबीएस) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (आईआरसीसी) जारी करने में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। विश्व स्तर पर जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों में से 56 प्रतिशत से अधिक प्रमाणपत्र भारत द्वारा जारी किए गए हैं। एबीएस क्लियरिंग-हाउस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार , भारत ने वैश्विक स्तर पर जारी किए गए कुल 6,311 प्रमाणपत्रों में से 3,561 आईआरसीसी जारी किए हैं और यह भारत को प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में अन्य सभी देशों से कहीं आगे रखते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने वाले वैश्विक मंच , एबीएस क्लियरिंग-हाउस में पंजीकृत 142 देशों में से अब तक केवल 34 देशों ने ही आईआरसीसी जारी किए हैं। भारत के बाद फ्रांस का स्थान है , जहां 964 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं , उसके बाद स्पेन ( 320), अर्जेंटीना ( 257), पनामा ( 156) और केन्या ( 144) का स्थान है। यह जैविक संसाधनों और/या संबंधित ज्ञान के निष्पक्ष और पारदर्शी उपयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। नागोया प्रोटोकॉल के तहत , आनुवंशिक संसा...

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी, 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।

संसद में प्रश्न: एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 प्रभावी होंगे , भारत सरकार के पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी , 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026 को अधिसूचित किया , जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल , 2026 से प्रभावी होंगे। संशोधित नियमों में चक्रीय अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है , जिसमें कुशल अपशिष्ट पृथक्करण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026 के अनुसार , ठोस अपशिष्ट को स्रोत पर ही चार भागों में अलग करना अनिवार्य है: ·         गीला अपशिष्ट , ·         सूखा अपशिष्ट , ·         स्वच्छता अपशिष्ट ·         और विशेष देखभाल अपशिष्ट।   इसके साथ ही , थोक अपशिष्ट उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है , जिन्हें विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व का...

जलवायु परिवर्तन से किसानों की सुरक्षा के लिए बनीं व्यापक रणनीतियां

सरकार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से कृषि पर उत्पन्न चुनौतियों का अध्ययन करने वाली एक परियोजना - जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए) को लागू कर रही है। इस परियोजना के तहत जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) के प्रोटोकॉल के अनुसार 651 कृषि जिलों के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता का आकलन किया गया है। इसमें 310 जिलों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से 109 जिलों को ‘अत्यंत उच्च’ तथा 201 जिलों को ‘उच्च’ संवेदनशीलता श्रेणी में रखा गया है। इन 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजनाएं (डीएसीपी) भी तैयार की गई हैं ताकि मौसम संबंधी असामान्यताओं का सामना किया जा सके तथा राज्य कृषि विभागों द्वारा उपयोग के लिए स्थान-विशिष्ट जलवायु-सहनशील फसलों , किस्मों और प्रबंधन पद्धतियों की सिफारिश की जा सके। जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति किसानों की सहनशीलता और अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने के लिए धान की सघनता प्रणाली , वायुजनित धान की खेती , धान की सीधी बुवाई , सूखा और गर्मी जैसी विषम परिस्थितियों को लेक...

कारखाने के कचरे का सड़क निर्माण में इस्तेमाल

·    औद्योगिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करना भारत की सर्कुलर अर्थव्यवस्था के विजन की कुंजी है - डॉ. एन. कलाइसेल्वी · कारखाने के कचरे का सड़क निर्माण में इस्तेमाल : स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई , आईआईएफ और सुयोग एलिमेंट्स ने हाथ मिलाया स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत (डब्ल्यूएफएस) के प्रभावी उपयोग के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए , भारतीय फाउंड्रीमैन संस्थान (आईआईएफ) ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और सुयोग एलिमेंट्स के साथ सीएसआईआर विज्ञान केंद्र , नई दिल्ली में एक सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) समझौता किया है। यह समझौता वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग - डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। इस साझेदारी का उद्देश्य कोयंबटूर क्लस्टर के डब्ल्यूएफएस (वर्किंग स्ट्रक्चरल स्ट्रक्चर) के सड़क अवसंरचना में उपयोग के...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये