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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली में टीईआरआई के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान 'हिम-कनेक्ट' कार्यक्रम का आयोजन करेगा

  यह हिमालय पर शोधकर्ताओं , उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने की पहल है , ताकि सहयोग , प्रायोगिक परियोजनाओं और वित्तपोषण माध्यमों को सुगम बनाया जा सके केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टीईआरआई) के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) के दौरान 25 से 27 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में ' हिम-कनेक्ट ' कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। ' हिम-कनेक्ट ' एक ऐसा मंच है जिसका उद्देश्य भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में कार्यरत शोधकर्ताओं को स्टार्टअप , निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ना है , ताकि उनके शोध परिणामों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। यह सम्मेलन 26 फरवरी 2026 और 27 फरवरी 2026 को आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के तहत भारतीय हिमालयी क्षेत्र के नाजुक परितंत्र के लिए विकसित 24 से अधिक प्रौद्योगिकियों , प्रोटोटाइपों , पेटेंटों और प्रायौगिक परियोजनाओं को हिम-कनेक्ट के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टार्टअप , इनक्य...
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सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन के सख्त मानकों के लिए वैधानिक निर्देश जारी किए हैं

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण उपायों को और मजबूत करने के उद्देश्य से , एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को वैधानिक निर्देश संख्या 98 जारी किया , जिसमें दिल्ली-एनसीआर के चिन्हित उद्योगों के लिए 50 मिलीग्राम/एनएम ³ का एक समान और अधिक सख्त कण पदार्थ (पीएम) उत्सर्जन मानक प्रस्तावित किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा आईआईटी कानपुर में किए गए अध्ययनों और सीपीसीबी द्वारा गठित तकनीकी समिति की सिफारिशों पर विचार करते हुए आयोग का मत है कि 50 मिलीग्राम/एनएम ³ का पीएम उत्सर्जन मानक तकनीकी रूप से प्राप्त करने योग्य और पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक है। संशोधित मानक से औद्योगिक उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने और वायु प्रदूषण को कम करने में योगदान मिलने की उम्मीद है , जिससे औद्योगिक स्रोतों के आस-पास रहने वाले लोगों को लाभ होगा और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता में समग्र सुधार होगा। आयोग ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: i. सीपीसीबी द्वारा चिन्हित 17 श्रेणियों के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों...

सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और ढहाने की परियोजनाओं में धूल पर नियंत्रण को मजबूत करने के लिए वैधानिक निर्देश जारी किए

  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में निर्माण और ढहाने (सीएंडडी) गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण को कम करने के लिए , एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने आज इलाके में धूल कम करने के तरीकों को मजबूत करने और ढहाने पर कचरे के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए वैधानिक निर्देश संख्या 97 जारी की। आयोग ने पाया कि निर्माण एवं ढहाने की गतिविधियों से पैदा हुए धूल क्षेत्र की वायु में प्रदूषक कणों (पीएम ₁₀ और पीएम ₂ . ₅ ) के उच्च स्तर का लगातार कारण बनी हुई है। मौजूदा वैधानिक निर्देशों और दिशानिर्देशों के बावजूद , राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) , दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी DPCC) और आयोग के हवाई दस्तों की ओर से किए गए निरीक्षणों से अनुपालन में , विशेष रूप से निर्माण सामग्री और विध्वंस मलबे के प्रबंधन और परिवहन में , कमियां नजर आई हैं। वैधानिक निर्देश संख्या 97 में नव अधिसूचित पर्यावरण (निर्माण और विध्वंस) अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2025 पर भी बात की गई है , जो 1 अप्रैल , 2026 से लागू होंगे। ये नियम पर्यावरण के अनुकू...

कृषि में चक्रिय अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट से संपदा

  कृषि में चक्रिय अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट से संपदा   मुख्य बिन्दु ·          भारत के कृषि अवशेषों में प्रतिवर्ष 18,000 मेगावाट से अधिक विद्युत उत्पादन की क्षमता है। ·          सरकार ने 2018-19 से 2025-26 के बीच फसल अवशेष प्रबंधन पहल के अंतर्गत , 3,926 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। ·          इसके अतिरिक्त , 42,000 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा सतत  अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु 3.24 लाख मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। ·          गोवरधन योजना के अंतर्गत , 14 जनवरी 2026 तक 51.4% जिलों में 979 बायोगैस संयंत्र संचालित हैं , जो गोबर , फसल अवशेष और खाद्य अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा एवं जैविक खाद में परिवर्तित कर रहे हैं। ·          चक्रिय कृषि , सतत विकास लक्ष्यों (एस डी जी) का समर्थन करती है , विशेषकर ...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये