सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन पर दूसरा क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन कोलकाता में आयोजित किया गया

आठ राज्यों ने लंबित दावों , रिकॉर्ड निगमन , सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों और पीवीटीजी पर्यावास अधिकारों पर प्रगति की समीक्षा की ; जिला-वार , समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर जोर। जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) , भारत सरकार ने 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता , पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासियों (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम , 2006 ( एफआरए) के कार्यान्वयन पर दूसरा क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन बुलाया। सम्मेलन में आठ राज्यों , पश्चिम बंगाल , असम , त्रिपुरा , झारखंड , ओडिशा , बिहार , मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिम राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों , राजस्व और वन विभागों और आदिवासी अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ लाया गया। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को डिजिटलीकरण , सरकारी रिकॉर्ड में एफआरए खिताब के एकीकरण और एफआरए शीर्षकधारकों के साथ आजीविका योजनाओं के अभिसरण और सही धारकों को ऋण सुविधाएं प्रदान करने पर सक्रिय उपाय करने के लिए राज्य द्वारा की गई सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा , जिला अधिकारी- कले...
हाल की पोस्ट

सीएक्यूएम ने अमृतसर एवं तरनतारन ज़िला प्रशासन के साथ पराली जलाने से रोकने के उपायों की समीक्षा की; हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया

एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस.डी. अत्री की अध्यक्षता में सीएक्यूएम की एक उच्च स्तरीय टीम ने धान की कटाई के वर्तमान मौसम में पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। इन जिलों की पहचान धान की पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट जिलों के रूप में की गई है। क्षेत्र भ्रमण करने के अलावा , आगंतुक टीम ने आज अमृतसर में अमृतसर एवं तरनतारन जिले के उपायुक्तों तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की। यह यात्रा , फ्लाइंग स्क्वाड्स की तैनाती के अलावा , आयोग द्वारा धान की पुआल जलाने को कम करने और समाप्त करने की उच्च प्राथमिकता के अनुरूप है , जो एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में सर्दियों की हवा प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। इस चर्चा में धान के पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) इस्तेमाल को असरदार बनाने के लिए संबंधित विभागों एवं ज़िला प्रशासन की तैयारियों और आपसी तालमेल की समीक्षा पर बल दिया गया। आयोग ने किसानों को सीआरएम मशीनें समय पर उपलब्ध कराने , उन्हें जागरूक बनाने , सूचना , शिक्षा एवं संचार से...

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए बीज क्षेत्र से प्राप्त पहुँच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) निधि के अंतर्गत 2.02 करोड़ रुपये वितरित किए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 2.02 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। यह राशि जैविक संसाधनों के उपयोग के लिए बीज क्षेत्र की कंपनियों से प्राप्त पहुँच एवं लाभ-साझाकरण योगदान में इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके अपने-अपने हिस्से के रूप में दी गई है। इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण , जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करना है। चावल , बैंगन , फूलगोभी , खीरा , तीखी मिर्च , लौकी , करेला , टमाटर और भिंडी सहित कृषि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त पहुँच एवं लाभ-साझाकरण ( एबीएस) योगदान में अनेक किस्में और संकर किस्में शामिल हैं। ये योगदान ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड , सिंजेंटा इंडिया लिमिटेड , देवजेन सीड्स एंड क्रॉप टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड , लिमाग्रेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड , बेयर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड , ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एन्ज़ा ज़ाडेन ...

भारत ने आगामी यूएनएफसीसीसी सीओपी31 में महत्वाकांक्षी और संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए लचीलेपन, व्यावहारिकता और पारस्परिक सम्मान की अपील की

जलवायु वित्त , प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के विस्तार की आवश्यकता:  केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादवराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों का सम्मान करें ; केवल चर्चा नहीं , कार्यान्वयन और संयोजन की ओर बढ़ना आवश्यक भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (यूएनएफसीसीसी) के 31 वें सम्मेलन में शेष मतभेदों को दूर करने और महत्वाकांक्षी एवं संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी पक्षों से अधिक लचीलेपन , व्यावहारिकता और आपसी सम्मान की अपील की है। फिजी में आयोजित पूर्व-सीओपी 31 बैठक में राजनीतिक सहमति क्षेत्रों और परिणामों पर पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर कार्यान्वयन और समन्वय की आवश्यकता है। श्री यादव ने पूर्व-सीओपी के दौरान हुई चर्चाओं पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि सभी पक्षों के बीच मतभेदों की तुलना में साझा विचार कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित ...

भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति 2026-2030 पर दस्तावेज

परिचय: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई ) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए ) का पालन कर रहा है। मंत्रालय ने वर्ष 2018 से , पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करना शुरू कर दिया है। इस कार्य के व्यापक दायरे को देखते हुए , एक स्पष्ट रणनीतिक रूपरेखा की आवश्यकता थी। तदनुसार , एमओएसपीआई के एनएसओ ने पर्यावरण लेखा के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए ' भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन रणनीति 2022-2026' जारी की , जिसमें सामग्री प्रवाह लेखांकन (एमएफएएस ), महासागर लेखा , ऊर्जा लेखा और जैव विविधता एवं शहरी क्षेत्रों के लिए विषयगत लेखा आदि क्षेत्रों की पहचान की गई जिन पर उक्त अवधि के लिए कार्य किया जाना है। एमओएसपीआई ने पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य शुरू कर दिया है और वन , जैव विविधता , आर्द्रभूमि , महासागर लेखा , मृदा , जल गुणवत्ता , कृषि भूमि , ऊर्जा , अवशेष , शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए अध्ययन शुरू किए हैं , प्रकाशन और रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। मंत्रालय प...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये