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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा जिम्मेदारी पर बल दिया और पृथ्वी की प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों से लगातार प्रयास करने का आह्वान किया

विश्व वन्यजीव दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की सोशल मीडिया पर कई पोस्टों के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पृथ्वी की समृद्ध जीव विविधता की रक्षा के महत्व पर बल दिया है , जो हमारे ग्रह को समृद्ध बनाती है और हमारे इकोसिस्टम को बनाए रखती है। भारत की सांस्कृतिक भावना पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्र सभी जीवित प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा देते हैं। (विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति: केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव ने विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर एक संदेश जारी कर इसे पृथ्वी की अद्भुत जैव विविधता का उत्सव बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वन्यजीवों का संरक्षण न केवल पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है , बल्कि यह एक साझा जिम्मेदारी भी है जिसके लिए पृथ्वी की प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों के लगातार प्रयासों की जरूरत है। श्री...
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प्राकृतिक रंग, पर्यावरण के अनुकूल होली उत्सव: पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय (ईएफसीसी) के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण क्लबों में पर्यावरण के अनुकूल होली अभियान का आयोजन किया गया

केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम (ईईपी) के अंतर्गत , मिशन लाइफ के अनुरूप सुरक्षित और लंबे समय तक बने रहने वाले समारोह उत्सवों को बढ़ावा देने के लिए इको-क्लबों में पर्यावरण के अनुकूल होली के रंग तैयार करने की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा हैं। व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से , छात्र खाने योग्य और पत्तेदार सब्जियों का उपयोग करके प्राकृतिक रंग तैयार करना सीख रहे हैं। हरा रंग ताजी पत्तेदार सब्जियों से , लाल रंग चुकंदर से , पीला रंग हल्दी से और नारंगी रंग पलाश से प्राप्त होता है। ये रंग पूरी तरह से रसायनों और हानिकारक पदार्थों से मुक्त हैं , जिससे उत्सवों का आयोजन लोगों और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित रहता है। यह अभियान पर्यावरण क्लबों में तेज़ी से गति पकड़ रहा है , छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा में शामिल कर रहा है और उन्हें लंबे समय तक चलने वाली समारोह और प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कृत्रिम रंगों के स्थान पर जैव अपघटनीय विकल्पों का उपयोग करके , युवा शिक्षार्थी अपने समुदायों में पर्यावरण के प्रति होने वाले उत्सवों में...

21वीं केंद्रीय निगरानी समिति ने प्रदूषित नदी क्षेत्रों और सीवेज प्रबंधन पर राज्यवार प्रगति की समीक्षा की

डीओडब्ल्यूआर , आरडी और जीआर के सचिव ने समयबद्ध कार्रवाई अपनाने और एसटीपी के प्रदर्शन और निगरानी को मजबूत करने का आग्रह किया नदी पुनर्जीवन संबंधी केंद्रीय निगरानी समिति (सीएमसी) की 21 वीं बैठक आज जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन , नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के सचिव श्री वीएल कंथा राव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल सहित वरिष्ठ अधिकारियों , एनएमसीजी के अन्य अधिकारियों और राज्य सरकारों तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समिति ने सीपीसीबी की 2025 की रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषित नदी क्षेत्रों की नवीनतम स्थिति की समीक्षा की और स्वीकृत कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों द्वारा की गई प्रगति का आकलन किया। अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि नदी के जल की गुणवत्ता में सतत सुधार न केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर बल्कि उसके प्रभावी उपयोग , नियामक अनुपालन और समय पर परियोजना निष्पादन पर भी निर्भर करता है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सीवेज उपचार की कमियों को दूर करना , मौजूदा सीवेज उपचा...

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 89वीं बैठक- बैठक में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर चर्चा

केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भोपाल में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 89 वीं बैठक की अध्यक्षता कीबैठक में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की गई बैठक के दौरान स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम , 1972 के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों , वन्यजीव अभयारण्यों , बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों और उसके आसपास स्थित वन्यजीव संरक्षण और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा की। पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता , वैधानिक आवश्यकताओं और निर्धारित जोखिमों को कम करने या रोकने के उपायों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों की जांच पड़ताल की गई। समिति ने संचार अवसंरचना , ऑप्टिकल फाइबर केबल , बिजली ट्रांसमिशन लाइन , सड़क परियोजनाएं , पेयजल आपूर्ति , तापीय ऊर्जा , रक्षा , सिंचाई और अन्य अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में कुल 58 नए प्रस्तावों पर विचार किया। समिति ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों पर भी विचार-विमर्श किया। इनमें डॉल्फिन , घड़ियाल आदि जैसे जलीय जीवों के संरक्षण के लिए चंबल नदी में पर...

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली में टीईआरआई के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान 'हिम-कनेक्ट' कार्यक्रम का आयोजन करेगा

  यह हिमालय पर शोधकर्ताओं , उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने की पहल है , ताकि सहयोग , प्रायोगिक परियोजनाओं और वित्तपोषण माध्यमों को सुगम बनाया जा सके केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टीईआरआई) के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) के दौरान 25 से 27 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में ' हिम-कनेक्ट ' कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। ' हिम-कनेक्ट ' एक ऐसा मंच है जिसका उद्देश्य भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में कार्यरत शोधकर्ताओं को स्टार्टअप , निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ना है , ताकि उनके शोध परिणामों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। यह सम्मेलन 26 फरवरी 2026 और 27 फरवरी 2026 को आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के तहत भारतीय हिमालयी क्षेत्र के नाजुक परितंत्र के लिए विकसित 24 से अधिक प्रौद्योगिकियों , प्रोटोटाइपों , पेटेंटों और प्रायौगिक परियोजनाओं को हिम-कनेक्ट के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टार्टअप , इनक्य...

सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन के सख्त मानकों के लिए वैधानिक निर्देश जारी किए हैं

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण उपायों को और मजबूत करने के उद्देश्य से , एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को वैधानिक निर्देश संख्या 98 जारी किया , जिसमें दिल्ली-एनसीआर के चिन्हित उद्योगों के लिए 50 मिलीग्राम/एनएम ³ का एक समान और अधिक सख्त कण पदार्थ (पीएम) उत्सर्जन मानक प्रस्तावित किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा आईआईटी कानपुर में किए गए अध्ययनों और सीपीसीबी द्वारा गठित तकनीकी समिति की सिफारिशों पर विचार करते हुए आयोग का मत है कि 50 मिलीग्राम/एनएम ³ का पीएम उत्सर्जन मानक तकनीकी रूप से प्राप्त करने योग्य और पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक है। संशोधित मानक से औद्योगिक उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने और वायु प्रदूषण को कम करने में योगदान मिलने की उम्मीद है , जिससे औद्योगिक स्रोतों के आस-पास रहने वाले लोगों को लाभ होगा और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता में समग्र सुधार होगा। आयोग ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: i. सीपीसीबी द्वारा चिन्हित 17 श्रेणियों के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों...

सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और ढहाने की परियोजनाओं में धूल पर नियंत्रण को मजबूत करने के लिए वैधानिक निर्देश जारी किए

  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में निर्माण और ढहाने (सीएंडडी) गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण को कम करने के लिए , एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने आज इलाके में धूल कम करने के तरीकों को मजबूत करने और ढहाने पर कचरे के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए वैधानिक निर्देश संख्या 97 जारी की। आयोग ने पाया कि निर्माण एवं ढहाने की गतिविधियों से पैदा हुए धूल क्षेत्र की वायु में प्रदूषक कणों (पीएम ₁₀ और पीएम ₂ . ₅ ) के उच्च स्तर का लगातार कारण बनी हुई है। मौजूदा वैधानिक निर्देशों और दिशानिर्देशों के बावजूद , राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) , दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी DPCC) और आयोग के हवाई दस्तों की ओर से किए गए निरीक्षणों से अनुपालन में , विशेष रूप से निर्माण सामग्री और विध्वंस मलबे के प्रबंधन और परिवहन में , कमियां नजर आई हैं। वैधानिक निर्देश संख्या 97 में नव अधिसूचित पर्यावरण (निर्माण और विध्वंस) अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2025 पर भी बात की गई है , जो 1 अप्रैल , 2026 से लागू होंगे। ये नियम पर्यावरण के अनुकू...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये