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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

नागोया प्रोटोकॉल के अंतर्गत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा

नागोया प्रोटोकॉल ऑन एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (एबीएस) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (आईआरसीसी) जारी करने में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। विश्व स्तर पर जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों में से 56 प्रतिशत से अधिक प्रमाणपत्र भारत द्वारा जारी किए गए हैं। एबीएस क्लियरिंग-हाउस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार , भारत ने वैश्विक स्तर पर जारी किए गए कुल 6,311 प्रमाणपत्रों में से 3,561 आईआरसीसी जारी किए हैं और यह भारत को प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में अन्य सभी देशों से कहीं आगे रखते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने वाले वैश्विक मंच , एबीएस क्लियरिंग-हाउस में पंजीकृत 142 देशों में से अब तक केवल 34 देशों ने ही आईआरसीसी जारी किए हैं। भारत के बाद फ्रांस का स्थान है , जहां 964 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं , उसके बाद स्पेन ( 320), अर्जेंटीना ( 257), पनामा ( 156) और केन्या ( 144) का स्थान है। यह जैविक संसाधनों और/या संबंधित ज्ञान के निष्पक्ष और पारदर्शी उपयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। नागोया प्रोटोकॉल के तहत , आनुवंशिक संसा...
हाल की पोस्ट

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी, 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।

संसद में प्रश्न: एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 प्रभावी होंगे , भारत सरकार के पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी , 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026 को अधिसूचित किया , जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल , 2026 से प्रभावी होंगे। संशोधित नियमों में चक्रीय अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है , जिसमें कुशल अपशिष्ट पृथक्करण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026 के अनुसार , ठोस अपशिष्ट को स्रोत पर ही चार भागों में अलग करना अनिवार्य है: ·         गीला अपशिष्ट , ·         सूखा अपशिष्ट , ·         स्वच्छता अपशिष्ट ·         और विशेष देखभाल अपशिष्ट।   इसके साथ ही , थोक अपशिष्ट उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है , जिन्हें विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व का...

जलवायु परिवर्तन से किसानों की सुरक्षा के लिए बनीं व्यापक रणनीतियां

सरकार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से कृषि पर उत्पन्न चुनौतियों का अध्ययन करने वाली एक परियोजना - जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए) को लागू कर रही है। इस परियोजना के तहत जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) के प्रोटोकॉल के अनुसार 651 कृषि जिलों के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता का आकलन किया गया है। इसमें 310 जिलों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से 109 जिलों को ‘अत्यंत उच्च’ तथा 201 जिलों को ‘उच्च’ संवेदनशीलता श्रेणी में रखा गया है। इन 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजनाएं (डीएसीपी) भी तैयार की गई हैं ताकि मौसम संबंधी असामान्यताओं का सामना किया जा सके तथा राज्य कृषि विभागों द्वारा उपयोग के लिए स्थान-विशिष्ट जलवायु-सहनशील फसलों , किस्मों और प्रबंधन पद्धतियों की सिफारिश की जा सके। जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति किसानों की सहनशीलता और अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने के लिए धान की सघनता प्रणाली , वायुजनित धान की खेती , धान की सीधी बुवाई , सूखा और गर्मी जैसी विषम परिस्थितियों को लेक...

कारखाने के कचरे का सड़क निर्माण में इस्तेमाल

·    औद्योगिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करना भारत की सर्कुलर अर्थव्यवस्था के विजन की कुंजी है - डॉ. एन. कलाइसेल्वी · कारखाने के कचरे का सड़क निर्माण में इस्तेमाल : स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई , आईआईएफ और सुयोग एलिमेंट्स ने हाथ मिलाया स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत (डब्ल्यूएफएस) के प्रभावी उपयोग के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए , भारतीय फाउंड्रीमैन संस्थान (आईआईएफ) ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और सुयोग एलिमेंट्स के साथ सीएसआईआर विज्ञान केंद्र , नई दिल्ली में एक सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) समझौता किया है। यह समझौता वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग - डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। इस साझेदारी का उद्देश्य कोयंबटूर क्लस्टर के डब्ल्यूएफएस (वर्किंग स्ट्रक्चरल स्ट्रक्चर) के सड़क अवसंरचना में उपयोग के...

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन को सूचित किए जाने वाले भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (2031-2035) को मंजूरी दी

·         भारत ने 2005 के स्तर से 2035 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने का संकल्प लिया ·         भारत का लक्ष्य 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 60 प्रतिशत संचयी विद्युत शक्ति संस्थापित क्षमता प्राप्त करना ह ·         भारत 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4.0 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य कार्बन सिंक का निर्माण करेगा ·         भारत की ये प्रतिबद्धताएं 2047 तक विकसित भारत और 2070 तक नेट-जीरो के लक्ष्य के अनुरूप हैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की कार्रवाई को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को मंजूरी दे दी है। इससे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफस...

जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पर राष्ट्रीय नवाचार ने 651 जिलों में जलवायु जोखिम का आकलन किया; 310 जिले संवेदनशील पाए गए, पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि को बढ़ावा

सरकार , भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए)” परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है , जिसका उद्देश्य कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करना तथा भविष्य के लिए तैयार कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना और खाद्यान्न की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। परियोजना के अंतर्गत , जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि के जोखिम एवं संवेदनशीलता का आकलन अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) के प्रोटोकॉल के अनुसार 651 प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में जिला स्तर पर किया गया है। इनमें से 310 जिलों को संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया गया , जिनमें 109 जिलों को ‘अत्यंत उच्च’ तथा 201 जिलों को ‘उच्च’ संवेदनशीलता श्रेणी में रखा गया है। इन 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं (डीएसीपी) भी तैयार की गई हैं , ताकि मौसम संबंधी असामान्यताओं का सामना किया जा सके तथा राज्य कृषि विभागों द्वारा उपयोग के लिए स्थान-विशिष्ट जलवायु-सहनशील फसलों , किस्मों और प्रबंधन पद्धतियों की सिफारिश की जा सके। एनआईसीआरए के अंतर्गत , जलवायु प...

भारत के हरित परिवर्तन को गति देने के लिए जीएसटी का विवेकीकरण, अपशिष्ट प्रबंधन, बायो डिग्रेडेबल उत्पाद और हरित परिवहन अधिक किफायती और सुलभ बनेगा

  हाल ही में जीएसटी के विवेकीकरण के माध्यम से स्थिरता और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया गया है , जिसमें अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं , जैव-अपघटनीय उत्पादों और हरित परिवहन पर कर दरों को कार्यनीतिक रूप से कम किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में किए गए इन सुधारों की रूपरेखा पर्यावरण के अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने , अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना को मजबूत करने और सतत परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है। ' विकसित भारत 2047 ' और ' लाइफ़ ' ( पर्यावरण के लिए जीवनशैली) जैसे राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप , ये बदलाव भारत के नेट ज़ीरो 2070 के लक्ष्य का समर्थन करते हैं और पेरिस समझौते के तहत प्रतिबद्धताओं को पूरा करते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण : सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी) सीईटीपी द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ·         लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए लागत बचत : क...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये