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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

हरित राजमार्ग और पर्यावरण को ध्यान में रखकर सड़क अवसंरचना का विकास

  हरित राजमार्ग (पौधरोपण , प्रत्यारोपण , सौंदर्यीकरण और रखरखाव) नीति , 2015 और भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) एसपीः 21-2009 के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों के उपलब्ध मार्ग और मध्य भाग के साथ-साथ जहां संभव हो पौधरोपण गतिविधियां शुरू की जाती हैं। इस दौरान लंबे समय तक जीवित रहने वाले और कार्बन अवशोषण क्षमता वाली देसी प्रजातियों के पौधे लगाने पर जोर दिया जाता है। संबंधित एजेंसियां राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव में पुनर्चक्रित सामग्रियों , अपशिष्ट उत्पादों और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही हैं और अपना रही हैं। राजमार्ग परियोजनाओं में तकनीकी विशिष्टताओं के अनुसार उपयुक्त सड़क निर्माण कार्यों में विभिन्न टिकाऊ और पुनर्चक्रित सामग्री जैसे कि दीवार और संरचनात्मक कार्यों में फ्लाई ऐश , बिटुमिनस परतों में रिक्लेम्ड एस्फाल्ट पेवमेंट (आरएपी) और निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) अपशिष्ट का उपयोग किया जाता है। पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए सड़क की कार्यक्षमता में सुधार हेतु व्यवहार्यता और दिशानिर्देशों के अनुसार बिटुमिनस मिश्...
हाल की पोस्ट

केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्राधिकरण (सीएक्यूएम) ने एनसीआर में सड़क की धूल को कम करने के लिए एमआरएसएम की तैनाती और उपयोग हेतु तकनीकी एवं परिचालन मानदंड जारी किए

  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सड़क की धूल को कम करने के उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक विस्तृत परिपत्र जारी किया है जिसमें क्षेत्र की सभी सड़क मालिक और सड़क रखरखाव एजेंसियों द्वारा मशीनीकृत सड़क सफाई मशीनों (एमआरएसएम) की तैनाती और उपयोग के लिए तकनीकी एवं परिचालन मानदंड निर्धारित किए गए हैं। सड़क की धूल पीएम 10 का प्रमुख स्रोत बनी हुई है और पीएम 2.5 के स्तर में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है , खासकर शुष्क महीनों में। अनियमित या अपर्याप्त सफाई पद्धतियों के कारण आस पास के परिवेश में वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता देखा गया है। इस परिपत्र में सड़कों से धूल उत्सर्जन को प्रभावी और मापनीय रूप से कम करने के लिए मार्ग अधिकार (आरओडब्ल्यू) आधारित एक व्यवस्थित कार्यान्वयन ढांचा निर्धारित किया गया है। आयोग ने पाया है कि एनसीआर में सड़कों की चौड़ाई और बनावट में व्यापक भिन्नता है , जिसके कारण प्रभावी मशीनीकृत सफाई के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। आयोग द्वारा...

दिल्ली-एनसीआर में टिकाऊ परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के विस्तार से इसे और मजबूत बनाया जाएगा

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता निगरानी ढांचे को टिकाऊ परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (सीएएक्यूएमएस) के नेटवर्क के व्यवस्थित विस्तार के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है , ताकि क्षेत्र भर में व्यापक कवरेज , बेहतर डेटा विश्वसनीयता और वायु प्रदूषण का ठोस वैज्ञानिक मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता निगरानी को बढ़ाना और दिल्ली-एनसीआर में प्रभावी वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए साक्ष्य-आधारित नीतिगत उपायों का समर्थन करना है। वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को सुदृढ़ करने के सतत प्रयासों के अंतर्गत , एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) दिल्ली-एनसीआर में 27 नए सीएक्यूएम ( 6 दिल्ली में , 7 हरियाणा (एनसीआर) में , 4 राजस्थान (एनसीआर) में और 10 उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में) के विस्तार की स्थिति की समीक्षा कर रहा है। ये नए केंद्र क्षेत्र की संबंधित एजेंसियों द्वारा संचालित 84 निगरानी केंद्रों ( 40 दिल्ली में , 22 हरियाणा-एनसीआर में , 4 राजस्थान-एनसीआर में और 18 उत्तर प्रदेश-एनसीआर में) के मौजूदा नेटवर्क ...
  स्वच्छता और सफाई सार्वजनिक स्वास्थ्य , गरिमा और जीवन की गुणवत्ता के लिए मूलभूत हैं। बस्तियों में कचरे के प्रबंधन से लेकर सार्वजनिक स्थानों के सम्मान तक , ये प्रथाएं समुदायों के कामकाज और विकास को प्रभावित करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में , स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सबसे आगे लाने , व्यवस्थाओं को मजबूत करने , शौचालयों तक पहुंच बढ़ाने और अपशिष्ट प्रबंधन में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस सामूहिक प्रयास ने स्वच्छता को एक व्यक्तिगत मामले से एक साझा नागरिक जिम्मेदारी के रूप में परिभाषित करने में मदद की है। बुनियादी ढांचा बदलाव को संभव बनाता है , लेकिन इसे बनाए रखने में दैनिक व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दीर्घकालिक प्रगति निरंतर अपनाई जाने वाली आदतों पर निर्भर करती है। स्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत अभियान इसी बदलाव को दर्शाता है। एकल-उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करना , कूड़ा न फेंकना और थूकना , गीले कचरे के लिए हरे और सूखे कचरे के लिए नीले रंग का उपयोग करके कचरे को अलग-अलग करना , हाथों की स्वच्छता बनाए रखना , शौचालयों...

उपग्रहों ने उत्तराखंड की पहाड़ियों में वनस्पति क्षेत्र सिकुड़ने की चेतावनी दी

  हिमालयी क्षेत्रों में वनस्पति की निगरानी रखने वाले उपग्रह-बदलते मौसमों में घास के मैदान पनपने , वन क्षेत्र के रंग परिवर्तन , घाटियों में पेड़-पौधों में बदलाव , जलवायु संवेदनशीलता , मौसम स्थिति अनुकुलूता और बढ़ती चिंता की कहानी बयां करते हैं। पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं , जो वैश्विक जोखिम और आपदाओं को और गंभीर बनाते हैं। जलवायु परिवर्तन वैश्विक औसत सतह तापमान को प्रभावित करता है , वर्षा की पद्धति में बदलाव लाता है और वनस्पति के आच्छादन को प्रभावित करता है। यह विभिन्न स्थानिक और समय अवधि पैमाने पर स्थानीय निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है। उपग्रह डेटा को व्यापकता से संसाधित करने वाले वैश्विक प्लेटफॉर्म गूगल अर्थ इंजन (जीईई) का पर्यावरण निगरानी और पृथ्वी अवलोकन के लिए उपयोग से भू-क्षरण , मिट्टी और धूल संबंधी गतिशीलता , शहरी विकास , तापमान में बदलाव और इससे प्रभावित होने वाले स्वास्थ्य का अध्ययन होता है। यह डेटा के पूर्व-प्रसंस्करण और इन्हें संग्रहित करने की आवश्यकताएं कम करके वृहद विश्लेषण को सुगम बनाता है। विज्ञान और ...

देश में जल परीक्षण सुविधाएं और सेवाएं

  देश में जल परीक्षण सुविधाएं और सेवाएं जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए जल के नमूनों की जांच करने और पेयजल नमूना संग्रह , रिपोर्टिंग , निगरानी और सर्वेक्षण के लिए एक ऑनलाइन जेजेएम-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली ( जेजेएम-डब्ल्यूक्यूएमआईएस) पोर्टल विकसित किया गया है। जेजेएम-डब्ल्यूक्यूएमआईएस पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार 04.02.2026 तक राज्य के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी/ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग की ओर से विभिन्न स्तरों पर 2,870 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालित किया जाता है। इनमें राज्य , क्षेत्रीय , जिला , उप-मंडल , ब्लॉक , मोबाइल और/या जल संग्रहण संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) सुविधा प्रयोगशालाएं शामिल हैं। राज्यवार विवरण संलग्न हैं । ग्रामीण समुदाय/लोगों को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे अपने जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को आम जनता को नाममात्र शुल्क पर जल नमूनों के परीक्षण करने की सुविधा उलब्ध कराएं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये