प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मानवता का कल्याण प्रकृति की रक्षा और उसके सम्मान में ही निहित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की सदियों पुरानी परंपराएं भी हमें इस धर्मसम्मत आचरण को अपनाने और प्राकृतिक जगत के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने की प्रेरणा देती है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया— “ लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥” यह सुभाषित यह संदेश देता है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्य बनाकर जिया गया जीवन ही सुख , सुरक्षा और कल्याण की नींव है। इसलिए , दिशाओं के रक्षक देवता , इंद्र के नेतृत्व में सभी प्रमुख देवगण , छहों ऋतुएं , सभी मास , वर्ष , रात्रियां , दिन और शुभ मुहूर्त सदैव मंगल और समृद्धि प्रदान करें। वेद , पवित्र स्मृतियां और धर्म सभी प्रकार से और सर्वत्र सब की रक्षा करें। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा ; “ प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मस...
स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के विजन से प्रेरित होकर मदनपल्ले नगरपालिका वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों की सतत पुनर्प्राप्ति के माध्यम से शहरी स्वच्छता को नया रूप दे रही है।
मदनपल्ले कैसे बन रहा है ‘शून्य अपशिष्ट शहर’ आंध्र प्रदेश की मदनपल्ले नगरपालिका वैज्ञानिक और सतत प्रथाओं के माध्यम से अपनी शहरी स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत कर रही है। तेज़ी से होते शहरी विकास और कचरे की बढ़ती मात्रा को देखते हुए इस नगरपालिका ने कचरे के पृथक्करण , वैज्ञानिक प्रसंस्करण और संसाधन पुनर्प्राप्ति पर केंद्रित एक संरचित और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है , जिसका उद्देश्य मदनपल्ले को ' शून्य अपशिष्ट शहर ' के रूप में विकसित करना है। नगरपालिका मदनपल्ले में प्रतिदिन लगभग 62 टन (टीपीडी) ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है , जिसमें 25.50 टीपीडी शुष्क अपशिष्ट , 36 टीपीडी गीला अपशिष्ट और 0.50 टीपीडी घरेलू खतरनाक अपशिष्ट शामिल है। इस अपशिष्ट का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पूरे शहर में स्रोत स्तर पर व्यवस्थित अपशिष्ट पृथक्करण व्यवस्था लागू की गयी है। अपशिष्ट को जैव अपघटनीय , गैर-जैव अपघटनीय और पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट में वर्गीकृत किया जाता है , जिससे वैज्ञानिक प्रसंस्करण , बेहतर पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं और पर्यावरण के अनुकूल निपटान को बढ़ावा मिलता है...