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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

टीडीबी-डीएसटी ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को स्वदेशी द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए सहयोग प्रदान किया है, इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट और कृषि-प्रसंस्करण अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक स्तर की सुविधा स्थापित करना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से धन सृजन के मिशन और शुद्ध शून्य ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।

भारत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था-संचालित औद्योगिक विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इसी क्रम में , भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को "द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन का निर्माण" परियोजना के लिए सहयोग प्रदान किया है। इ प्रस्तावित परियोजना में अभिलाषा बायोफ्यूल्स (एबीएफ) के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड विनिर्माण केंद्र स्थापित करना शामिल है। एबीएफ अगली पीढ़ी का नवीकरणीय डीजल और नेफ्था विकल्प है , जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। "ड्रॉप-इन" ईंधन के रूप में डिज़ाइन किया गया , एबीएफ मौजूदा इंजनों , ईंधन प्रणालियों या वितरण बुनियादी ढांचे में किसी भी संशोधन की आवश्यकता के बिना पारंपरिक जीवाश्म-आधारित डीजल को सीधे प्रतिस्थापित कर सकता है , जिससे यह परिवहन और औद्योगिक ऊर्जा खपत को कार्बनमुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक और बडे पैमाने पर समाधान बन जाता है। पूरी तरह से भारत में विकसित , यह तकनीक नवीन थर्मो-केमिकल...
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100 वर्षों के सौर डेटा से सूर्य की सतह के 11-वर्षीय गतिविधि चक्र के बारे में नई जानकारी मिली

भारत में एकत्रित किए गए सौर डेटा की सबसे पुरानी निरंतर श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध कोडाइकनाल सौर वेधशाला ने यह पता लगाने में मदद की है कि सूर्य पर विशाल संवहन पैटर्न सौर गतिविधि पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं , जिससे भविष्य में सौर चक्र के बारे में जानकारी मिलती है। चूल्हे पर उबलते पानी के बर्तन की तरह , सूर्य के भीतर उत्पन्न ऊर्जा संवहन द्वारा उसकी बाहरी परतों से होकर गुजरती है। संवहनी सेल सौर सतह पर एक नेटवर्क संरचना के रूप में छोटे पैमाने के कणिकाओं और बड़े पैमाने के अतिकणिकाओं के निर्माण का कारण बनते हैं। नेटवर्क सेल का औसत जीवनकाल 24 घंटे है और इनका आकार लगभग 30,000 किमी है। ठंडी अंतरकणीय परतों की चौड़ाई लगभग 6000 किमी है। इन अतिकणीय संरचनाओं की उत्पत्ति क्या है , इनका आकार किस कारक से निर्धारित होता है और 11 वर्षीय सौर चक्र से इनका क्या संबंध है , ये सभी प्रश्न अब तक अनसुलझे हैं। कोडाइकनाल सौर वेधशाला से प्राप्त 100 वर्षों से अधिक के डेटा पर आधारित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के एक हालिया अध्ययन से इन प्रश्नों पर कुछ प्रकाश पड़ता है। यह प्रेक्षित नेटवर्क सुपरग्रेन्युलर संवहन के प...

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के प्रभावी प्रवर्तन पर विचार-विमर्श करने हेतु देश भर के उपायुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस समीक्षा बैठक में देश भर से लगभग 759 से अधिक उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों ने भाग लिया।

  पेयजल और स्वच्छता विभाग ( डीडीडब्ल्यूएस) ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जल जीवन मिशन 2.0 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों/कलेक्टरों के साथ राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित की समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री के सुरक्षित जल एवं स्वच्छता सेवाओं के दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया गया और जिलों से सेवाओं की आपूर्ति , जल स्थिरता और ग्रामीण स्वच्छता प्रशासन को मजबूत करने का आग्रह किया गया जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम , 2026 के प्रभावी प्रवर्तन पर विचार-विमर्श करने हेतु देश भर के उपायुक्तों , जिला मजिस्ट्रेटों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस समीक्षा बैठक में देश भर से लगभग 759 से अधिक उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों ने भाग लिया। इस राष्ट्रीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मेन्ना ने की। बैठक में रा...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये