जलवायु वित्त , प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के विस्तार की आवश्यकता: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादवराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों का सम्मान करें ; केवल चर्चा नहीं , कार्यान्वयन और संयोजन की ओर बढ़ना आवश्यक भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (यूएनएफसीसीसी) के 31 वें सम्मेलन में शेष मतभेदों को दूर करने और महत्वाकांक्षी एवं संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी पक्षों से अधिक लचीलेपन , व्यावहारिकता और आपसी सम्मान की अपील की है। फिजी में आयोजित पूर्व-सीओपी 31 बैठक में राजनीतिक सहमति क्षेत्रों और परिणामों पर पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर कार्यान्वयन और समन्वय की आवश्यकता है। श्री यादव ने पूर्व-सीओपी के दौरान हुई चर्चाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी पक्षों के बीच मतभेदों की तुलना में साझा विचार कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित ...
परिचय: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई ) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए ) का पालन कर रहा है। मंत्रालय ने वर्ष 2018 से , पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करना शुरू कर दिया है। इस कार्य के व्यापक दायरे को देखते हुए , एक स्पष्ट रणनीतिक रूपरेखा की आवश्यकता थी। तदनुसार , एमओएसपीआई के एनएसओ ने पर्यावरण लेखा के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए ' भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन रणनीति 2022-2026' जारी की , जिसमें सामग्री प्रवाह लेखांकन (एमएफएएस ), महासागर लेखा , ऊर्जा लेखा और जैव विविधता एवं शहरी क्षेत्रों के लिए विषयगत लेखा आदि क्षेत्रों की पहचान की गई जिन पर उक्त अवधि के लिए कार्य किया जाना है। एमओएसपीआई ने पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य शुरू कर दिया है और वन , जैव विविधता , आर्द्रभूमि , महासागर लेखा , मृदा , जल गुणवत्ता , कृषि भूमि , ऊर्जा , अवशेष , शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए अध्ययन शुरू किए हैं , प्रकाशन और रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। मंत्रालय प...