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प्रकाश प्रदुषण

प्रकाश प्रदुषण से पड़ता प्रतिकूल प्रभाव

प्रकाश प्रदूषण क्या है ?

प्रकाश प्रदूषण के बारे में जानना आज सभी के लिए जरूरी है क्योंकि हम रोजाना कृत्रिम प्रकाश करके प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे है उल्लेखनीय है कि कृत्रिम प्रकाश का अनुचित या अत्यधिक उपयोग-जिसे प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution- LP) के रूप में जाना जाता है, इस प्रदुषण के कारण मानव, वन्य जीवन और जलवायु पर गंभीर व प्रतिकूल पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं । यहां यह भी ध्यान दिया जाना अपेक्षित है कि प्रकाश प्रदूषण मानव निर्मित कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था है जिसको मनुष्य अपनी इच्छाशक्ति के आधार पर रोक सकता है और नियंत्रित भी कर सकता है |

प्रकाश प्रदूषण के घटकों में क्या-क्या शामिल हैं ?

प्रकाश प्रदूषण मे अग्रलिखित घटक शामिल है

A) चकाचौंध (Glare): अत्यधिक चमक जो दृश्यता में अवरोध का कारण बनती है।

B ) स्काईग्लो (Skyglow): रिहायशी इलाकों में की जाने वाली प्रकाश व्यवस्था के कारण रात में आसमान का चमकना ।

C ) प्रकाश अतिचार (Light Trespass): प्रकाश का उस स्थान पर गिरना जहाँ इसकी आवश्यकता नहीं हो ।

D ) प्रकाश स्रोतों (Clutter): का चमकीला, भ्रमित और अत्यधिक समूह ।


प्रकाश प्रदूषण का प्रमुख कारण क्या है ?

सरल शब्दों में कहा जाय तो प्रकाश प्रदूषण शहरीकरण और औद्योगीकरण का एक प्रतिकूल प्रभाव है । इसके स्रोतों में प्रमुख है :-

A) इमारतों की बाहरी और आंतरिक प्रकाश व्यवस्था,

B) प्रकाश व्यवस्था के साथ किए जाने वाले विज्ञापन,

C) वाणिज्यिक संपत्तियों, कार्यालयों, कारखानों, स्ट्रीटलाइट्स तथा खेल स्थलों का निर्माण शामिल है जिनमे अत्यधिक चमक वाली प्रकाश व्यवस्था की जाती है


प्रतिकूल प्रभाव जो की प्रकाश प्रदूषण के कारण प्रकृति पर पड़ता है

प्रकाश प्रदूषण के कारण पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव अग्रलिखित्त है इसके कारण :-

A) ऊर्जा और धन की बर्बादी

जब प्रकाश बहुत अधिक मात्रा में उत्सर्जित होता है व जहाँ प्रकाश व्यवस्था की वास्तविक  आवश्यकता नहीं होती है, उन स्थानों पर तेज प्रकाश की अनावश्यक चमक बेकार है क्योकि इससे अनावश्यक रूप से ऊर्जा की बर्बादी होती है तथा भारी आर्थिक क्षति होती है व गंभीर पर्यावरणीय दुषपरिणाम होते हैं।

B ) प्रकाश प्रदुषण पारिस्थितिकी तंत्र और वन्य जीवन को बाधित करने का कारक बनता है इसके कारण प्रजनन, पोषण, नींद और शिकारियों से सुरक्षा जैसे गंभीर दुष्परिणामों का सामना मनुष्य व जिव जन्तुवों को करना पड़ता है | जीवन-निर्वाह के आवश्यक व्यवहारों को नियंत्रित करने हेतु पौधे व जानवर पृथ्वी पर दिन एवं रात के प्रकाश दैनिक चक्र पर निर्भर करते हैं । उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि रात में कृत्रिम प्रकाश उभयचरों, पक्षियों, स्तनधारियों, कीड़ों और पौधों सहित कई जीवों पर नकारात्मक एवं घातक प्रभाव डालता है । इसके साथ-साथ मनुष्य की भी नींद बाधित होती है | विगत दिनों एक अध्ययन से पता चला है कि कैसे रात्रिचर गोबर भृंग (Dung Beetles) रात्रिकालीन प्राकृतिक प्रकाश से मार्गनिर्देश न प्राप्त कर पाने की स्थिति में अपने आस-पास के वातावरण में संकेतों की खोज करने के लिये मजबूर होते हैं।

C ) मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुचानें का भी काम करता है प्रकाश प्रदूषण पृथ्वी पर अधिकांश जीवों की तरह मनुष्य का शारीर भी सर्कैडियन विधि का पालन करता हैं जिसे हम मनुष्य जैविक घड़ी या दिन-रात चक्र द्वारा शासित नींद-जागने के एक पैटर्न के रूप में उपयोग करते हैं । रात का कृत्रिम प्रकाश मनुष्य के जैविक घड़ी या दिन-रात के जीवन चक्र को बाधित कर सकता है । इसी का दुष्परिणाम अनिंद्र की शिकायत के रूप में सामने आ रहा है |

समाधान हासिल करने के दृष्टिकोण से प्रकाश प्रदूषण विषय के संबंध में विषय विशेषज्ञों की राय अग्रलिखित है

A )  प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रकाश प्रदूषण के अनुभव को जानवरों में कम करने के लिये एक उल्लेखनीय सरल उपाय है कि, रात में अनावश्यक प्रकाश बंद कर दें ।  

B ) जहाँ रोशनी को बंद नहीं किया जा सकता है, वहां प्रकाश को आवश्यकता अनुसार मर्यादित किया जा सकता है ताकि वे आसपास के वातावरण और आकाश में प्रकाश के  उत्सर्जन को रोका जा सके ।

C ) इंटरनेशनल डार्क-स्काईज़ एसोसिएशन ने 130 से अधिक 'इंटरनेशनल डार्क स्काई प्लेसेस' को प्रमाणित किया है, जहाँ कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था को स्काईग्लो और प्रकाश अतिचार को कम करने के लिये समायोजित किया गया है । हालाँकि लगभग ये सभी स्थल उत्तरी गोलार्ध में स्थित विकसित देशों में पाए जाते हैं।


स्काईग्लो के बारे में जन साधारण को जानना क्यों जरूरी है ?

क्या है स्काईग्लो ? इस प्रश्न उत्तर यह है कि, स्काईग्लो शहरों में और उनके आस-पास रात के समय आकाश में प्रकाश की एक सर्वव्यापी चादर है जो सबसे चमकीले सितारों को छोड़कर सभी को अवरुद्ध कर सकती है और प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पर्यावरण पर विपरित प्रभाव डालती है मानव निर्मित कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के कारण रात के समय रिहायशी इलाकों में आसमान का चमकना स्ट्रीट लाइट, अनियंत्रित फ्लडलाइट और बाहरी सजावटी रोशनी स्काईग्लो का कारण बनता है । गौर तलब रहे की यह प्रकाश सीधे रात्रिचर (रात में सक्रिय जीव) की आँखों में जाता है तथा उन्हें मार्ग से भटकाने का कार्य करता है । इसलिए स्काईग्लो' प्रकाश प्रदूषण के घटकों में से एक प्रमुख घटक माना जाता है ।


 

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

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जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

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पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

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