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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के उपलक्ष्य में 31वां विश्व ओज़ोन दिवस मनाया

· प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत शीतलन कार्य योजना (आईसीएपी) पर कार्यान्वयन योग्य मार्ग निर्धारित करने में उच्च अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को प्रदर्शित करती है: श्री भूपेंद्र यादव

·   भारत ने एचसीएफसी उत्पादन और खपत में 67.5 प्रतिशत की कमी और एचसीएफसी-141बी को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है: भारत में यूएनडीपी की स्थानीय प्रतिनिधि, सुश्री एंजेला लुसिगी

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी) ने आज नई दिल्ली में 31वें विश्व ओज़ोन दिवस का आयोजन किया। विश्व ओज़ोन दिवस 2025 का विषय है 'विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक', जो नीति निर्माण में सहायता करने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रेरित करने के लिए वैज्ञानिक खोज की शक्ति पर ध्यान देता है। इसके साथ ही यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित सामूहिक कार्रवाई हमारे ग्रह और उसके भविष्य की रक्षा कर सकती है। इस कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार और भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की प्रतिनिधि सुश्री एंजेला लुसिगी भी उपस्थित थीं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव ने पूर्व-रिकॉर्ड किए गए संदेश के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। श्री यादव ने कहा कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत ने मिलकर ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले 99 प्रतिशत पदार्थों को समाप्त करने के लिए काम किया, जिससे ओजोन परत में सुधार हो रहा है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और उपयोग को विनियमित करके, जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत शीतलन कार्य योजना (आईसीएपी) विकास और कार्यान्वयन रूपरेखा कार्रवाई योग्य रास्ते तैयार करने में उच्च अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को प्रदर्शित करता है। यह शीतलन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थायी शीतलन प्रदान करता है जबकि इसके नकारात्मक प्रभावों को बेअसर करता है। श्री यादव ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ सहयोग सहित कम ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (कम-जीडब्ल्यूपी) रेफ्रिजरेंट के स्वदेशी विकास को प्रोत्साहन देने की दिशा में मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य को समग्रता में देखा जाना चाहिए, जिसमें विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित समस्याओं का समाधान भी सम्मिलित है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने प्रदर्शित किया है कि वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित सामूहिक कार्रवाई हमारे ग्रह और उसके भविष्य की रक्षा कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण उपकरण प्रदान करने की पहल से देश में शीतलन और वातानुकूलन क्षेत्र में कुशल कार्यबल का विकास होगा।


श्री कुमार ने मंत्रालय द्वारा की गई अन्य पहलों पर प्रकाश डाला, जिसमें मिशन लाइफ (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली) भी शामिल है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली के लिए दैनिक जीवन में सोच-समझकर चुनाव और निर्णय के माध्यम से जीवन जीने के एक स्थायी और पर्यावरण के प्रति जागरूक तरीके को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने का एक अभियान है। उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रमुख पहल, 'एक पेड़ माँ के नाम' के महत्व पर भी बल दिया, जो एक स्थायी भविष्य और पृथ्वी ग्रह की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री रजत अग्रवाल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, ओजोन परत के संरक्षण में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के महत्व पर प्रकाश डाला।

सुश्री एंजेला लुसिगी ने सभा को संबोधित करते हुए, याद किया कि विश्व ओजोन दिवस मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत वैश्विक सहयोग के सबसे सफल उदाहरणों में से एक है। उन्होंने भारत द्वारा अपने आधार रेखा से एचसीएफसी उत्पादन और खपत में 67.5 प्रतिशत कमी का लक्ष्य हासिल करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में एचसीएफसी-141बी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने 120 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को शीतलन और वातानुकूलन प्रशिक्षण के लिए उन्नत उपकरणों से सुसज्जित करने, ओजोन संरक्षण को हरित कौशल, नौकरियों और आजीविका से जोड़ने में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को यूएनडीपी के समर्थन को भी रेखांकित किया।

विश्व ओज़ोन दिवस 2025 की मुख्य विशेषताएँ

i. औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को शीतलन एवं वातानुकूलन (आरएसी) प्रशिक्षण उपकरण प्रदान किए गए।

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के साथ घनिष्ठ सहयोग में, देश भर के 120 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को शीतलन एवं वातानुकूलन (आरएसी) प्रशिक्षण उपकरण प्रदान कर रहा है। यह ध्यान में रखते हुए कि सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आरएसी व्यापार और भौगोलिक संतुलन वाले संस्थान हैं।

उपकरण आईटीआई को आरएसी व्यापार के छात्रों को प्रशिक्षित करने और उन्हें सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करके उपकरणों की स्थापना और रखरखाव के लिए तैयार करने में सक्षम बनाएंगे। इसमें कम ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (जीडब्ल्यूपी) वाले रेफ्रिजरेंट को संभालना शामिल है, जिनमें ज्वलनशीलता, विषाक्तता और सुरक्षा संबंधी मुद्दे होते हैं और उनके कौशल और दक्षताओं को बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा, यह देश में आरएसी क्षेत्र में कुशल कार्यबल के विकास में सहायता करेगा, विशेषरूप से मौजूदा एचसीएफसी चरण-आउट और एचएफसी चरण-डाउन के दौरान उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, जिसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 2028 के किगाली संशोधन के भाग के रूप में लागू किया जाना है।

2- 'औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को शीतलन और वातानुकूलन (आरएसी) प्रशिक्षण उपकरण सहायता' पर लघु वीडियो फिल्म जारी की गई।

3-सामग्री का विमोचन

i- स्कूली बच्चों के लिए ऑनलाइन राष्ट्रीय स्तर की पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिताओं से विजेता प्रविष्टियों का विमोचन और विजेता प्रविष्टियों की घोषणा।

ओज़ोन परत की सुरक्षा के प्रति छात्रों में जागरूकता पैदा करने के लिए, राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से, देश भर के स्कूली बच्चों के लिए पोस्टर निर्माण और नारा लेखन की श्रेणी में ऑनलाइन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता के लिए 6,322 और नारा श्रेणी के लिए 2,428 प्रविष्टियाँ क्रमशः इस उद्देश्य के लिए विकसित एक विशेष वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हुईं। निर्णायक मंडल द्वारा विजेता प्रविष्टियों का अंतिम रूप दिया गया। विजेता पोस्टर का विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त, पोस्टर और नारा श्रेणियों में अन्य विजेता प्रविष्टियों की घोषणा की गई।

ii. ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: भारत की सफलता की कहानी’ का 27वां संस्करण जारी किया गया, जिसमें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कार्यान्वयन में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।

4. प्रकाशनों का विमोचन

i- भरत में जिला शीतलन प्रणाली (डीसीएस) की तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता पर अध्ययन। यह अध्ययन देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में पारंपरिक शीतलन प्रणालियों की तुलना में डीसीएस को अपनाने की तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करता है।

ii-बड़े एयर कंडीशनिंग भवनों में चिलर के लिए कम ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (जीडब्ल्यूपी) वाली वैकल्पिक तकनीकों पर अध्ययन। यह अध्ययन स्थायी तरीके से शीतलन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े भवनों में कम जीडब्ल्यूपी वाली तकनीकों वाले चिलर के उपयोग का आकलन करता है।

iii- कोल्ड चेन में अमोनिया/कम ग्लोबल वार्मिंग क्षमता वाली वैकल्पिक तकनीकों की स्थापना और रखरखाव के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं पर अध्ययन। यह अध्ययन कम जीडब्ल्यूपी विकल्पों के साथ कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे की स्थापना और प्रबंधन के लिए स्थायी प्रथाओं पर केंद्रित है।

iv. परिवहन शीतलन क्षेत्र में कम जीडब्ल्यूपी तकनीकों पर अध्ययन। यह अध्ययन परिवहन शीतलन में कम जीडब्ल्यूपी तकनीकों को अपनाने की व्यवहार्यता का आकलन करता है और उनके अपनाने को बढ़ावा देने के उपायों का प्रस्ताव करता है।

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पीके/केसी/एमकेएस/डीए प्रविष्टि तिथि: 16 SEP 2025 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2167318) आगंतुक पटल : 97

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