सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति ने वैज्ञानिक तरीकों से नदी प्रबंधन मजबूत करने के लिए प्रमुख अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी


राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की 67वीं कार्यकारी समिति (ईसी) बैठक की अध्यक्षता महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल ने की। कार्यकारी समिति की बैठक में प्रदूषण निवारण और अनुसंधान पर विशेष ध्यान देते हुए गंगा नदी के पुनरुद्धार के लिए विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यकारी समिति ने नदियों में उपचारित सीवेज के सुरक्षित और कुशल परिवहन के माध्यम से दिल्ली में यमुना के पुनरुद्धार और दिल्ली के स्कूली बच्चों तक शैक्षिक जन-पहुंच पर भी ध्यान केंद्रित किया।

बैठक में जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री गौरव मसलदान, एनएमसीजी उप महानिदेशक श्री नलिन श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, तकनीकी श्री अनूप कुमार श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, प्रशासन श्री एस.पी. वशिष्ठ, कार्यकारी निदेशक, परियोजनाएं श्री बृजेन्द्र स्वरूप, कार्यकारी निदेशक, वित्त श्री भास्कर दासगुप्ता, एसएमसीजी उत्तर प्रदेश के परियोजना निदेशक, श्री प्रभाष कुमार, एसपीएमजी पश्चिम बंगाल परियोजना की निदेशक सुश्री नंदिनी घोष के साथ-साथ एनएमसीजी और भाग लेने वाले राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।


कार्यकारी समिति की बैठक में शोध-आधारित नदी पुनरुद्धार पर बल देने के साथ-साथ गंगा बेसिन में वैज्ञानिक समझ और डेटा-आधारित नियोजन को मज़बूत करने के उद्देश्य से प्रमुख शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

 ये पहल, प्रमुख हिमालयी गंगा हेडस्ट्रीम ग्लेशियरों की निगरानी, ​​गंगा के लिए डिजिटल ट्विन विकास और उच्च-रिज़ॉल्यूशन सोनार-आधारित नदी तल सर्वेक्षण, पैलियोचैनलों के माध्यम से प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण और एक ऐतिहासिक भू-स्थानिक नदी डेटाबेस का निर्माण महत्वपूर्ण क्षेत्रों में की गई है। ये शोध प्रयास मिलकर, दीर्घकालिक नदी बेसिन प्रबंधन में अत्याधुनिक विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरणों और वास्तविक समय जल विज्ञान मॉडलिंग को एकीकृत करने की एनएमसीजी की रणनीति में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है



ये स्वीकृतियां नीतिगत निर्णय और पुनरुद्धार उपाय ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा निर्देशित करने के एनएमसीजी की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इसका उद्देश्य है कि गंगा बेसिन में जलवायु लचीलापन, भूजल सुरक्षा, तलछट प्रबंधन और नदी स्वास्थ्य के लिए सटीक योजना बनाना संभव हो सके।


कार्यकारी समिति ने पश्चिम बंगाल में प्रदूषण निवारण की दिशा में एक प्रमुख पहल के रूप में सिलीगुड़ी में महानंदा नदी के प्रदूषण निवारण के लिए नालों को रोकने और मोड़ने तथा एसटीपी के निर्माण के लिए 361.86 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना में 25 चीरा और जल निकासी (आई एंड डी संरचनाएं), चार लिफ्टिंग स्टेशन, जल उपचार के लिए 27 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) और 22 एमएलडी के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और राइजिंग मेन और आई एंड डी लाइनों का एक व्यापक नेटवर्क शामिल है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी-आधारित पीपीपी मॉडल पर चलाई जाएगी। इन पहलों से शहरी स्वच्छता प्रणालियों में उल्लेखनीय सुधार होगा और पश्चिम बंगाल की नदियों में फैलने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

कार्यकारी समिति ने कोरोनेशन पिलर एसटीपी से यमुना नदी तक उपचारित सीवेज के परिवहन को मंजूरी दे दी है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य कोरोनेशन पिलर एसटीपी से यमुना नदी तक उपचारित सीवेज का सुरक्षित और कुशल परिवहन सुनिश्चित करना है। इससे नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार होगा और यमुना कार्य योजना के चल रहे प्रयासों को बल मिलेगा। इस परियोजना में जहांगीरपुरी नाले से अनुपचारित सीवेज का प्रबंधन, नए पंपिंग स्टेशनों का निर्माण, राइजिंग मेन और आरसीसी चैनल बिछाना, नाले के ऊपर ट्रस पुलों का निर्माण और उपचारित अपशिष्ट जल के लिए परिवहन अवसंरचना जैसे प्रमुख घटक शामिल हैं।

कार्यकारी समिति ने ऊपरी गंगा बेसिन में ग्लेशियरों और ग्लेशियर पिघलने से होने वाले अपवाह परिवर्तनों और जल-जलवायु एवं स्थलाकृतिक संदर्भ से उनके सम्बंध पर 3.98 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की द्वारा किए जाने वाले इस अध्ययन में ग्लेशियरों के पीछे हटने, बदलते हिम आवरण और ऊपरी गंगा बेसिन में पिघले हुए अपवाह पर उनके प्रभाव की जांच की जाएगी। यह परियोजना, क्षेत्रीय अवलोकनों, सुदूर संवेदन और एक युग्मित मॉडलिंग ढांचे का उपयोग करते हुए दीर्घकालिक ग्लेशियर व्यवहार, अपवाह परिवर्तनों और आकस्मिक बाढ़ व जीएलओएफ जैसे सम्बंधित जोखिमों का आकलन करेगी। इसने बिजनौर से बलिया तक गंगा नदी के सोनार-आधारित बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण को भी मंजूरी दी है। इसकी अनुमानित लागत 3 करोड़ रुपये से अधिक है और इसमें 1,100 किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत तलछट प्रबंधन, जलगति की मॉडलिंग, पर्यावरण-प्रवाह मूल्यांकन और दीर्घकालिक पुनर्स्थापन योजना में सहायता के लिए एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन, सोनार-आधारित अंतर्जलीय स्थलाकृतिक आधार रेखा तैयार करना है,

ऊपरी गंगा नहर में 10 मीटर के अंतराल पर 10 सेमी के अंतराल पर पानी की गहराई और 30 सेमी के अंतराल पर समोच्च रेखा दर्शाने वाला मानचित्र


कार्यकारी समिति ने गंगा-यमुना दोआब (प्रयागराज-कानपुर खंड) में खोजे गए पैलियोचैनल पर 'प्रबंधित एक्वीफर रिचार्ज (एमएआर)' परियोजना को कुल 242.56 लाख रुपये की मंजूरी दी। इस अध्ययन का उद्देश्य उपयुक्त सरकारी भूमि स्थलों की पहचान करना और कौशाम्बी और कानपुर के बीच पैलियोचैनल के साथ वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए एमएआर संरचनाओं, जैसे रिचार्ज पिट और शाफ्ट का निर्माण करना है। इस परियोजना में छह स्थानों पर डीडब्ल्यूएलआर जैसी निगरानी प्रणालियां स्थापित करना और दो जल विज्ञान चक्रों में भूजल पुनर्भरण प्रभावों का आकलन करना शामिल है। कार्यकारी समिति ने 3.31 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत पर हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग, एआई और सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके गंगा बेसिन के लिए इंटेलिजेंट रिवर बेसिन मैनेजमेंट: ए डिजिटल ट्विन एंड वाटर साइकल एटलस गंगा बेसिन के ऐतिहासिक मानचित्रों के डिजिटलीकरण और भू-स्थानिक डेटाबेस के लिए 2.62 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना में ऐतिहासिक मानचित्रों (1900 से पूर्व से 1950 के बाद) की पहचान और डिजिटलीकरण, जीआईएस-आधारित डेटाबेस का निर्माण, एक सुरक्षित भू-पोर्टल और नदी आकृति विज्ञान और बाढ़ के मैदानों में परिवर्तनों का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन शामिल है।

कार्यकारी समिति ने 39.37 लाख रुपये की लागत वाली 'युवा गंगा के लिए, युवा यमुना के लिए' पहल को मंज़ूरी दी है । इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के कम से कम 200 स्कूलों के 2.5 लाख से ज़्यादा युवाओं को नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता और ज़िम्मेदारी के प्रति संवेदनशील बनाना है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नदी युवा क्लबों का गठन, जल उपयोग के सम्बंध में युवाओं में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना और नमामि गंगे अभियान को बढ़ावा देना है। आईआईपीए द्वारा अनुमोदित यह परियोजना छह महीने में पूरी हो जाएगी।

कार्यकारी समिति ने इन स्वीकृतियों के माध्यम से बेहतर जल प्रबंधन, सुदृढ़ निगरानी प्रणालियों और गंगा के पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षमताओं को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

***

पीके/केसी/वीके/एचबी प्रविष्टि तिथि: 17 NOV 2025 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2190848) आगंतुक पटल : 226

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...