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जल प्रबंधन और संरक्षण

 अटल भूजल योजना सामुदायिक नेतृत्व वाली सहभागी भूजल प्रबंधन योजना है। इस योजना का कार्यान्वयन सात राज्यों नामतः गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश कीजल की अत्यधिक कमी वाले 8,203 ग्राम पंचायतों में एक पायलट योजना के रूप में किया गया था। अटल भूजल योजना का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी और मांग-पक्ष के उपायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चयनित राज्यों में भूजल प्रबंधन में सुधार करना था, ताकि इस संसाधन की स्थायित्वता को सुनिश्चित किया जा सके। इस योजना के उक्त उद्देश्यों को, संस्थागत और गवर्नेंस फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करते हुए और राज्यों को जमीनी स्तर पर भूजल संरक्षण के उपायों के कार्यान्वयन हेतु प्रोत्साहित करते हुए प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया था।

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वयन किए जा रहे 'जल शक्ति अभियान: कैच द रेन' (जेएसए: सीटीआर) अभियान के तहतवैज्ञानिक जल संरक्षण योजनाओं को तैयार करने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए जल निकायों की गणना, जियो-टैगिंग और उन्हें सूचीबद्ध करना प्रमुख उपायों में से एक है। जिला कलेक्टरों और मजिस्ट्रेटों से अनुरोध किया गया है कि वे राजस्व के पिछले रिकॉर्ड, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) से प्राप्त रिमोट सेंसिंग डाटा और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस)मैपिंग तकनीक का उपयोग करते हुए जल निकायों की गणना करें ताकि सीमाओं को चिह्नित किया जा सके, संरचनाओं को जियो-टैग और राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र (एनडब्ल्यूआईसी) तथा राज्य जल संसाधन सूचना प्रणालियों से डाटा को एकीकृत किया जा सके । यह दृष्टिकोण डाटा-आधारित वैज्ञानिक संरक्षण योजनाओं के विकास को सक्षम बनाता है।

इसके अतिरिक्त, इस संबंध में एक उल्लेखनीय पहल इंडिया-डब्ल्यूआरआईएसपोर्टल के तहत जीआईएस-आधारित उप-पोर्टल "जल धरोहर"का विकास है, जो 01 नवंबर 2023 से बीटा संस्करण में उपलब्ध है। यह पोर्टल समस्त भारतवर्ष में जल निकायों का समेकित एवं जियो-टैग डाटाबेसप्रस्तुत करता है तथा यह जल शक्ति अभियान, अटल भूजल योजना, लघु सिंचाई सांख्यिकी, जल निकायों की सर्वप्रथम गणना और राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र (एनडब्ल्यूआईसी) सहित कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों और स्रोतों से डाटा को एकीकृत करता है।यह जल संसाधनों के प्रति जागरूकता के सृजन, उनकी आयोजना और मॉनिटरिंग के लिए दृश्य एवं स्थानिकटूलके रूप में कार्य करता है।

जल राज्य का विषय है। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और नीति-स्तर के उपायों के माध्यम से सहयोग कर राज्यों के प्रयासों को समर्थन प्रदान किया जाता है। इस दिशा में, सरकार द्वारा न केवल देश के जल संसाधनों की मैपिंग और मॉनिटरिंग के लिए, बल्कि सटीक नीतिगत उपायों की योजना का निर्माण करने और उन योजनाओं के परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए भी कईअत्याधुनिक डिजिटल और प्रौद्योगिकीय उपकरणोंका उपयोग किया जाता है। इस संबंध में कुछ उल्लेखनीय पहल निम्नलिखित हैं:

    राष्ट्रीय जलभृत मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (नैक्यूम): केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा नैक्यूम कार्यक्रम का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में  जलभृत मैपिंग, पुनर्भरण क्षेत्रों की पहचान करना तथा  स्रोत की स्थायित्वता का आकलन करने के लिएरिमोट सेंसिंग(आरएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली(जीआईएस) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है। उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले उप-सतही डाटा के लिए विशिष्ट क्षेत्रों मेंहेलिबोर्न भू-भौतिकीय सर्वेक्षणकिए जा रहे हैं।

 रियल टाइम मॉनिटरिंग: सीजीडब्ल्यूबी द्वारा टेलीमेट्री सिस्टम से संस्थापित लगभग 23,000 डिजिटल जल स्तर रिकॉर्डर (डीडब्ल्यूएलआर) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से भूजल स्तर की रियल टाइम मॉनिटरिंगकी जाती है। यह नेटवर्क भूजल स्तर संबंधी लगभग सटीक रियल-टाइम डाटाको एक केंद्रीय सर्वर पर उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे और अधिक प्रभावी संरक्षण योजनाएं तैयार करने में सहायता प्राप्त होती है।

 वेब-आधारित प्लेटफॉर्म:सीजीडब्ल्यूबी द्वारा एक वेब-आधारित एप्लिकेशन इंडिया-ग्राउंडवाटर रिसोर्स एस्टिमेशन सिस्टम (इन-ग्रेस) विकसित किया गया है। यह पूरे देश में भूजल संसाधन आकलन के लिए एक मानकीकृत मंच प्रदान करता है। ये आँकड़े मनरेगा, अटल भूजल योजना, जल शक्ति अभियान जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं।

  जेएसए: सीटीआरडैशबोर्ड: यह डैशबोर्ड मंत्रालय के तहतराष्ट्रीय जल मिशनद्वारा जल शक्ति अभियान के अंतर्गत "कैच द रेन" (सीटीआर) अभियान कीमॉनिटरिंग, आकलन और प्रबंधनके लिए बनाया गया एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह जल संरक्षण गतिविधियों से संबन्धित प्रगति का आकलन करने के लिए डाटा संग्रह और विश्लेषण केंद्र के रूप में कार्य करता है तथा यह वैज्ञानिक जल संरक्षण योजनाओं को तैयार करने में सहायता प्रदान करता है।

 राष्ट्रीय जल सूचना-विज्ञान केंद्र (एनडब्ल्यूआईसी): मंत्रालय के अंतर्गत एनडब्ल्यूआईसी देश के जल संसाधनों के डाटा के केंद्रीय भंडारके रूप में कार्य करता है। अपने अधिदेश के अनुरूप, एनडब्ल्यूआईसी स्थानिक, गैर-स्थानिक, समय-श्रृंखला और स्थिर जल-मौसम विज्ञान डाटा यथा वर्षा, नदी का जल स्तर और प्रवाह, भूजल स्तर, जल की गुणवत्ता, मृदा की नमी, जलवायु, भूवैज्ञानिक और अन्य भू-आकृति विज्ञान डाटा का रखरखाव करती है।

 जलाशय स्तर और बाढ़ की मॉनिटरिंग: केंद्रीय जल आयोग द्वारा विकसित इन हाउस ऐप 'फ्लड वॉच इंडिया', सटीक और समयबद्ध रूप से बाढ़ पूर्वानुमान के लिए उपग्रह डाटा विश्लेषण, गणितीय मॉडलिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करता है। यह ऐप 592 बाढ़ मॉनिटरिंग स्टेशनों और देश के 150 प्रमुख जलाशयों की भंडारण स्थिति के संबंध में सूचना प्रदान करता है।

 जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग: पीएमकेएसवाई-एसएमआई, आरआरआर, अटल भूजल योजना आदि के तहत निर्मित विभिन्न सिंचाई/जल संरक्षण संरचनाओं की मॉनिटरिंग जीआईएस आधारित एप्लिकेशन्स और टूल्स के माध्यम से की जाती है।

 उपग्रह और रिमोट सेंसिंग डाटा का उपयोग: मंत्रालय द्वारा जल संसाधनों के विभिन्न प्रकार के मैपिंग  और मॉनिटरिंग हेतु उपग्रह और रिमोट सेंसिंग डाटा का उपयोग करने के उद्देश्य से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) तथा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद जैसी एजेंसियों के साथ सक्रिय सहयोग किया जा रहा है।

   इसके अतिरिक्त, मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं जैसे पीएमकेएसवाई, एनएमसीजी, अटल भूजल योजना, लघु सिंचाई गणना आदि से संबन्धित डाटा के संग्रह, इनके प्रचार-प्रसार और कार्य-निष्पादन की मॉनिटरिंग के लिएडिजिटल डैशबोर्ड, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐपआदि का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा राज्‍यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

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एनडी(रिलीज़ आईडी: 2197957) आगंतुक पटल : 103 प्रविष्टि तिथि: 01 DEC 2025 by PIB Delhi

 

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