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भारत के जल भविष्य के लिए भूजल प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण


  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन, 712 जल शक्ति केंद्र, और 53,264 अटल जल जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन का नेटवर्क है।
  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR), जल संचय जन भागीदारी (JSJB), अटल भूजल योजना (अटल जल), और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलें भूजल प्रबंधन में उल्लेखनीय प्रगति दिखा रही हैं।
  • सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से SDG 6, SDG 11, और SDG 12 के लिए, प्रभावी भूजल प्रबंधन आवश्यक है।

प्रस्तावना

 

भूजल के अंतर्गत पृथ्वी का कुल 99% तरल मीठा पानी समाहित है जो हमें कई तरह के सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है। इसमें जलवायु लचीलापन भी शामिल है। भारत में, भूजल कृषि गतिविधियों और पेयजल आपूर्ति का प्राथमिक आधार है, जो लगभग 62% सिंचाई आवश्यकताओं, 85% ग्रामीण खपत, और 50% शहरी मांग को पूरा करता है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि, कृषि गहनता, औद्योगिक विस्तार, और शहरीकरण ने देश में सामूहिक रूप से भूजल प्रणालियों पर दबाव बढ़ा दिया है। इस संदर्भ में, वैज्ञानिक रूप से सूचित और सतत भूजल प्रबंधन प्रथाओं को अपनाना अनिवार्य हो गया है। गौरतलब है कि जल शासन का विषय राज्य सरकारों के दायरे में आता है, केंद्रीय सरकार, विशेष रूप से जल शक्ति मंत्रालय और संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से, विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए समन्वित तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर इनके संरक्षण, नियमन, और देश भर में दीर्घकालिक भूजल प्रबंधन को मजबूत करने में सुविधाप्रद भूमिका निभाती है।

भूजल का प्रबंधन दीर्घकालीन सुरक्षा और सतत उपलब्धता के लिए जरूरी

भूजल को समझना

भूजल वह मीठा पानी है जो मिट्टी और चट्टानों में रिसकर भूमिगत यानी भूमि के अंदर संग्रहित हो जाता है, जहाँ से यह स्वाभाविक रूप से बाहर आता है या मानवीय उपयोग के लिए निकाला जाता है। यह नदियों और धाराओं के जल स्तर को बनाए रखता है तथा आर्द्रभूमियों में पौधों और जंतुओं के आवास को मजबूती से प्रभावित करता है। भूमिगत परत जिसमें पर्याप्त मात्रा में भूजल संग्रहीत और संचालित हो सके, उसे जलभृत (Aquifer) कहा जाता है। जलभृतों से पानी स्वाभाविक रूप से बहकर झरनों, धाराओं और नदियों में योगदान दे सकता है, या खुदाई वाले कुओं, ट्यूबवेल और बोरवेल के माध्यम से पंप किया जा सकता है।

 भूजल प्रबंधन - तत्व और प्राथमिकताएँ

भूजल प्रबंधन एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और संरक्षण का हिस्सा है। भूजल प्रबंधन के मूल आधार हैं: भूजल (जलभृतों) के कार्य और उपयोग, उन पर कार्यरत समस्याएँ और दबाव (खतरे), तथा प्रबंधन उपायों का भूजल प्रणाली की समग्र कार्यप्रणाली और स्थिरता पर प्रभाव।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के अनुसार, भूजल संसाधनों के सतत एवं संतुलित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी भूजल प्रबंधन में 4 प्रमुख प्राथमिकताएँ आवश्यक हैं।

भूजल प्रबंधन की आवश्यकता

भारत में व्यापक भूजल भंडार हैं, जिनकी भौतिक विशेषताएँ और उपलब्धता विभिन्न क्षेत्रों में काफी भिन्न है, फिर भी हाल के दशकों में इन संसाधनों पर अत्यधिक निकासी, घटती गुणवत्ता और सीमित नियमन से तनाव बढ़ा है, जो दीर्घकालिक स्थिरता पर गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।

भूजल प्रणालियों पर बढ़ता दबाव: तीव्र और मुख्यतः अनियमित पंपिंग से देश के कई हिस्सों में जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है, जो भूमिगत स्रोतों पर हमारी बढ़ती निर्भरता को भी दर्शाता है।

जल गुणवत्ता का ह्रास: खनन गतिविधियों, औद्योगिक अपशिष्टों और कृषि प्रथाओं से उत्पन्न प्रदूषण, साथ ही आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे प्राकृतिक तत्वों ने क्रमिक रूप से भूजल गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।

अनियंत्रित निकासी के कारक: भूजल निकासी में तेज वृद्धि सस्ती ड्रिलिंग तकनीकों और पंपिंग प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता से प्रेरित हुई है, जिससे छोटे किसानों और निम्न आय वाले परिवारों को भी निजी ट्यूबवेल बनाने और चलाने में सक्षम बनाया गया।  बढ़ते भूजल संकट ने सरकार की प्रभावी प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत किया है, जिसकी पुष्टि भारत की सीओपी 21 से जलवायु लचीलापन और दीर्घकालिक विकास के लिए दर्शाई प्रतिबद्धता से होती है। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, विशेष रूप से एसडीजी 6, एसडीजी 11 और एसडीजी 12 के लिए, प्रभावी भूजल प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

भूजल प्रबंधन को लेकर भारत सरकार की पहल

बढ़ते भूजल तनाव और सतत जल सुरक्षा की आवश्यकता के जवाब में, भारत सरकार ने भूजल प्रबंधन को मजबूत करने, पुनर्भरण व संरक्षण को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक आकलन में सुधार लाने तथा पूरे भारत में सहभागी एवं परिणामोन्मुखी भूजल प्रबंधन को प्रोत्साहित करने वाली व्यापक नीतियों, कार्यक्रमों एवं समुदाय-प्रेरित पहलों का समूह शुरू किया है।

मॉडल भूजल (विकास एवं प्रबंधन का नियमन और नियंत्रण) विधेयक

भूजल संसाधनों को अंधाधुंध निकासी रोकने और वर्षा जल संचयन तथा कृत्रिम पुनर्भरण जैसी सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नियमन एवं प्रबंधन आवश्यक है। इन विचारों को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने राज्यों द्वारा भूजल संसाधनों के नियंत्रण एवं प्रबंधन हेतु नियामक ढांचा प्रदान करने के लिए मॉडल भूजल विधेयक तैयार किया।


·         यह मॉडल विधेयक सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ साझा किया गया है, अब तक 21 ने इसे अपनाया है, जिनमें बिहार, पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।

·         केंद्र सक्रिय रूप से राज्य सरकारों के साथ संवाद करता है ताकि भूजल संसाधनों का विवेकपूर्ण नियमन एवं सतत प्रबंधन हो।

·         केंद्र सक्रिय रूप से राज्य सरकारों के साथ संवाद करता है ताकि भूजल संसाधनों का विवेकपूर्ण नियमन एवं सतत प्रबंधन हो।

·          यह सहभागिता नियमित पत्राचार, सेमिनारों, राज्य जल मंत्रियों और मुख्य सचिवों के सम्मेलनों, तथा जल संसाधन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में भूजल पर राष्ट्रीय अंतरविभागीय संचालन समिति (एनआईएससी) के अंतर्गत होने वाले विचार-विमर्श के माध्यम से की जाती है।

·        
जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR)

JSA: CTR अभियान की शुरुआत 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर की गई। यह अभियान जल संरक्षण पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता निर्माण एवं सामूहिक कार्रवाई को हर बूंद गिनती का संदेश मजबूत करते हुए प्रोत्साहित करता है। यह देश भर के नागरिकों को व्यावहारिक उपायों एवं समुदाय-स्तरीय सहभागिता से भारत के जल भविष्य के संरक्षण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।

·         JSA: CTR के पाँच केंद्रित हस्तक्षेप हैं: (i) जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन; (ii) सभी जल निकायों की पहचान, जियो-टैगिंग एवं सूचीबद्धता, साथ ही जल संरक्षण हेतु वैज्ञानिक योजना; (iii) सभी जिलों में जल शक्ति केंद्र स्थापित करना; (iv) केंद्रित वनीकरण; तथा (v) जागरूकता सृजन।

·         JSA: CTR के प्रमुख हस्तक्षेपों में परित्यक्त एवं निष्क्रिय बोरवेलों का पुनर्जीवन शामिल है जो भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देता है, जिसे देश भर में अन्य केंद्रित हस्तक्षेपों से समर्थन मिलता है।जिसे देश भर में अन्य केंद्रित हस्तक्षेपों से समर्थन मिलता है।

·         मार्च 2021 से लेकर जनवरी 2026 तक जेएसए: सीटीआर अभियान में हासिल तरक्की

जल संचय जन भागीदारी (JSJB)

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) पहल को JSA: CTR अभियान के तहत 6 सितंबर 2024 को शुरू किया गया।

·         यह पहल वर्षा जल संचयन, जलभृत पुनर्भरण, बोरवेल पुनर्भरण तथा पुनर्भरण शाफ्ट जैसे उपायों से भूजल पुनर्भरण सुधारने का प्रयास करती है।

·         यह स्थानीय स्तर पर घटते भूजल स्तर से निपटने हेतु एक विस्तार योग्य एवं सतत मॉडल के रूप में डिजाइन की गई है तथा उन्नत निगरानी प्रणालियों को एकीकृत करती है जो भूजल पुनर्भरण का समर्थन करती है तथा जिम्मेदार भूजल प्रबंधन एवं सतत जल उपयोग को बढ़ावा देती है।

·         22 जनवरी 2026 तक, JSJB 1.0 एवं JSJB 2.0 के तहत संचयी रूप से पूर्ण कृत्रिम भूजल पुनर्भरण एवं संग्रहण कार्यों की कुल संख्या 39,60,333 है।                                                                                                                                                                                                 ·         राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM)

·         देश में प्रभावी भूजल प्रबंधन के समर्थन हेतु NAQUIM (2012-2023) कार्यक्रम चलाया गया, जिसका उद्देश्य था:

·         हाइड्रोजियोलॉजिकल गुणों के आधार पर जलभृतों का विशेषीकरण।

·         भूजल उपलब्धता एवं गुणवत्ता का आकलन

·         विस्तृत जलभृत मानचित्र तैयार करना

·         सतत भूजल प्रबंधन रणनीतियाँ विकसित करना

  • NAQUIM 2.0: NAQUIM के अनुभव पर आधारित, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) द्वारा NAQUIM 2.0 (2023-वर्तमान) कार्यान्वित किया जा रहा है जो भूजल प्रबंधन को मजबूत करने हेतु:

·         भूजल स्तर एवं गुणवत्ता पर उच्च-विवरण डेटा घनत्व प्रदान करता है

·         पंचायत स्तर तक मुद्दा-आधारित वैज्ञानिक इनपुट प्रदान करता है

·         जल-तनावग्रस्त, तटीय, शहरी, स्रोत-क्षेत्र, औद्योगिक एवं खनन, कमांड, गहन जलभृत, स्वतः-प्रवाह तथा निम्न-गुणवत्ता भूजल वाले क्षेत्रों को क्षेत्र-विशिष्ट एवं उपयोगकर्ता-केंद्रित आउटपुट के साथ लक्षित करता है।

  • NAQUIM कार्यक्रम के तहत प्रगति:

भूजल हेतु कृत्रिम पुनर्भरण मास्टर प्लान-2020

·         भूजल हेतु कृत्रिम पुनर्भरण मास्टर प्लान 2020 जल उपलब्धता एवं जलभृत संग्रहण क्षमता के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्भरण तकनीकों को बढ़ावा देता है।

·         यह अति-निकासी, शुष्क क्षेत्र scarcitiy, पहाड़ियों में निम्न retention तथा शहरी पुनर्भरण बाधाओं सहित क्षेत्रीय भूजल चुनौतियों का समाधान करता है।

·         ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून अतिरिक्त अपवाह का प्रभावी उपयोग हेतु सतह प्रसारण एवं उप-सतह पुनर्भरण विधियों पर जोर दिया गया है।

·         शहरी, पहाड़ी एवं तटीय क्षेत्रों में छत वर्षा जल संचयन एवं संबद्ध उपायों से वर्षा जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।

·         योजना देश में लगभग 1.42 करोड़ वर्षा जल संचयन एवं कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण हेतु व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है ताकि 185 BCM (अरब घन मीटर) भूजल का पुनर्भरण हो सके।

 अटल भूजल योजना (अटल जल)

अटल भूजल योजना (अटल जल) 7 राज्यों—गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश—के जल-तनावग्रस्त क्षेत्रों में समुदाय-नेतृत्व वाले सतत भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। 25 दिसंबर 2019 को शुरू की गई यह योजना जल जीवन मिशन के लिए जल स्रोतों की स्थिरता का समर्थन करती है। यह किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी लक्ष्य का भी समर्थन करती है तथा समुदायों में जिम्मेदार जल उपयोग को प्रोत्साहित करती है। यह जागरूकता सृजन, स्थानीय क्षमता निर्माण, अन्य सरकारी योजनाओं से समन्वय तथा उन्नत कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने में भी सहायता करती है।

·         योजना के तहत राज्यों को प्रोत्साहन मजबूत डेटाबेस, वैज्ञानिक योजना तथा समुदाय सहभागिता पर आधारित उपयुक्त निवेशों से समर्थित हैं।

·         पाँच वर्षीय परियोजना कार्यान्वयन योजना के तहत कुल ₹6,000 करोड़ का वित्तीय आवंटन घटक A (₹1,400 करोड़) संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए तथा घटक B (₹4,600 करोड़) प्रोत्साहन-आधारित परिणामों के लिए वितरित है, जो परिणामोन्मुखी डिजाइन को दर्शाता है।

·         अटल भूजल योजना के तहत प्रगति (20 जनवरी 2026 तक):

 राज्य

भूजल स्तर गिरावट रोकने में तरक्की

सक्षम जल उपयोग में हेक्टेयर इलाका

स्थापित डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर

स्थापित डिजिटल/  एनालॉग वाटर लेवल निर्देशांक

गुजरात

20

58,470.19

828

2001

 हरियाणा

18

1,77,454.25

1,165

1669

 कर्नाटक

23

1,86,595.22

970

410

मध्यप्रदेश

5

13,493.24

669

670

महाराष्ट्र

16

1,31,372.06

1,129

1133

राजस्थान

20

74,352.07

960

1144

उत्तर प्रदेश

6

26,945.97

550

392

  कुल

108

6,68,683.00

6271

7419

स्रोत- जल शक्ति मंत्रालय

 मिशन अमृत सरोवर

24 अप्रैल 2022 को शुरू किया गया मिशन अमृत सरोवर देश के सभी जिलों में अमृत सरोवरों (तालाबों) के निर्माण का समर्थन करता है। प्रत्येक तालाब का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) तथा जल संग्रहण क्षमता लगभग 10,000 घन मीटर निर्धारित है।

  • यह मिशन जल संरक्षण बढ़ाने, सिंचित क्षेत्र का विस्तार करने तथा भूजल स्तर सुधारने का लक्ष्य रखता है, जिसमें अमृत सरोवरों का पुनर्जीवन एवं निर्माण प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण का समर्थन करता है।
  • मिशन अमृत सरोवर के तहत प्रगति (22 जनवरी 2026 तक):

भारत की भूजल अधोसंरचना की देखरेख , पुनर्स्थापन और जानकारी समर्थन

  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन हैं, जो केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित हैं। CGWB अपने क्षेत्रीय अवलोकन कुओं के नेटवर्क के माध्यम से देश भर में भूजल स्तर की नियमित निगरानी करता है।

  • अटल भूजल योजना (अटल जल) के तहत बुनियादी ढांचा

अटल भूजल योजना (अटल जल) के तहत सतत भूजल प्रबंधन के समर्थन हेतु व्यापक निगरानी, पुनर्भरण एवं डेटा बुनियादी ढांचा स्थापित किया गया है (30 दिसंबर 2025 तक):

अधोसंरचना

उपलब्धता स्थिति

जल गुणवत्ता देखरेख स्टेशन

53,264

कृत्रिम रिचार्ज और जल संरक्षण संरचना

97,742

पीज़ोमीटर (अटल जल )

6,519

वर्षा गौज़ स्टेशन

8,201

जल प्रवाह मीटर

32,286

पंजीकृत कुएं

15,03,711

जल गुणवत्ता देखरेख (फिल्ड टेस्टिंग किट से)

1,15,358

स्रोत- जल शक्ति मंत्रालय

  • जल शक्ति केंद्र (JSK) जिला-स्तरीय तकनीकी मार्गदर्शन केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो वर्षा जल संचयन पर हितधारकों को सलाह देता है तथा जल संरक्षण प्रथाओं पर सूचना प्रसार एवं तकनीकी समर्थन प्रदान करने हेतु ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करता है। 30 दिसंबर 2025 तक, भारत भर में कुल 712 जल शक्ति केंद्र (JSK) कार्यरत हैं।

 

 निष्कर्ष

2016 Model Bill for the Conservation, Protection, Regulation and Management of Groundwater 2016

भूजल भारत की जल सुरक्षा का केंद्र है, जो कृषि, पेयजल आपूर्ति, पारिस्थितिक तंत्र एवं कृषि गतिविधियों को बनाए रखता है, किंतु अति-निकासी, गुणवत्ता ह्रास तथा जलवायु परिवर्तनशीलता से उत्पन्न बढ़ते दबावों ने सतत भूजल प्रबंधन को अनिवार्य बना दिया है। इसके जवाब में भारत ने जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में नीति सुधार, वैज्ञानिक आकलन, बुनियादी ढांचा निर्माण तथा समुदाय सहभागिता को संयोजित करने वाली व्यापक एवं बहु-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया है।

मॉडल भूजल विधेयक, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन, जल संचय जन भागीदारी, NAQUIM 2.0, भूजल हेतु कृत्रिम पुनर्भरण मास्टर प्लान 2020, अटल भूजल योजना तथा मिशन अमृत सरोवर जैसी प्रमुख पहलें संयुक्त रूप से पुनर्भरण, निगरानी, नियमन तथा मांग-पक्ष प्रबंधन को मजबूत करती हैं।

भूजल निगरानी स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क, उन्नत डेटा प्रणालियाँ तथा स्थानीय ज्ञान केंद्रों से समर्थित ये प्रयास वैज्ञानिक रूप से सूचित, सहभागी एवं परिणामोन्मुखी भूजल शासन की ओर संक्रमण की निशानी है। यह दीर्घकालिक स्थिरता, जलवायु लचीलापन तथा राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु एक टिकाऊ ढांचा स्थापित करता है।

 संदर्भ

2016 Model Bill for the Conservation, Protection, Regulation and Management of Groundwater 2016

 

भारत की संसद

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/184/AS292_TrM9KV.pdf?source=pqals
https://sansad.in/getFile/annex/269/AU109_JyaRxc.pdf?source=pqars
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU1986_6mBwr2.pdf?source=pqals
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU1907_ncHZ2c.pdf?source=pqals

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)

https://cag.gov.in/webroot/uploads/download_audit_report/2021/Report%20No.%209%20of%202021_GWMR_English-061c19df1d9dff7.23091105.pdf

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC–PM), भारत सरकार

https://eacpm.gov.in/wp-content/uploads/2024/05/Addressing_Groundwater_Depletion_in_India.pdf

जल शक्ति मंत्रालय

https://jsactr.mowr.gov.in/
https://jsactr.mowr.gov.in/PublicDashboard.aspx
https://jsactr.mowr.gov.in/Public_Dash_2021/DashBoard.aspx
https://jsactr.mowr.gov.in/JSJB/DashboardJsjb.aspx
https://jsactr.mowr.gov.in/website/help-documents/Concept-Note-Jal-Shakti-Kendras-for-MIS-Portal.pdf
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https://www.jalshakti-dowr.gov.in/offerings/schemes-and-services/details/atal-bhujal-yojna-ANyETNtQWa

https://jalshakti-data.gov.in/JSDV/groundwatermap
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https://nwm.gov.in/amrit-sarovar
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https://ncog.gov.in/AmritSarovar/Amrit_Sarovar_December_2023.pdf

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केंद्रीय जल आयोग, जल शक्ति मंत्रालय

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प्रेस सूचना ब्यूरो

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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2113865&reg=3&lang=2
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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2122478&reg=3&lang=2

संयुक्त राष्ट्र

https://www.un.org/sustainabledevelopment/water-and-sanitation/
https://www.un.org/sustainabledevelopment/cities/
https://www.un.org/sustainabledevelopment/sustainable-consumption-production/

यूनेस्को

https://www.un.org/sites/un2.un.org/files/un_world_water_dev._report_2022.pdf
https://unesdoc.unesco.org/ark:/48223/pf0000379093

यूनाइटेड नेशन इकोनॉमिक कमीशन फॉर यूरोप (यूएनसीइ)

https://unece.org/DAM/env/water/publications/assessment/guidelinesgroundwater.pdf

विश्व बैंक

https://documents1.worldbank.org/curated/en/697581528428694246/pdf/India-PAD-126071-IN-05162018.pdf

अमेरिकी आंतरिक विभाग, संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS)

https://pubs.usgs.gov/circ/circ1186/pdf/circ1186.pdf
https://www.usgs.gov/faqs/what-groundwater

यू.एस. एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी (US EPA)

https://www.epa.gov/sites/default/files/documents/groundwater

कैलिफोर्निया जल संसाधन विभाग

https://water.ca.gov/Programs/Groundwater-Management/Wells/Well-Standards/Combined-Well-Standards/Monitoring-Introduction

 

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वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...