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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल की वायु प्रदूषण कार्य योजनाओं की समीक्षा कीऔद्योगिक अनुपालन, अपशिष्ट प्रबंधन और वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता निगरानी के विस्तार पर जोर दिया गया


 केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के शहरों रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बनाई गई कार्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

केंद्रीय मंत्री ने पीएम 10 के उच्च स्तर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित लगातार बनी हुई समस्याओं पर चिंता व्यक्त की, जिसमें निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट, विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में, शामिल हैं। श्री यादव ने बताया कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए, वित्तपोषण और अनुमोदन से संबंधित मामलों सहित, हरियाणा सरकार के माननीय मुख्यमंत्री के साथ प्राथमिकता के आधार पर एक बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी एनसीआर शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जानकारी की समीक्षा करते हुए, श्री यादव ने निर्देश दिया कि स्थापना अनुमति (सीटीई) और संचालन अनुमति (सीटीओ) के साथ और बिना संचालित उद्योगों पर व्यापक डेटा संकलित किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने एनसीआर के सभी जिला मजिस्ट्रेटों/जिला कलेक्टरों को सीटीओ/सीटीई अनुमतियों, कुल वाणिज्यिक बिजली कनेक्शनों और जीएसटी पंजीकरण वाली औद्योगिक इकाइयों से संबंधित डेटा एकत्र करने के निर्देश जारी किए। इन डेटासेटों का सहसंबंध स्थापित करके अवैध रूप से संचालित और नियमों का पालन न करने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जानी है, विशेष रूप से ओसीईएम और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) प्रतिष्ठानों के संबंध में। केंद्रीय मंत्री ने वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता निगरानी को सक्षम करने के लिए समीर ऐप से एकीकृत स्वचालित सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (सीएएक्यूएमएस) की संख्या बढ़ाने का भी निर्देश दिया।

केंद्रीय मंत्री ने प्रदूषण में योगदान देने वाले हितधारकों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सड़क की चौड़ाई और यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, छोटे नगर निगमों को सार्वजनिक परिवहन के लिए उपयुक्त आकार के वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया। यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों (एमआरएसएम) और हाथ से चलने वाले कूड़ा बीनने वाले यंत्रों के उपयोग पर भी बल दिया गया और निर्देश दिया गया कि परिचालन व्यय (ओपी-एक्स) मॉडल के तहत केवल इलेक्ट्रिक वाहन/सीएनजी आधारित मशीनें ही खरीदी जाएं।

धूल नियंत्रण उपायों के तहत, खुले स्थानों और फुटपाथों पर स्थानीय झाड़ीदार पौधों के रोपण और गड्ढों की मरम्मत के लिए निर्देश जारी किए गए। केंद्रीय मंत्री ने सभी समीक्षाधीन शहरों से भीड़भाड़ और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मार्ट यातायात प्रबंधन योजनाएं प्रस्तुत करने का भी आह्वान किया। यह निर्देश दिया गया कि 5 किमी x 5 किमी के ग्रिड में निर्माण एवं विध्वंस सी एंड डी अपशिष्ट संग्रहण सुविधाएं स्थापित की जाएं, जिन्हें निकटतम अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा से मैप किया गया हो।

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मुद्दों की जिम्मेदारी लें और स्थानीय हितधारकों को सक्रिय रूप से शामिल करते हुए नवीन और व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने के लिए जमीनी स्तर पर सशक्त नेतृत्व का प्रदर्शन करें। एनसीआर के सभी शहरों में प्रस्तुत किए गए सभी बिंदुओं को संकलित किया जाएगा और सीएक्यूएम द्वारा की गई कार्रवाई की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी। लक्षित कार्रवाई और जिम्मेदारी निर्धारण नियमित अंतराल पर किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य 2026 तक एनसीआर में एक्यूआई स्तर में कम से कम 15-20 प्रतिशत की कमी लाना है।


इस बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए), कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएफडब्ल्यू), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारी और रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल के नगर आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट उपस्थित थे।

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पीके/केसी/जीके/एसएस  प्रविष्टि तिथि: 20 JAN 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2217007) आगंतुक पटल : 11

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