जैव विविधता के संरक्षण और जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष एवं समान वितरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने राज्य जैव-विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव-विविधता परिषदों के जरिए लाभार्थियों के बीच 45.05 लाख रुपए का वितरण किया है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों को 45.05 लाख रुपए वितरित किए
यह लाभ-साझाकरण
की राशि विभिन्न जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न हुई है, जिनमें कुछ कीट, मिट्टी और जल में पाए जाने वाले
सूक्ष्मजीवों से लेकर खेती की गई लाल चंदन तक शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग
विभिन्न प्रकार के उत्पादों के निर्माण में किया गया, जो यह
दर्शाता है कि जैव विविधता कैसे वैज्ञानिक नवाचार और जैविक-अर्थव्यवस्था को आगे
बढ़ाने में सहायक होती है। पहुंच और लाभ-साझाकरण व्यवस्था के तहत, कंपनियों द्वारा अर्जित व्यावसायिक लाभ का एक हिस्सा संबंधित समुदायों को
लौटाया जाता है। इससे न केवल उनकी आजीविका में सुधार होता है, बल्कि उन्हें जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण के लिए प्रेरणा भी मिलती
है।
हाल के
वर्षों में,
एनबीए ने पारदर्शिता को बढ़ाने और व्यापार सुगमता के लिए सरल नियम
लागू किए हैं, साथ ही समुदायों के हितों की रक्षा और जैव
विविधता संरक्षण को प्राथमिकता देना जारी रखा है। जैव विविधता को स्थायी रूप से
उपयोग में लाने और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एनबीए
विभिन्न हितधारकों जैसे राज्यों, स्थानीय निकायों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और समुदायों के साथ मिलकर काम
करता है। यह जमीनी स्तर पर पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखते हुए जन जैव-विविधता
रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और सहभागितात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से जैव-विविधता के
प्रबंधन का समर्थन करता है।
***
पीके/केसी/बीयू/एसएस
प्रविष्टि तिथि: 09
FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2225312) आगंतुक
पटल : 407