सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

देश में वन, वन्य जीव और जैव विविधता से संबंधित कानूनों के अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू प्रमुख कानून


 संसद प्रश्न: पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रमुख कानून, नियम और विनियम

देश में वन, वन्य जीव और जैव विविधता से संबंधित कानूनों के अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू प्रमुख कानून इस प्रकार हैं:

(i) जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974  और जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024

(ii) वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

(iii) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, और

(iv) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021

देश में पर्यावरण संरक्षण कानूनों और स्वच्छता नियमों के क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए, उपरोक्त कानूनों के अंतर्गत विभिन्न नियम और विनियम अधिसूचित किए गए हैं और विभिन्न योजनाओं को राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतों के समन्वय से लागू किया जा रहा है।

विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने और कानूनी रूपरेखा को लागू करने के लिए, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य पर्यावरण विभाग, राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/प्रदूषण नियंत्रण समितियों और स्थानीय निकायों को कानूनी रूपरेखा के तहत प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार प्रदान किए गए हैं।

कानून में एक अंतर्निहित व्यवस्था है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को संबंधित सरकार के समक्ष वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है और संबंधित सरकार प्रत्येक रिपोर्ट को संसद या राज्य विधान सभा के समक्ष प्रस्तुत कराएगी।

एमओईएफसीसी (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय)/ एसईआईएए (राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण) से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) से अनुमति उन परियोजनाओं के लिए अनिवार्य है, जिनका प्रदूषण भार पर प्रभाव होता है।

इसके अतिरिक्त, नियमित अनुपालन रिपोर्टें समय-समय पर सक्षम अधिकारियों को प्रस्तुत की जाती हैं और एमओईएफसीसी तथा संबंधित एसपीसीबी के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता है। ओपनकास्ट कोयला खानों का तृतीय पक्ष पर्यावरण मंजूरी अनुपालन समीक्षा, निर्धारित अंतराल पर राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई), भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई), आईआईटी-आईएसएम जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों से संपन्न कराई जाती हैं, जो पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के अनुपालन में होती हैं।

विभिन्न पर्यावरण कानूनों के तहत संचालित परियोजनाओं, जिसमें कोयला खदानें भी शामिल हैं, के लिए पर्यावरण अनुपालन ढांचे को और मजबूत करने के लिए, सरकार ने पर्यावरण समीक्षा नियम, 2025 को अधिसूचित किया है। ये नियम पंजीकृत पर्यावरण समीक्षा विशेषज्ञों के माध्यम से व्यवस्थित पर्यावरण समीक्षा की एक संरचित प्रक्रिया स्थापित करते हैं ताकि पर्यावरण सुरक्षा उपायों के अनुपालन को सत्यापित किया जा सके, उत्सर्जन और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की जाँच की जा सके और उल्लंघनों की रिपोर्ट तैयार की जा सके। यह समीक्षा तंत्र केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा किए जा रहे मौजूदा निगरानी कार्य में पूरक भूमिका निभाता है।

सहमति व्यवस्था के माध्यम से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/प्रदूषण नियंत्रण समिति प्रदूषण नियंत्रण उपायों की अनुशंसा करके और पर्यावरण मानकों के अनुपालन की जांच करके उद्योगों की स्थापना और संचालन तथा प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी करते हैं,

यदि परियोजनाएँ/गतिविधियाँ संशोधित ईआईए अधिसूचना, 2006 के अनुसूची के तहत आती हैं, तो पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन किया जाता है और पर्यावरण प्रबंधन योजनाएँ तैयार की जाती हैं, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, रोकथाम और कम करने के उपायों को शामिल किया जाता है, ताकि पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी देते समय उचित पर्यावरण सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें।

केंद्र सरकार को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या किसी प्राधिकरण को लिखित निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है, ताकि वह अपने कार्यों का पालन करे, जिसमें किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया के बंद करने, रोकने या नियंत्रित करने, बिजली, पानी और किसी अन्य सेवा की आपूर्ति को रोकने या विनियमित करने के निर्देश शामिल हैं।

वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 18 और जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 18, केंद्र सरकार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसके कार्यों को निभाने के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार देती है और इसके अलावा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या राज्य सरकार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश जारी करने का अधिकार देती है।

इसके अलावा, वायु अधिनियम, 1981 की धारा 31 ए और जल अधिनियम, 1974 की धारा 33 ए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को उसके कार्यों के निष्पादन के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार देती हैं, जिसमें किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया के बंद करने, रोकने या नियंत्रित करने, बिजली, पानी और किसी अन्य सेवा की आपूर्ति को रोकने या नियंत्रित करने के निर्देश शामिल हैं।

ई(पी) अधिनियम, 1986, वायु अधिनियम, 1981 और जल अधिनियम, 1974 संबंधित अधिनियमों, नियमों, आदेशों और निर्देशों के तहत जारी प्रावधानों के उल्लंघन करने पर न्यूनतम दस लाख रुपये और पंद्रह लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान करती हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्लूएम) नियम, 2026 ने स्थानीय निकायों को विभिन्न जिम्मेदारियों का प्रावधान दिया है, जिसमें शामिल हैं: ठोस अपशिष्ट कार्रवाई योजनाएँ तैयार करना, ठोस अपशिष्ट का घर-घर संग्रह व्यवस्थित करना, ठोस अपशिष्ट का संग्रह, वर्गीकरण, परिवहन और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से प्रसंस्करण करना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अवसंरचना स्थापित करना, विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक जिम्मेदारी प्रमाण पत्र जारी करना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रावधानों को शामिल करने के लिए उपनियम तैयार करना, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण करना और वार्षिक रिटर्न दाखिल करना आदि।

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (पीडब्लूएम) नियम, 2016 स्थानीय निकायों को प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, प्रक्रिया और निपटान के लिए अवसंरचना तैयार करना अनिवार्य करता है, चाहे वे स्वयं करें या एजेंसियों को काम पर लगाएं।

बैटरी कचरा प्रबंधन नियम, 2022 के तहत, स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है कि वे संग्रहित बैटरी कचरे को उत्पादकों या उनके प्रतिनिधि एजेंसियों या उन इकाइयों को सौंपें, जो उन बैटरियों को नवीनीकरण या पुनर्चक्रण के उद्देश्य से नवीनीकरण या पुनर्चक्रण का कार्य करते हैं।

बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के तहत, स्थानीय निकायों को सामान्य बायो-मेडिकल कचरा उपचार और निपटान करना अनिवार्य करता है ताकि सामग्री प्राप्ति सुविधा (एम आर एफ) या घरों से सीधे संग्रहित बायो-मेडिकल कचरा उठाकर पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटान किया जा सके।

पर्यावरण (निर्माण और ध्वस्त) अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2025 के तहत, स्थानीय निकायों को निर्माण और ध्वस्त अपशिष्ट (सी और डी) का संग्रह करने, सँभालने और प्रसंस्करण करने के संबंध में नियम लागू करने तथा निर्माण एजेंसियों/उत्पादकों द्वारा विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी लक्ष्यों के अनुपालन की निगरानी करने और गैर-अनुपालन के लिए पर्यावरणीय मुआवजा लगाने का निर्देश दिया गया है।

 

ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत, स्थानीय निकायों को ठोस अपशिष्ट के साथ मिश्रित ई-अपशिष्ट को अलग करने, ई-अपशिष्ट को पंजीकृत पुनर्चक्रण या पुनर्निर्माण तक इकट्ठा करके पहुंचाने, ई-अपशिष्ट संग्रहण, पृथक्करण और निपटान प्रणाली स्थापित करने में सहायता करने और शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों की क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के तहत, स्थानीय निकायों को संदिग्ध दूषित स्थलों की सूची राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) को समय-समय पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

ये नियम प्रभावी प्रवर्तन, निगरानी और समीक्षा तंत्र की सुविधा प्रदान करते हैं, जिसमें विभिन्न एजेंसियों द्वारा नियमित रिपोर्ट/रिटर्न प्रस्तुत करना, एकीकृत ऑनलाइन पोर्टलों का संचालन, राज्य या केंद्र स्तर पर नियमों के तहत गठित समितियों की समय-समय पर बैठकें, और सीपीसीबी या एसपीसीबी द्वारा वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना शामिल है।

यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

***

पीके / केसी / जेके /डीके प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2224145) आगंतुक पटल : 51

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...