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भूजल के पीने योग्य होने संबंधी विश्लेषण

 

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य सरकारें अपनी स्थापित प्रयोगशालाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिकल कंडक्टीविटी, फ्लोराइड, नाइट्रेट, भारी धातुओं आदि जैसे विभिन्न गुणवत्ता मापदंडों/संदूषकों के लिए नियमित आधार पर भूजल गुणवत्ता परीक्षण और विश्लेषण करता हैं।

इसके अतिरिक्त, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्यों के साथ भागीदारी में कार्यान्वित किए जा रहे जल जीवन मिशन (जेजेएम), जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है, के तहत आपूर्ति किए जा रहे जल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के बीआईएस:10500 मानकों को मानक के रूप में अपनाया गया है। इसके अलावा, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 तक, जेजेएम के तहत देश भर में 2,870 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं (जो भूजल स्रोतों को भी कवर करती हैं) चल रहीं हैं।

इसके अतिरिक्त, पेयजल के नमूने एकत्र करने, परीक्षण करने और निगरानी करने की कुशल निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन जेजेएम - जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (जेजेएम-डब्ल्यूक्यूएमआईएस) पोर्टल विकसित किया गया है।

इसके अतिरिक्‍त, समुदायों को जल की गुणवत्‍ता की निगरानी करने के लिए सशक्‍त बनाने के लिए, राज्‍यों/संघ राज्य क्षेत्रों को यह भी सलाह दी गई है कि वे प्रत्‍येक गांव में 5 व्‍यक्तियों, खासकर महिलाओं की पहचान करें और उन्‍हें प्रशिक्षण दें कि वे ग्राम स्‍तर पर फील्‍ड परीक्षण किटों (एफटीके) का उपयोग करके जल गुणवत्‍ता परीक्षण करें। अब तक देश भर में लगभग 24.80 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से लगभग 8 लाख महिलाएं डब्ल्यूक्यूएसआईएस पोर्टल पर सक्रिय रूप से अपनी रिपोर्ट अपडेट कर रही हैं।

जल राज्य का विषय है और भूजल संदूषण को कम करने के लिए पहल करने और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल प्रदान करने का उत्तरदायित्व मुख्य रूप से राज्य सरकारों का है। हालांकि, राज्य सरकारों के प्रयासों में सहायता करने के लिए, केंद्र सरकार द्वारा इन मुद्दों के समाधान करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:

·        सीजीडब्ल्यूबी द्वारा सृजित भूजल गुणवत्ता डेटा को हितधारकों द्वारा त्वरित कार्रवाई के लिए वार्षिक रिपोर्ट, अर्धवार्षिक बुलेटिन और पाक्षिक अलर्ट के माध्यम से नियमित रूप से प्रसारित किया जाता है।

·        राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (एनएक्यूयूआईएम) के तहत जलभृत मानचित्रण अध्ययन करते समय, सीजीडब्ल्यूबी भूजल गुणवत्ता से प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है और संदूषण की रोकथाम और जलभृत के उपचार के लिए उपयुक्त प्रबंधन योजनाएं प्रस्तावित कर रहा है।

·        सीजीडब्ल्यूबी ने आर्सेनिक और फ्लोराइड सुरक्षित कुओं के निर्माण की तकनीक भी विकसित की है और प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे कुओं का प्रदर्शनात्मक निर्माण के अलावा, राज्य के विभागों को इसी तरह के निर्माण कार्य शुरू करने के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है।

·        जेजेएम के तहत, योजना के कार्यान्वयन के लिए, गुणवत्ता प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है।

·        जलभृतों के कृत्रिम पुनर्भरण द्वारा भूजल की गुणवत्ता में कुछ हद तक सुधार भी किया जा सकता है, जो यदि मौजूद हो तो संदूषण को कम करने में सहायक होता है। तदनुसार, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालय इस दिशा में कई कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रहे हैं, जैसे वार्षिक जल शक्ति अभियान, जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) पहल, अटल भूजल योजना, पीएमकेएसवाई और मनरेगा योजनाएं आदि।

·        भूजल प्रदूषण का एक मुख्य कारण सतही जल स्रोतों का दूषित होना भी है, जिसके निवारण के लिए देश में विभिन्न प्रयास जैसे कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, इंटरवेन्शन एंड डायवर्जन और सीवेज नेटवर्क की बेहतर प्रणाली आदि की स्थापना की गई हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के सहायता से राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकार ने देश की नदियों की जल गुणवत्ता में सुधार के लिए उपरोक्त विभिन्न कदम उठाए हैं।

यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

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एनडी(रिलीज़ आईडी: 2227092) आगंतुक पटल : 172 प्रविष्टि तिथि: 12 FEB 2026 by PIB Delhi

 

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