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मौसम संबंधी संकटों के प्रभाव का आकलन करने के लिए अध्ययन


 संसद में प्रश्न: मौसम संबंधी संकटों के प्रभाव का आकलन करने के लिए अध्ययन

 पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने “भारतीय क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन का आकलन” शीर्षक से जलवायु परिवर्तन पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें भारतीय क्षेत्र में स्थानीय जलवायु परिवर्तन के सभी पहलुओं, विशेषकर देश में उत्पन्न होने वाली चरम जलवायु परिस्थितियों का समग्र आकलन सम्मिलित है। यह रिपोर्ट नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है :  https://link.springer.com/book/10.1007/978-981-15-4327-2भारत मौसम विज्ञान विभाग (आई एम डी) ने “जलवायु खतरे और जोखिम मूल्यांकन का भारतीय एटलस” नामक एक वेब-आधारित एटलस विकसित किया है, जिसमें 13 प्रमुख खतरनाक मौसमीय घटनाओं को सम्मिलित किया गया है, जो मानव जीवन, पशुधन तथा अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। यह वेब एटलस भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी आई एस) उपकरणों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है और आई एम डी, पुणे की वेबसाइट (https://www.imdpune.gov.in/hazardatlas/index.html पर उपलब्ध है। इसके अलावा आई एम डी ने पिछले 30 वर्षों के दौरान देश में वर्षा के बदलते पैटर्न तथा विभिन्न स्थानिक स्तरों (राज्य एवं जिला) पर चरम स्थितियों का भी अध्ययन किया है। “दर्ज की गई बारिश में आ रहे अंतर एवं परिवर्तन” शीर्षक से विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए कुल 29 रिपोर्टें प्रकाशित की गई हैं, जो इस लिंक पर  https://www.imdpune.gov.in/Reports/rainfall%20variability%20page/raintrend%20new.html उपलब्ध हैं।

सरकार ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की पूर्व चेतावनी क्षमता को और बेहतर करने तथा तीव्र मौसमीय घटनाओं के लिए बेहतर चेतावनी प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2021-26 के दौरान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की अम्ब्रेला योजना “वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणालियाँ और सेवाएँ (ए सी आर ओ एस एस)” के अंतर्गत विभिन्न कदम उठाए। बाद में वर्ष 2024 में ए सी आर ओ एस एस योजना को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की व्यापक योजना “पृथ्वी विज्ञान (पी आर आई टी एच वी आई)” के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में समाहित किया गया। भारत तथा भारत के आसपास के क्षेत्रों में मौसम निगरानी और मौसम पूर्वानुमान को सटीक करने के लिए पर्यवेक्षण और कम्प्यूटिंग प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने हेतु, वर्ष 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “मिशन मौसम” नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना को अनुमोदित किया, जिसके लिए दो वर्षों (2024-25 से 2025-26) की अवधि में 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य देश में मौसम एवं जलवायु प्रेक्षण, समझ, मॉडलिंग तथा पूर्वानुमान क्षमताओं में गुणात्मक वृद्धि करना है, जिससे अधिक उपयोगी, सटीक एवं समयबद्ध सेवाएँ प्रदान की जा सकें। पी आर आई टी एच वी आई योजना के अंतर्गत अक्रॉस उप-योजना को “मिशन मौसम” में विलय कर दिया गया।

इन परियोजनाओं के अंतर्गत जी एफ एस 12 किमी तथा एन सी यू एम 12 किमी जैसे दो वैश्विक पूर्वानुमान तंत्र वास्तविक समय में संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, “भारत पूर्वानुमान प्रणाली (भारत एफ एस)” को मई 2025 से परिचालित किया गया है, जो 6 किमी तक के अत्यंत उच्च क्षमता पर कार्य करती है, ताकि विकास खंड (ब्लॉक) स्तर तथा आगे चलकर पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके। ऐसे हाई रेजोल्यूशन मॉडलों के नियमित संचालन हेतु कम्प्यूटिंग सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे बड़े पैमाने पर आंकड़ों का एकीकरण तथा मेसो-स्केल, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मॉडलों का हायर रेजोल्यूशन पर संचालन संभव हो सका है। हाल ही में उच्च क्षमता वाली कम्प्यूटिंग प्रणालियाँ “अरुणिका” एवं “अर्का” के कार्यान्वयन के साथ, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वर्ष 2025 में अपनी कुल कम्प्यूटिंग क्षमता को बढ़ाकर 28 पेटा फ्लॉप्स कर दिया है, जो वर्ष 2014 की 6.8 पेटा फ्लॉप्स क्षमता की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।

ऑबजर्वेशनल एवं संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एन डब्ल्यू पी) आंकड़ों के प्रभावी उपयोग तथा सभी प्रकार के गंभीर मौसम के लिए समयबद्ध पूर्व चेतावनी जारी करने हेतु, आई एम डी ने एक एंड-टू-एंड जी आई एस -आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (डी एस एस) विकसित की है। यह प्रणाली प्रारंभिक चेतावनी तंत्र के अग्रभाग (फ्रंट-एंड) के रूप में कार्य करती है और सभी प्रकार के मौसमीय जोखिमों का समय पर पता लगाने एवं निगरानी सुनिश्चित करती है। यह प्रणाली विशेष गंभीर मौसम मॉड्यूल्स द्वारा समर्थित है, जो चक्रवात, भारी वर्षा, आंधी-तूफान, वज्रपात, कोहरा तथा लू जैसी चरम मौसमीय घटनाओं के लिए प्रभावशाली समयबद्ध पूर्व चेतावनी प्रदान करती है। ये घटनाएँ मानव जीवन, आजीविका तथा बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी प्रभाव डालती हैं। यह प्रणाली ऐतिहासिक आंकड़ों, चरम मौसमी घटनाओं, वास्तविक समय के सतही एवं वायुमंडलीय ऑबजर्वेशन का उपयोग करती है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 10 मिनट में उपलब्ध रडार ऑबजर्वेशन तथा उपग्रह से प्राप्त प्रत्येक 15 मिनट के आंकड़ों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है। मंत्रालय में संचालित मेसो-स्केल (हाइपरलोकल सहित), क्षेत्रीय एवं वैश्विक मॉडलों से प्राप्त संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एन डब्ल्यू पी) उत्पादों का भी इसमें उपयोग किया जाता है। मौसम विज्ञान विभाग के विभिन्न केंद्रों के माध्यम से छोटे-छोटे स्थानों और मेसोस्केल पर विभिन्न मॉडल वर्तमान समय में पार्य कर रहे हैं। प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रदान करने के लिए डी एस एस प्रणाली में जोखिम से जुड़े आंकड़ों के साथ इसके संवेदनशीलता और प्रभाव संबंधी आंकड़ों का एकीकरण किया गया है।

आई एम डी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई सी ए आर), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई सी एम आर) आदि संस्थाओं के साथ सहयोग कर क्षेत्र-विशेष मौसम पूर्वानुमानों एवं जलवायु सेवाओं का विकास कर रहा है।

यह जानकारी केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में दी।

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पीके/केसी/डीटी/एसएस प्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2226589) आगंतुक पटल : 73

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