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स्‍वच्‍छ भारत मिशन के अंतर्गत राज्य सरकारों को मिलने वाली धनराशि

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण [एसबीएम (जी)] के अंतर्गत पिछले 11 वर्षों के दौरान राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार को आवंटित केंद्रीय हिस्से की धनराशि का विवरण वर्षवार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार अनुलग्नक-1 में दिया गया है।

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत धनराशि संपूर्ण मिशन अवधि के लिए आवंटित की जाती है, न कि वार्षिक आधार पर स्वच्छ भारत मिशन-शहरी और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित धनराशि का विवरण अनुलग्नक-2 में दिया गया है।स्वच्छता एक राज्य स्तरीय विषय है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे राज्य सरकारें कार्यान्वित करती हैं। चूंकि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) मांग आधारित योजना है, इसलिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यान्वयन योजना (एआईपी) में अनुमानित मांगों, उनके पिछले प्रदर्शन और वित्तीय वर्ष के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए आवंटित बजट के आधार पर समेकित रूप से धनराशि आवंटित की जाती है। इसके बाद, व्यय विभाग के मौजूदा दिशानिर्देशों और कार्यक्रम दिशानिर्देशों के अनुसार, आवंटित धनराशि का उपयोग और मांग के आधार पर वर्ष के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया जाता है।आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत केंद्रीय धनराशि का हिस्सा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनुदान सहायता के रूप में राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एसएलटीसी) की विधिवत स्वीकृति और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की गई मांग के आधार पर जारी किया जाता है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण/ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के धनराशि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की जाती है। इसलिए, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार पर कोई धनराशि बकाया नहीं है।जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

अनुलग्‍नक-1

पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को आवंटित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार और वर्षवार केंद्रीय हिस्सा धनराशि

 

                                                                                                          रुपये (करोड़ में)

 

क्र. सं.

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

2014-15

2015-16

2016-17

2017-18

2018-19

2019-20

2020-21

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25

1

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

0.00

3.40

3.00

30.72

9.40

3.24

15.43

0.00

1.37

1.00

6.39

2

आंध्र प्रदेश

262.25

336.74

342.21

1219.88

1381.18

395.76

393.47

437.64

676.79

0.00

270.16

3

अरुणाचल प्रदेश

29.23

38.71

65.09

137.30

51.31

61.01

23.40

23.03

29.43

15.81

14.82

4

असम

205.08

595.66

800.00

1171.95

882.09

612.66

542.60

513.56

495.71

417.77

356.15

5

बिहार

337.33

633.40

263.73

875.92

5887.48

3419.65

776.94

651.54

1544.86

700.00

475.73

6

छत्तीसगढ़

110.39

144.72

584.46

677.83

448.50

187.15

121.68

207.58

355.07

83.98

182.10

7

दादरा एवं नागर हवेली

0.00

0.00

0.00

17.68

1.06

4.83

8.57

5.75

1.63

0.00

0.71

8

दमन और दीव

0.00

0.00

0.00

2.00

0.19

1.93

0.00

0.00

0.00

0.00

0.00

9

गोवा

10.03

3.73

11.68

0.52

0.00

0.28

19.24

61.27

34.38

19.61

14.32

10

गुजरात

312.13

478.22

1302.46

466.04

465.83

314.83

499.20

342.73

284.68

109.61

200.00

11

हरियाणा

33.94

97.92

158.60

39.66

227.19

138.84

220.75

181.80

202.77

0.00

100.00

12

हिमाचल प्रदेश

130.40

19.85

234.60

20.68

129.28

71.34

37.88

269.13

198.07

42.00

44.17

13

जम्मू और कश्मीर

103.08

18.39

59.51

202.38

682.93

424.36

64.89

246.98

494.20

251.00

245.00

14

झारखंड

46.10

97.32

455.46

698.66

753.04

473.57

429.67

148.51

300.64

50.00

107.85

15

कर्नाटक

314.88

729.17

419.56

983.39

739.74

244.97

227.75

0.00

665.34

46.00

200.00

16

केरल

33.97

23.47

196.51

59.36

53.10

153.37

137.01

34.68

308.04

0.00

50.00

17

लद्दाख

0.0

0.0

0.0

0.0

0.0

0.0

3.93

14.25

17.30

8.00

10.20

18

लक्षद्वीप

0.00

0.00

0.00

0.00

0.00

0.00

0.00

0.00

7.74

1.00

2.70

19

मध्य प्रदेश

69.46

746.22

1210.77

1380.61

1181.89

331.99

493.98

668.96

411.14

113.39

242.10

20

महाराष्ट्र

236.11

1014.30

528.94

1235.34

2709.52

679.67

340.62

1372.73

1740.11

110.45

463.26

21

मणिपुर

21.22

44.19

54.49

77.02

75.06

86.62

61.29

48.34

51.45

5.10

2.00

22

मेघालय

8.21

71.30

151.41

153.89

140.57

74.67

226.59

165.71

92.13

41.51

107.64

23

मिजोरम

10.35

10.55

21.97

46.24

25.46

17.61

21.93

17.62

19.67

4.99

17.68

24

नागालैंड

42.63

34.38

64.12

71.41

119.86

56.08

57.80

18.02

39.44

31.07

27.59

25

ओडिशा

131.68

571.50

976.22

457.02

2735.31

2044.37

58.92

0.00

0.00

47.00

200.00

26

पुडुचेरी

2.00

4.40

0.00

50.25

20.00

12.00

10.11

6.89

37.80

0.00

5.00

27

पंजाब

39.65

39.06

197.02

283.48

71.45

112.35

78.82

52.87

168.19

54.81

92.48

28

राजस्थान

274.24

938.73

1254.60

981.51

865.88

666.95

569.78

551.85

624.90

70.00

230.00

29

सिक्किम

7.78

6.12

14.08

20.72

23.02

12.41

13.79

19.73

23.17

8.88

14.79

30

तमिलनाडु

205.12

78.94

537.02

865.94

760.99

229.00

294.67

26.29

421.10

239.74

300.00

31

तेलंगाना

211.26

456.69

135.72

481.94

1030.10

257.27

262.16

180.67

542.94

25.00

164.07

32

त्रिपुरा

56.16

48.85

49.97

24.00

116.93

81.06

52.00

84.19

128.29

71.58

75.22

33

उत्तर प्रदेश

260.71

1626.63

853.33

3257.37

7824.88

2249.94

1790.48

1825.85

1529.38

2519.62

1309.40

34

उत्तराखंड

40.55

140.02

500.00

146.69

211.07

93.80

132.36

78.17

92.61

63.75

48.68

35

पश्चिम बंगाल

383.72

1044.60

657.51

583.23

534.26

808.18

675.90

645.08

848.16

720.00

475.51

 

कुल

3929.66

10097.18

12104.04

16720.63

30158.57

14321.76

8663.61

8901.42

12388.50

5872.67

6055.72

 

अनुलग्‍नक-2

 

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को आवंटित धनराशि का विवरण

 

 

 

 

 

 

क्रम संख्या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

मिशन आवंटन (करोड़ रुपये में)

 

एसबीएम – यू (2014-2021)

एसबीएम-यू 2.0 (2021-2026)

 

1

अंडमान और निकोबार

3.52

8.60

 

2

आंध्र प्रदेश

571.33

1413.30

 

3

अरुणाचल प्रदेश

36.28

129.00

 

4

असम

244.30

503.50

 

5

बिहार

556.68

1204.80

 

6

चंडीगढ़

28.02

45.20

 

7

छत्तीसगढ़

357.85

727.30

 

8

दादरा नगर हवेली और दमन एवं दीव

6.71

31.20

 

9

दिल्ली

349.75

1192.60

 

10

गोवा

17.09

77.80

 

11

गुजरात

834.15

1918.90

 

12

हरियाणा

287.08

645.70

 

13

हिमाचल प्रदेश

43.95

156.70

 

14

जम्मू-कश्मीर

200.63

429.90

 

15

झारखंड

258.71

519.00

 

16

कर्नाटक

820.96

2245.30

 

17

केरल

219.99

875.10

 

18

लद्दाख

0.00

62.70

 

19

मध्य प्रदेश

920.04

2200.20

 

20

महाराष्ट्र

1677.80

3758.50

 

21

मणिपुर

83.10

96.20

 

22

मेघालय

24.12

67.30

 

23

मिजोरम

49.02

82.50

 

24

नागालैंड

53.49

158.88

 

25

ओडिशा

372.02

821.40

 

26

पुडुचेरी

28.94

83.21

 

27

पंजाब

364.02

1054.20

 

28

राजस्थान

705.46

1765.80

 

29

सिक्किम

11.52

19.40

 

30

तमिलनाडु

1200.50

3296.70

 

31

तेलंगाना

413.74

1067.30

 

32

त्रिपुरा

100.37

85.30

 

33

उत्तर प्रदेश

1740.98

4073.80

 

34

उत्तराखंड

112.00

343.40

 

35

पश्चिम बंगाल

911.34

1449.30

 

 

(आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर)

पीके/केसी/एचएन/एमपी प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 by PIB Delhi  (रिलीज़ आईडी: 2224374) आगंतुक पटल : 6

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

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  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...