जल शक्ति मंत्रालय द्वारा देश भर में भूजल व्यवस्था की कुशल मॉनिटरिंग के लिए उन्नत डिजिटल प्रोद्योगिकी के प्रगामी प्रयोग को प्रगतिशील रूप से अपनाया गया है। जल शक्ति मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं जैसे भूजल मॉनिटरिंग और विनियमन (जीडब्ल्यूएम एंड आर) योजना, राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एनएचपी), अटल भूजल योजना आदि के तहत और राज्य सरकारों की अन्य योजनाओं के तहत, लगभग सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को शामिल करते हुए देश के विभिन्न स्थानों पर टेलीमेट्री प्रणाली के साथ डिजिटल जल स्तर रिकॉर्डर (डीडब्ल्यूएलआर) संस्थापित किए गए हैं। इन टेलीमेट्री सहित डीडब्ल्यूएलआर द्वारा वास्तविक समय के आधार पर भूजल स्तर और गुणवत्ता संबंधी आकड़ें जारी किए जाते हैं, जिससे देश में भूजल की स्थिति की और अधिक विस्तृत और सटीक स्थिति प्रस्तुत करने में सहायता प्राप्त होती है।
केन्द्रीय भूमि
जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा राज्य सरकारों के समन्वय से देश के गतिशील भूजल
संसाधनों का वार्षिक आकलन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से देश
के जल की कमी वाले ब्लॉक/तहसील/तालुकों की पहचान की जाती है। भूजल संसाधनों के
साथ-साथ भूजल स्तर और गुणवत्ता के आकलन पर रिपोर्ट को प्राथमिकता आधार पर नियोजन
और लक्षित उपाय हेतु जल जीवन मिशन अधिकारियों सहित सभी हितधारकों के साथ साझा किया
जाता है।
जल राज्य का
विषय है । जल और भूजल संसाधनों का सतत विकास एवं प्रबंधन मुख्यतः राज्य सरकारों का
दायित्व है। केन्द्र सरकार द्वारा अपनी विभिन्न स्कीमों और परियोजनाओं के माध्यम
से तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर राज्य सरकारों के प्रयासों को समर्थित किया
जाता है।
जलभृत
पुनर्भरण के संवर्धन, औद्योगिक कचरे से
संदूषण को कम करने और कृषि में स्थायी भूजल उपयोग सुनिश्चित करने हेतु इस दिशा में
उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:
·
देश के जल/भूजल संसाधनों के संवर्धन
के लिए केंद्र सरकार के प्रयास मुख्य रूप से जल शक्ति अभियान (जेएसए) के फ्लैगशिप
कार्यक्रम के माध्यम से निष्पादित किए जाते हैं। जेएसए समयबद्ध और मिशन मोड
कार्यक्रम है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा इस योजना का कार्यान्वयन प्रतिवर्ष किया
जा रहा है । इस योजना के तहत विभिन्न
केंद्रीय और राज्य योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से विभिन्न भूजल पुनर्भरण और
संरक्षण संबंधी कार्य किए जा रहे हैं।
·
जल शक्ति अभियान की गति में तेजी लाने
के लिए,
'जल संचय जन भागीदारी' (जेएसजेबी) अभियान की
शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य देश में वर्षा जल संचयन को
जन आंदोलन का रूप देना है। सामुदायिक स्वामित्व एवं दायित्व को बढ़ावा देते हुए,
इस पहल का मुख्य उद्देश्य
विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट जल चुनौतियों के अनुरूप लागत प्रभावी, स्थानीय समाधान विकसित करना है।
·
भारत सरकार द्वारा मिशन अमृत सरोवर
अभियान का आरंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक
जिले में जल निकायों का विकास एवं
पुनरुद्धार करना था। इसके परिणामस्वरूप देश भर में लगभग 69,000 अमृत सरोवर का निर्माण/ पुनरुद्धार किया गया है।
·
भूजल संदूषण से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए, सीजीडब्ल्यूबी द्वारा अपने मॉनिटरिंग कार्यक्रम के तहत और वैज्ञानिक
अध्ययनों के माध्यम से पूरे देश में भूजल गुणवत्ता की मॉनिटरिंग की जाती है।
सीजीडब्ल्यूबी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकडे़ जिनमें औद्योगिक अपशिष्टों से होने
वाले आंकडे़ भी शामिल हैं, हितधारकों द्वारा त्वरित कार्रवाई
के लिए अपने निष्कर्षों के आधार पर वार्षिक रिपोर्ट, अर्ध-वार्षिक
बुलेटिन और पाक्षिक अलर्ट के माध्यम से नियमित रूप से प्रसारित किए जाते हैं। इसके
अतिरिक्त , मॉनीटरिंग दक्षता बढ़ाने की दृष्टि से, सीजीडब्ल्यूबी द्वारा भूजल गुणवत्ता मॉनीटरिंग के लिए एक नई मानक प्रचालन
प्रक्रिया (एसओपी) अपनाई गई है, जिसमें भूजल गुणवत्ता का
अधिक विस्तृत आकलन सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में
पहले से अधिक और गहन सैंपल लेने का प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त, दिनांक 24.09.2020 के भूजल निष्कर्षण संबंधी
दिशानिर्देशों के अनुसार, सीजीडब्ल्यूबी द्वारा जारी
अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने वाले सभी उद्योगों को कूप शीर्ष बनाकर
सुरक्षा उपाय करना अनिवार्य करने के साथ औद्योगिक अपशिष्टों के जलभृतों में
ब्रहिस्त्राव को प्रतिबंधित किया गया है।
·
जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कृषि
क्षेत्र में जल/भूजल की स्थायित्वता बढ़ाने के लिए, अटल भूजल
योजना का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन किया गया है। यह योजना सामुदायिक नेतृत्व वाली सहभागी
भूजल प्रबंधन की प्रभावकारिता को प्रदर्शित करती है। सामुदायिक शिक्षा एवं
सशक्तिकरण के माध्यम से इस अनूठी योजना द्वारा भूजल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन
की दिशा में एक प्रभावी विकेन्द्रीकृत भूजल गवर्नेंस मॉडल स्थापित किया गया है।
·
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 से देश में ‘प्रति
बूंद अधिक फसल' योजना
का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जो सूक्ष्म सिंचाई और बेहतर
ऑन-फार्म जल प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से खेत के स्तर पर जल उपयोग दक्षता
बढ़ाने पर केंद्रित है ताकि उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग को इष्टतम बनाया जा सके।
*****
एनडी प्रविष्टि
तिथि: 09
FEB 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2225388) आगंतुक
पटल : 221