देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पानी के कनेक्शन के माध्यम से निर्धारित गुणवत्ता की पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए, सरकार अगस्त 2019 से राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन (जेजेएम) - हर घर जल का कार्यान्वयन कर रही है।
ग्रामीण
परिवारों तक नल के पानी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में जल जीवन मिशन के शुभारंभ के बाद से देश में महत्वपूर्ण
प्रगति हुई है। मिशन की शुरुआत में, केवल 3.23 करोड़ (16.7 प्रतिशत ) ग्रामीण परिवारों के पास नल
के पानी का कनेक्शन था। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 3 मार्च, 2026 तक दी गई रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत 12.58 करोड़ से अधिक अतिरिक्त
ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। इस प्रकार,
3 मार्च, 2026 तक, देश
के लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.82 करोड़ (81.71 प्रतिशत ) परिवारों को नल के पानी की
आपूर्ति प्राप्त हो चुकी है और शेष परिवारों के लिए कार्य कार्यान्वयन के विभिन्न
चरणों में हैं। माननीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण 2025-26 में जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की है ।
सरकार ने 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) नामक
एक केंद्रीय प्रायोजित योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य सभी ग्रामीण घरों को
शौचालय उपलब्ध कराकर 2 अक्टूबर, 2019
तक देश को खुले में शौच मुक्त बनाना था। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के ऑनलाइन
एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएमआईएस) पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा
दी गई जानकारी के अनुसार, 2014-15 से 2019-20 तक पांच वर्षों की अवधि में देश भर में 10 करोड़ से
अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (आईएचएचएल) का निर्माण किया गया। राज्यों/केंद्र
शासित प्रदेशों ने 2 अक्टूबर, 2019 को
स्वयं को खुले में शौच मुक्त घोषित किया।
स्वच्छ भारत
मिशन (ग्रामीण) का दूसरा चरण अप्रैल 2020 में शुरू किया गया
था और इसे 2020-21 से 2026-27 तक
कार्यान्वित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ)
स्थिति को बनाए रखना और गांवों को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन से अवगत कराना तथा
दृश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना है, यानी गांवों को ओडीएफ से
ओडीएफ प्लस (आदर्श) गांवों में परिवर्तित करना है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के
ऑनलाइन आईएमआईआईएस पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दर्ज आंकड़ों के
अनुसार, 22.01.2026 तक एसबीएम (जी) के दूसरे चरण के तहत 5,86,944 गांवों में से 4,94,301 (84 प्रतिशत ) गांवों ने
स्वयं को ओडीएफ प्लस (आदर्श) गांव घोषित किया है। इसके अलावा, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के
आईएमआईआईएस पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 22.01.2026 तक निर्मित व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (आईएचएचएल) और सामुदायिक स्वच्छता
परिसरों (सीएससी) की कुल संख्या क्रमशः 12.03 करोड़ और 2.68 लाख है। 22.01.2026 तक, 5.28
लाख गांवों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) व्यवस्था के अंतर्गत और 5.45 लाख गांवों को तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एलडब्ल्यूएम) व्यवस्था के अंतर्गत
शामिल किया गया है।
जल जीवन मिशन
के कार्यान्वयन के लिए 2026-27 के लिए 67,670 करोड़ रुपये की अनुमानित बजट राशि
प्रस्तावित की गई है। इसी प्रकार, स्वच्छ भारत मिशन
(ग्रामीण) के कार्यान्वयन के लिए 2026-27 के लिए 7,192 करोड़ रुपये की अनुमानित बजट राशि प्रस्तावित की गई है।
जल जीवन मिशन
के अंतर्गत,
विभाग मिशन के तहत प्रदान किए गए घरेलू नल जल कनेक्शनों की
कार्यक्षमता का आकलन एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसी के माध्यम से करता है, इसका चयन मानक सांख्यिकीय नमूनाकरण के आधार पर किया जाता है। कार्यक्षमता
आकलन, 2024 के दौरान, यह पाया गया कि
सर्वेक्षण किए गए गांवों में 98.1 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन थे; नल
कनेक्शन वाले 87 प्रतिशत
घरों ने पिछले सप्ताह पानी प्राप्त होने की सूचना दी। इसे समग्र प्रगति का
पता चलता है; 84 प्रतिशत
घरों को निर्धारित समय पर पानी मिल रहा है; 80
प्रतिशत घरों को न्यूनतम 55 एलपीसीडी पानी मिल रहा है; 76 प्रतिशत घर जीवाणु संक्रमण से मुक्त पाए गए और 81 प्रतिशत घरों के आपूर्ति स्रोत
रासायनिक संक्रमण से मुक्त पाए गए। मात्रा, गुणवत्ता और
नियमितता के मापदंडों को ध्यान में रखते हुए, 76
प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन कार्यशील पाए
गए।
नल के पानी
के कनेक्शन के माध्यम से सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, विभाग ने कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन की एक व्यापक
बहुस्तरीय और बहु-प्रारूप प्रणाली विकसित की है। इसमें लक्षित वितरण और विशिष्ट
परिणामों की निगरानी के लिए परिवार के मुखिया के आधार को लिंक करना शामिल है। यह
वैधानिक प्रावधानों के अधीन है, इसमें निर्मित संपत्तियों की
जियो-टैगिंग, कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए
भुगतान करने से पहले तृतीय-पक्ष निरीक्षण, पायलट आधार पर
सेंसर-आधारित समाधान के माध्यम से गांवों में जल आपूर्ति का मापन और निगरानी आदि
शामिल हैं।
जल शक्ति
राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में
यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/वीके/एसवी
प्रविष्टि तिथि: 09
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