सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 2026 में पराली जलाने के उन्मूलन हेतु राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की; प्रवर्तन को मजबूत करने, फसलों के अवशेषों के प्रबंधन और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया

श्री राजेश वर्मा की अध्यक्षता में एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 06.05.2026 को पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में संवेदनशील जिलों के उपायुक्त/जिला मजिस्ट्रेट और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रतिनिधि शामिल थे। इस बैठक का उद्देश्य 2026 के दौरान धान की पराली जलाने के उन्मूलन हेतु राज्यों की कार्य योजनाओं और तैयारियों की समीक्षा करना था।

आयोग ने धान की कटाई के आगामी मौसम से पहले व्यवस्थित और समन्वित तैयारियों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उसने जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु फसलों के अवशेषों के प्रबंधन के आंतरिक एवं बाह्य तंत्रों को मजबूत करने के साथ-साथ लक्षित प्रवर्तन और जागरूकता के उपायों पर भी जोर दिया।

यह पाया गया कि पराली जलाना केवल एक मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि यह वायु प्रदूषण को कम करने की एक व्यापक चुनौती है जो पूरे क्षेत्र में वर्ष भर वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि पराली जलाने को समाप्त करने हेतु राज्यों, जिलों तथा प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है और इसमें जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक के दौरान, राज्यों के अधिकारियों ने 2026 में धान की पराली जलाने को समाप्त करने हेतु अपनी कार्य योजनाएं प्रस्तुत कीं। इन कार्य योजनाओं में फसलों के अवशेषों के मूल स्थान पर प्रबंधन, धान की पराली का मूल स्थान से बाहर उपयोग और ईंट भट्टों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट्स/ब्रिकेट्स के सह-दहन संबंधी निर्देश संख्या 92 का अनुपालन शामिल था। फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की समय पर उपलब्धता, प्रोत्साहन के जरिए पराली जलाना पूरी तरह बंद कर देने वाले गांवों को बढ़ावा देना, सघन सूचना एवं संचार संचार (आईईसी) संबंधी गतिविधियां और प्रवर्तन के उपायों जैसे संचालन और लॉजिस्टिक्स संबंधी पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

आयोग ने गेहूं की पराली के प्रबंधन संबंधी निर्देश संख्या 96 के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। यह पाया गया कि 01.04.2026 से 06.05.2026 की अवधि के दौरान पंजाब में आग लगने की 3,729 घटनाएं, हरियाणा में 2,683 घटनाएं और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 176 घटनाएं दर्ज की गईं।

 पंजाब के संगरूर, फिरोजपुर और बठिंडा; हरियाणा के जिंद, झज्जर और सोनीपत; और उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और मेरठ सहित संवेदनशील जिलों के उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों ने फसलों के अवशेषों के प्रबंधन हेतु जिला स्तरीय रणनीतियों और गेहूं की कटाई के वर्तमान  मौसम के दौरान किए जा रहे उपायों को प्रस्तुत किया।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, आयोग ने निम्नलिखित कार्य बिंदुओं की रूपरेखा तैयार की:

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को निर्धारित मापदंडों तथा प्रारूपों के अनुरूप संशोधित एवं व्यापक कार्य योजनाएं 11.05.2026 तक प्रस्तुत करनी होंगी।

राज्यों को दो महीने के भीतर कार्यरत सीआरएम मशीनों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

पंजाब और हरियाणा को 01.11.2025 से 30.04.2026 की अवधि के लिए ईंट भट्टों में सह-दहन पर जिलावार रिपोर्ट और साथ ही उसके बाद मासिक प्रगति रिपोर्ट, समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करनी होगी।

राज्यों को आकस्मिक आग से बचने हेतु निवारक उपायों को मजबूत करना होगा, जिससे पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि न हो।

जागरूकता और अनुपालन बढ़ाने हेतु सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) संबंधी गतिविधियों को तेज करना होगा।

पंजाब को हरियाणा द्वारा विकसित मौजूदा पोर्टल की तर्ज पर निर्देश संख्या 92 के अनुपालन की निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित करना होगा।

संबंधित हितधारक एजेंसियों और अधिकारियों ने आयोग को आश्वासन दिया कि आगामी कटाई के मौसम के दौरान राज्यों की कार्य योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और पराली जलाने की रोकथाम एवं उन्मूलन हेतु आवश्यक उपाय और समन्वित प्रयास किए जायेंगे।    

*****

पीके/केसी/आर / डीए प्रविष्टि तिथि: 07 MAY 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2258926) आगंतुक पटल : 193

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...