सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

स्वच्छ परिसर, शून्य अपशिष्ट: स्वास्थ्य सेवा के लिए स्मार्ट स्वच्छता

स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के तहत, एक अग्रणी पहल के माध्यम से एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थान को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के एक आदर्श में परिवर्तित किया जा रहा है, क्योंकि यह संस्थान कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है।

सतत शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय क्षय रोग एवं श्वसन रोग संस्थान (एनआईटीआरडी) को आधिकारिक तौर पर 'शून्य अपशिष्ट भूमि उपयोग' संस्थान के रूप में मान्यता दी गई है। यह उपलब्धि भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एनआईटीआरडी को एक मिसाल के तौर पर स्थापित करती है। यह पहल 'व्हाई वेस्ट वेडनेसडे' फाउंडेशन द्वारा अपने प्रमुख कार्यक्रम 'स्वच्छ संकल्प' के माध्यम से कार्यान्वित की गई, जो यह दर्शाता है कि सुनियोजित योजना और सामूहिक प्रयास किस प्रकार सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं।

27 एकड़ के विशाल परिसर में फैला राष्ट्रीय क्षय रोग एवं श्वसन रोग संस्थान (एनआईटीआरडी) प्रतिदिन लगभग 1 से 1.2 टन अपशिष्ट उत्पन्न करता है, जिसमें 500-650 किलोग्राम गीला अपशिष्ट शामिल है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह संस्थान, 2026 के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन दिशानिर्देशों के अंतर्गत थोक अपशिष्ट उत्पादक श्रेणी में पूर्ण अनुपालन प्राप्त करने वाला एक स्वास्थ्य संस्थान बनकर उभरा है। यह मान्यता सतत प्रथाओं के प्रति एनआईटीआरडी की अग्रणी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित करती है।

इस परियोजना ने सतत अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक व्यापक और सुनियोजित दृष्टिकोण अपनाया। इसकी शुरुआत एक गहन अपशिष्ट लेखा परीक्षण और आधारभूत सर्वेक्षण से हुई, जिसका उद्देश्य सभी मौजूदा अपशिष्ट स्रोतों का मानचित्रण करना, वर्तमान प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करना और संचालन में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करना था। इस नैदानिक ​​चरण से संस्थान के अपशिष्ट उत्पादन के ढंग की स्पष्ट समझ प्राप्त हुई और लक्षित हस्तक्षेपों की योजना बनाने में सहायता मिली। इन जानकारियों के आधार पर, इस पहल ने एक गहन जागरूकता और क्षमता-निर्माण अभियान शुरू किया, जिसके तहत अस्पताल के कर्मचारियों, प्रशासकों और सहायक कर्मियों के लिए लगभग 50 विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों ने न केवल प्रतिभागियों को अपशिष्ट पृथक्करण, पुनर्चक्रण और खाद बनाने की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित किया, बल्कि जवाबदेही और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया। संस्थान के सभी स्तरों पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करके, कार्यक्रम ने व्यापक सहभागिता हासिल की, मापने योग्य व्यवहार परिवर्तन को प्रेरित किया और शून्य-अपशिष्ट पहल की दीर्घकालिक सफलता की नींव रखी

इस मजबूत आधार पर आगे बढ़ते हुए, परियोजना ने कचरे के प्रभावी और टिकाऊ प्रबंधन के लिए एक सुदृढ़ जमीनी बुनियादी ढांचा स्थापित किया। जैव अपघटनीय कचरे के प्रसंस्करण के लिए एक गीले कचरे के खाद केंद्र की स्थापना की गई है, जबकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों के कुशल छँटाई, एकत्रीकरण और प्रबंधन के लिए एक सूखे कचरे के संसाधन केंद्र को मजबूत किया गया है, जिससे अधिकतम पुनर्प्राप्ति और लैंडफिल से कचरे का स्थानांतरण सुनिश्चित हो सके। बागवानी और भूनिर्माण से उत्पन्न अवशेषों के प्रबंधन के लिए समर्पित बागवानी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली भी लागू की गई है, जिससे परिसर में उत्पन्न होने वाले हर प्रकार के कचरे का कुशल प्रसंस्करण सुनिश्चित हो सके।
संस्थान की अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता को और बढ़ाने के लिए, परिसर में रणनीतिक रूप से 40 गाईया कम्पोस्टिंग बिन स्थापित किए गए हैं, साथ ही बड़े हरे अपशिष्ट पदार्थों के उपचार को सुव्यवस्थित करने के लिए दो बागवानी अपशिष्ट श्रेडर भी लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वास्तविक समय में संचालन की निगरानी के लिए एक समर्पित निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है, जिसे संसाधनों के उपयोग को ट्रैक करने, प्रबंधित करने और अनुकूलित करने के लिए एक उपभोग्य सामग्री प्रबंधन स्थान द्वारा समर्थित किया गया है। ये सभी अवसंरचना घटक मिलकर एक निर्बाध, एकीकृत प्रणाली का निर्माण करते हैं जो न केवल परिचालन दक्षता सुनिश्चित करती है बल्कि एनआईटीआरडी के शून्य-अपशिष्ट इकोसिस्‍टम की दीर्घकालिक स्थिरता की भी गारंटी देती है, जिससे अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित होता है।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की दक्षिण जोन टीम ने महरौली वार्ड में स्थित राष्ट्रीय क्षय रोग एवं श्वसन रोग संस्थान में 40 एरोबिन कंपोस्टिंग इकाइयों का उद्घाटन किया।

यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और रणनीतिक रूप से विकसित बुनियादी ढांचे के साथ सहजता से एकीकृत करके, एनआईटीआरडी ने यह प्रदर्शित किया है कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवा संस्थान दक्षता या रोगी देखभाल से समझौता किए बिना स्थायी रूप से कैसे संचालित हो सकते हैं।

अपनी परिचालनात्मक सफलता के अलावा, यह उपलब्धि एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है, जो देश भर के अन्य अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं को यह दर्शाती है कि शून्य-अपशिष्ट प्रथाएं व्यवहार्य और प्रभावशाली दोनों हैं। स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के तहत एनआईटीआरडी की यह पहल इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे सामूहिक प्रयास, दूरदर्शी नेतृत्व और सुनियोजित, संरचित कार्यान्वयन से व्यवस्थागत परिवर्तन लाया जा सकता है। यह स्थिरता के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता की शक्ति को रेखांकित करती है, जो देश भर में स्वास्थ्य सेवा और शहरी विकास के लिए एक स्वच्छ, हरित और अधिक जिम्मेदार भविष्य को प्रेरित करती है।

***

पीके/केसी/एमके/वाईबी प्रविष्टि तिथि: 22 APR 2026 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2254450) आगंतुक पटल : 445

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण

  पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण स्वच्छ भारत अभियान द्वारा संचालित मंदिरों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण , पुष्पों के माध्यम से नौकरियां और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है   अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पुष्प शक्तिः भारत के मंदिरों से निकलने वाले अपशिष्ट का रूपांतरण   **** एमजी/एआर/एसके ( रिलीज़ आईडी: 2057278) आगंतुक पटल : 46 प्रविष्टि तिथि: 20 SEP 2024 by PIB Delhi    

बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और पर्यावरण संबंधित नियम कानून को जन सामान्य की जानकारी में लाने वाले अमोल मालुसरे के निवेदन पर विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के लिए पत्र जारी किया है… पढ़िए एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा का सहभागी कदम…

प्लास्टिक वेस्ट मामले में विधायक रिकेश सेन ने संज्ञान लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए पत्र व्यवहार कर छत्तीसगढ़ राज्य को एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त करने की… शासकीय कार्य योजना में योगदान दिया है… पढ़िए शासकीय आदेश  .......... प्लास्टिक कचरा चर्चा में क्यों?   छत्तीसगढ़ राज्य में सिंगलयूज़ प्लास्टिक के विलोपन के लिये गठित टास्क फोर्स की बैठक विगत वर्ष से मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हो रहीं है… इन बैठकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक के विलोपन की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा उपरांत कार्य योजना बनाई गई है । श्रद्धा साहू और साथीगण ने बनवाए है कई बर्तन बैंक जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक में कमी आई है बर्तन बैंक की परिकल्पना को साकार कर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहीं श्रद्धा पुरेंद्र साहू और उनकी टीम के प्रमुख तरुण साहू  पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष योगदान दे रहें जिसके कारण एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में सभी किं साहभागिता बन रही है  विधायक रिकेश सेन का पत्र विलोपन कार्यवाही के प्रम...