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अपशिष्‍ट से वन तक: रायचूर ने मियावाकी रूपांतरण के माध्‍यम से 22 एकड़ भूमि का पुनरुद्धार किया

कर्नाटक के रायचूर ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (एसबीएम-यू 2.0) के तहत वैज्ञानिक तरीके से पुराने कचरे के निस्‍तारण के माध्‍यम से 35 एकड़ में फैले याकलासपुरा डंपसाइट को हरित परिसंपत्ति में बदल दिया है। अब तक लगभग 62,252 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है और लगभग 22 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि का पुनरूद्धार किया गया है। पुनरूद्धार की गई यह भूमि अब टिकाऊ भू-उपयोग को बढावा दे रही है। इसमें एक जीवंत मियावाकी वन भी विकसित किया जा रहा है। यह दर्शाता है कि पुराने डंपसाइट को किस प्रकार समृद्ध पारिस्थितिक स्‍थलों में बदला जा सकता है।

एसबीएम-यू 2.0 के तहत देश भर के शहर पुराने कचरा स्थलों को उत्पादक और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ स्थलों में बदलने का कार्य कर रहे हैं। कर्नाटक के रायचूर में याकलासपुरा डंप साइट का सफल पुनरुद्धार इसी विजन का उदाहरण है। कभी पर्यावरणीय क्षरण का प्रतीक रहा यह स्‍थल अब पारिस्थितिक पुनर्स्‍थापन और सतत शहरी विकास के एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

35 एकड़ में फैले याकलासपुरा स्थल पर दशकों से नगरपालिका का ठोस कचरा जमा था, जिससे आसपास के समुदायों के लिए गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उत्‍पन्‍न हो गई थीं। कचरे का बढ़ता पहाड़ न केवल मूल्यवान शहरी भूमि पर कब्‍जा किये हुए था, बल्कि दूषित जल का निर्माण, दुर्गंध और पर्यावरण प्रदूषण जैसे जोखिम भी पैदा कर रहा था। हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए रायचूर नगर निगम ने पुराने कचरे के वैज्ञानिक निष्‍पारण की परियोजना शुरू की।

इस हस्‍तक्षेप के परिणामस्वरूप 62,252 मीट्रिक टन पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और निस्‍तारण किया गया। इस परियोजना को लगभग 22 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि का पुनरुद्धार हुआ है, जिससे पर्यावरणीय जोखिमों में उल्‍लेखनीय कमी आई हैं और आसपास के परिदृश्य में सुधार हुआ है। डंपसाइट की सफल सफाई रायचूर के शहरी स्वच्छता और पर्यावरणीय प्रबंधन को मजबूत करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुनरुद्धार की गई भूमि पर निस्‍तारण संबंधी कार्य पूरे किए जा चुके हैं और 5 जून, 2026 से पौधारोपण गतिविधियां शुरू की गई। रायचूर नगर निगम ने पुनरुद्धार की गई भूमि के उपयोग के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाया है। "विषाक्त अपशिष्ट से पारिस्थितिक संपदा" की अवधारणा के अनुरूप शहर में सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) और न्यू इंडिया स्पेस लिमिटेड के सहयोग से पुनरुद्धारित स्‍थल के लगभग 5-7 एकड़ क्षेत्र में मियावाकी वन विकसित किया जा रहा है।

कुल 60,000 पौधे लगाए गए हैं। उम्‍मीद है कि एक वर्ष के भीतर यह क्षेत्र सफलतापूर्वक वनाच्‍छादित हो जाएगा और पुनरुद्धारित भूमि पर हरित आवरण विकसित हो जाएगा। पौधारोपण में बांस और अन्य स्‍थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल हैं, जो मृदा पुनर्स्थापन, कार्बन अवशोषण, जैव विविधता संवर्धन और वायु गुणवत्ता में सुधार में योगदान देंगी।

इस रूपांतरित स्थल का उद्घाटन विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून, 2026) के अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने किया। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाने में इसके महत्‍व को रेखांकित करती है।

याकलासपुरा का यह कायापलट केवल कचरा निस्‍तारण परियोजना नहीं है; यह प्रभावी शहरी गवर्नेस, रणनीतिक निवेश और स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के प्रभाव का प्रमाण है। लंबे समय से चली आ रही पर्यावरणीय चुनौती को एक समृद्ध पारिस्थितिक स्‍थल में बदलकर, रायचूर नगर निगम ने देश भर के उन शहरों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्‍तुत किया है, जो कचरा-मुक्त और टिकाऊ शहरी भविष्य की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

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पीके/केसी/आईएम/एसएस प्रविष्टि तिथि: 18 AUG 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2300846) आगंतुक पटल : 306

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पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है आपकी सहभागिता  पर्यावरण क्या है समझिए ! पर्यावरण शब्द ' परि+आवरण ' के संयोग से बना है। ' परि ' का आशय चारों ओर तथा ' आवरण ' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों , प्राणियों , और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु , जल , भूमि , पेड़-पौधे , जीव-जन्तु , मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता है। आवश्यक क्यों है ! पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है । इसलिए दुनिया के सभी देशों पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय किए जा रहें हैं वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी समाप्त हो जायेगा । दुराग्रामी दुष्परिणाम घातक है पर्यावर...