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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) पहली बार 2016 में तैयार और जारी की गई थी। सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श के बाद 2019 में इस योजना में संशोधन किया गया। संशोधित एनडीएमपी केन्द्र और राज्य स्तर के सभी सेक्टरों, मंत्रालयों एवं विभागों के साथ-साथ जिला स्तर के अधिकारियों को एक साथ लाता है तथा आपदा से जुड़े जोखिम को कम करने में उनकी भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों को निर्धारित करता है।

 एनडीएमपी के निम्नलिखित मुख्य स्तंभ हैं:

·        राष्ट्रीय विधिक नियमों - आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009 - का पालन करना

·        उन समझौतों के तहत वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने में सक्रिय रूप से भाग लेना जिन पर भारत ने हस्ताक्षर किए हैं - जैसे आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एवं कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी 21), जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता

·        आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए प्रधानमंत्री का दस-सूत्री एजेंडा, जो समकालीन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है

·        एक सर्वव्यापी और सभी क्षेत्रों से जुड़े सिद्धांत के रूप में सामाजिक समावेशन

आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाना एनडीएमपी की एक अहम विशेषता है।

भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन) संसाधनों का एक देशव्यापी इलेक्ट्रॉनिक भंडार  (इलेक्ट्रॉनिक इन्वेंट्री) है। इसमें जिलों, राज्यों और राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों से जुटाए गए उपकरणों तथा मानव संसाधनों की जानकारी शामिल होती है। आईडीआरएन एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपकरणों, कुशल मानव संसाधनों और अहम सामानों के भंडार (इन्वेंट्री) को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है।

आईडीआरएन पोर्टल का मुख्य उद्देश्य निर्णय लेने वालों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता का पता लगाने में सक्षम बनाना है।

यह डेटाबेस उन्हें खास आपदाओं की तैयारी के स्तर और उपकरणों की उपलब्धता व उनकी लोकेशन का पता लगाने में भी मदद करता है। आपदा के समय जरूरतमंद राज्यों/केन्द्र - शासित प्रदेशों/हितधारकों द्वारा इनका आसानी से पता लगाकर उपयोग किया जा सकता है, ताकि तेजी से कार्रवाई की जा सके।

आईडीआरएन का विस्तृत विवरण https://idrn.nidm.gov.in पर उपलब्ध है।यह जानकारी गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आरप्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2287819) आगंतुक पटल : 423

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आइए शपथ लेते हैं :- पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जन जागृति अभियान में आप सभी की सहभागिता अपेक्षित है निवेदन है कि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के मार्गदर्शन में कार्यरत पर्यावरण नियम कुंजी आप सभी से आग्रह कर रही है की आप अपनी भागीदारी देकर प्रदूषण को समूल नष्ट करने में सहभागिता दें

पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है आपकी सहभागिता  पर्यावरण क्या है समझिए ! पर्यावरण शब्द ' परि+आवरण ' के संयोग से बना है। ' परि ' का आशय चारों ओर तथा ' आवरण ' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों , प्राणियों , और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु , जल , भूमि , पेड़-पौधे , जीव-जन्तु , मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता है। आवश्यक क्यों है ! पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है । इसलिए दुनिया के सभी देशों पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय किए जा रहें हैं वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी समाप्त हो जायेगा । दुराग्रामी दुष्परिणाम घातक है पर्यावर...