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जैविक खतरों से निपटने के लिए एनडीएमए का राष्ट्रीय तैयारी ढांचा

 सरकार देश में किसी भी जैविक हमले से निपटने के लिए तैयार है। जैविक आपदाओं के प्रबंधन संबंधी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दिशानिर्देश, 2008 में जैविक सुरक्षा, और जन स्वास्थ्य तैयारियों को शामिल करते हुए खतरे की पहचान और जोखिम प्रबंधन का ढांचा मौजूद है। जैविक और जन स्वास्थ्य आपात स्थितियों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना, 2019 में भी शामिल किया गया है।

 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और अन्य नामित एजेंसियों सहित संबंधित वैज्ञानिक, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निरंतर तकनीकी मूल्यांकन, रोग निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी का कार्य किया जाता है।राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एनडीएमए) दिशानिर्देश और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना जैविक आपात स्थितियों की रोकथाम, तैयारी, शीघ्र पता लगाने, नियंत्रण और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करते हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को जैविक आपदा के लिए नोडल मंत्रालय नामित किया गया है। मंत्रालय ने बताया है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और यह महामारी की आशंका वाली संक्रामक बीमारियों के प्रकोप के विरुद्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। रोग निगरानी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश भर में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को मजबूत किया है। यह कार्यक्रम प्रशिक्षित बहु-विषयक त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) के माध्यम से विकेंद्रीकृत प्रतिक्रिया प्रणाली की अनुमति देता है ताकि आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य नियंत्रण और रोकथाम उपायों को लागू किया जा सके।

राज्यों ने जिला और राज्य स्तर पर आईडीएसपी के अंतर्गत प्रयोगशालाओं को मजबूत किया है। इसके अलावा, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने रोगजनकों के समय पर प्रयोगशाला आधारित निदान के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयोगशाला नेटवर्क को मजबूत करने हेतु 150 से अधिक वायरल अनुसंधान और निदान प्रयोगशालाओं (वीआरडीएल) का एक नेटवर्क स्थापित किया है। आईसीएमआर ने प्रकोपों ​​के दौरान, विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में मौके पर आवश्यक निदान सेवाएं प्रदान करने के लिए दो मोबाइल बायोसेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल-3) प्रयोगशालाएं विकसित की हैं।

 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को महामारी जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिसमें आईसीयू बेड सहित बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना, प्रयोगशाला नेटवर्क का विस्तार करना, निगरानी, चिकित्सा उपकरणों की खरीद आदि शामिल हैं।

देश को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन को प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं/प्रणालियों और संस्थानों की क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है ताकि नए और उभरते रोगों की पहचान और प्रबंधन किया जा सके।

इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की बटालियनों को बुनियादी रासायनिक जैविक विकिरण और परमाणु (सीबीआरएन) पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाता है और निर्धारित टीमों को आवश्यक बचाव, जोखिम का पता लगाने, निगरानी और परिशोधन उपकरणों से लैस किया जाता है।देश भर में संबंधित राज्य/जिला अधिकारियों के अनुरोध पर एनडीआरएफ की टीमें तैनात की जाती हैं।

एनडीआरएफ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संवेदनशीलता के आधार पर जैविक सुरक्षा आपात स्थितियों पर नियमित रूप से बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित करता है। इनमें नागरिक सुरक्षा, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवाएं, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, जिला प्रशासन और अस्पतालों सहित आपदा प्रबंधन के सभी प्रमुख हितधारक शामिल होते हैं। ये अभ्यास आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं का परीक्षण करने, एजेंसियों के बीच समन्वय सुधारने, सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने और समग्र तैयारियों को मजबूत करने में सहायक होते हैं। प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस) और अंतर-एजेंसी समन्वय तंत्र के अनुसार की जाती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय देश भर में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिक्रिया का परीक्षण और सुदृढ़ीकरण करने के लिए कई मॉक ड्रिल आयोजित करता है।गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/जेके/एसके प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2298551) आगंतुक पटल : 57

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आइए शपथ लेते हैं :- पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जन जागृति अभियान में आप सभी की सहभागिता अपेक्षित है निवेदन है कि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के मार्गदर्शन में कार्यरत पर्यावरण नियम कुंजी आप सभी से आग्रह कर रही है की आप अपनी भागीदारी देकर प्रदूषण को समूल नष्ट करने में सहभागिता दें

पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है आपकी सहभागिता  पर्यावरण क्या है समझिए ! पर्यावरण शब्द ' परि+आवरण ' के संयोग से बना है। ' परि ' का आशय चारों ओर तथा ' आवरण ' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों , प्राणियों , और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु , जल , भूमि , पेड़-पौधे , जीव-जन्तु , मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता है। आवश्यक क्यों है ! पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है । इसलिए दुनिया के सभी देशों पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय किए जा रहें हैं वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी समाप्त हो जायेगा । दुराग्रामी दुष्परिणाम घातक है पर्यावर...