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सामुदायिक नेतृत्व वाले वृक्षारोपण अभियान

सरकार ने भीषण गर्मी की लहर और बढ़ते तापमान के प्रभावों से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) 17 प्रमुख आपदाओं को सूचीबद्ध करती है, जिनमें 'हीटवेव' (भीषण गर्मी) भी शामिल है। यह रोकथाम, तैयारी, शमन, बचाव के काम और बहाली के लिए केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (एसडीएमए) के माध्यम से राज्य सरकारों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (डीडीएमए), स्थानीय प्राधिकरणों और अन्य हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए एक व्यापक जिम्मेदारी ढांचा प्रस्तुत करती है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2016 में हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना की तैयारी पर दिशा-निर्देश' जारी किए थे, जिन्हें 2019 में संशोधित किया गया था। ये दिशा-निर्देश हीटवेव के प्रति संवेदनशील राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को हीटवेव की स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्य, जिला और शहर स्तरीय हीट एक्शन प्लान तैयार करने में सहायता करते हैं। ये दिशा-निर्देश बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वाले श्रमिकों, शहरी गरीबों और अन्य जोखिम वाले समूहों सहित संवेदनशील आबादी की पहचान करने के लिए सुरक्षा भेद्यता मूल्यांकन का प्रावधान करते हैं और उचित शमन व तैयारी के उपायों का सुझाव देते हैं। गर्मी से होने वाले तनाव पर शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए, ये दिशा-निर्देश अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव में योगदान देने वाले कारकों की पहचान के लिए निर्मित वातावरण के मूल्यांकन का प्रावधान भी करते हैं। साथ ही, वे शहरी नियोजन और विकास में दीर्घकालिक ताप शमन उपायों को शामिल करने की सिफारिश करते हैं—जिसमें हरित क्षेत्र को बढ़ाना, ठंडी छतें और कूल पेवमेंट्स को बढ़ावा देना, जल निकायों का संरक्षण, बेहतर वेंटिलेशन कॉरिडोर, और जलवायु-अनुकूल भवन व भूमि-उपयोग प्रथाओं को अपनाना शामिल है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना और ये दिशा-निर्देश बाहर काम करने वाले श्रमिकों और अनौपचारिक शहरी बस्तियों में रहने वाले लोगों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को निर्दिष्ट करते हैं। तदनुसार, बिहार और मध्य प्रदेश सहित हीटवेव के प्रति संवेदनशील सभी राज्यों ने अपने-अपने राज्य में हीट एक्शन प्लान तैयार किए हैं और उन्हें लागू कर रहे हैं। इसके अलावा, अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) और 'अमृत' 2.0 के तहत, बिहार और मध्य प्रदेश सहित शहरी जलवायु को सुधारने  के लिए पार्क, हरित स्थान और शहरी जल निकायों का विकास किया जा रहा है। 'अमृत मित्र' पहल के तहत, महिला स्वयं सहायता समूह वृक्षारोपण और पार्कों व हरित स्थानों का रखरखाव करते हैं। इसके अतिरिक्त, 'कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए राज्यों को विशेष सहायता' (एसएसएएससीआई) योजना के तहत, शहरी हरियाली पहलों का समर्थन किया जाता है, जिसमें बिहार में शहरी हरित स्थानों का विकास भी शामिल है।

'नगर वन योजना

सरकार 'नगर वन योजना' भी लागू कर रही है, जिसके तहत 2020-21 से 2026-27 की अवधि में देश में 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएँ विकसित करने का लक्ष्य है। इसका मकसद शहरी और शहर से बाहर के इलाकों में पेड़ों (जो जंगलों के बाहर हैं) और हरियाली को काफी बढ़ाना, जैव-विविधता और पर्यावरण से जुड़े फायदों को बढ़ाना और साथ ही शहर में रहने वालों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। इस योजना के तहत 'राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) से केंद्रीय अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान मुख्य रूप से बाड़ लगाने, मिट्टी में नमी बनाए रखने के उपायों और उससे जुड़ी गतिविधियों, प्रशासनिक कार्यों, पेड़ लगाने और उनके रखरखाव के खर्च को पूरा करने के लिए होता है। 'इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान' (आईसीएपी) के तहत, सरकार व्यवसायिक, ऑफिस और रिहायशी इमारतों में 'एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड' (ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता) को अपनाकर इमारतों को ठंडा करने को बढ़ावा देती है। यह संहिता नई इमारतों को ठंडा रखने की ज़रूरत को कम करने और उनकी कुल ऊर्जा कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए ऊर्जा-कुशल बिल्डिंग एनवेलप और क्रॉस-वेंटिलेशन रणनीतियों पर ज़ोर देता है।

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान

सरकार विभिन्न पहलों के माध्यम से वृक्षारोपण और हरित आवरण को बढ़ाने में सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा देती है, जिसमें 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान शामिल है। यह पहल नागरिकों को अपनी माँ के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए पेड़ लगाने और वृक्षारोपण गतिविधियों में व्यापक जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके अलावा, अन्य मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र आदि द्वारा भी वृक्षारोपण किया जाता है।

यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

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पीके/केसी/एसके/एसएस प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2290142) आगंतुक पटल : 153

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आइए शपथ लेते हैं :- पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जन जागृति अभियान में आप सभी की सहभागिता अपेक्षित है निवेदन है कि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के मार्गदर्शन में कार्यरत पर्यावरण नियम कुंजी आप सभी से आग्रह कर रही है की आप अपनी भागीदारी देकर प्रदूषण को समूल नष्ट करने में सहभागिता दें

पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है आपकी सहभागिता  पर्यावरण क्या है समझिए ! पर्यावरण शब्द ' परि+आवरण ' के संयोग से बना है। ' परि ' का आशय चारों ओर तथा ' आवरण ' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों , प्राणियों , और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु , जल , भूमि , पेड़-पौधे , जीव-जन्तु , मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता है। आवश्यक क्यों है ! पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है । इसलिए दुनिया के सभी देशों पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय किए जा रहें हैं वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी समाप्त हो जायेगा । दुराग्रामी दुष्परिणाम घातक है पर्यावर...