संसदीय प्रश्न: संरक्षित क्षेत्रों में पर्यावरणीय मंज़ूरी
केंद्र सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 की उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के खंड (v) के अंतर्गत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-ईआईए 2006 जारी की है।
समय-समय पर
संशोधित ईआईए अधिसूचना,
2006 के प्रावधानों के अनुसार, पर्यावरण
सेवाओं सहित भौतिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं/गतिविधियों को ईआईए
अधिसूचना, 2006 (संशोधित) की अनुसूची के 7 के अंतर्गत बताया गया है। ऐसी परियोजनाओं/गतिविधियों का मूल्यांकन
केंद्रीय स्तर पर 'श्रेणी ए ' की
परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ई ए सी द्वारा और राज्य/केंद्र शासित
प्रदेश स्तर पर 'श्रेणी बी ' की
परियोजनाओं के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाता है। इसमें
परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय प्रभावों पर विचार किया जाता है। कुछ मामलों में,
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कुछ हिस्से टाइगर रिजर्व या अन्य
संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या उनसे सटे हो सकते हैं। ऐसे प्रस्तावों को परिवेश
पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाने के बाद, इस
मंत्रालय द्वारा लगातार जांच की जाती है। ऐसे प्रस्तावों (जिनमें टाइगर रिजर्व या
अन्य संरक्षित क्षेत्र शामिल हों) को एक सख्त, बहु-स्तरीय
जांच और मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एक तो ईआईए अधिसूचना, 2006 के तहत पर्यावरण मंजूरी के लिए ई ए सी के समक्ष, और
दूसरा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के संबंधित
प्रावधानों (मंत्रालय के दिशानिर्देशों और माननीय न्यायालयों के निर्देशों के साथ)
के अंतर्गत वन्यजीव मंजूरी लेने के लिए सक्षम निकायों और प्राधिकरणों के माध्यम
से।
योजनाओं की
सही जांच और मूल्यांकन के लिए, मंत्रालय ने 'परिवेश' पोर्टल पर एक 'डिसीजन
सपोर्ट सिस्टम' भी बनाया है। यह जीआईएस-आधारित एक ऐसा
प्लेटफॉर्म है जो प्रोजेक्ट वाली जगहों की पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का आकलन
करने के लिए कई तरह के जियोस्पेशियल डेटासेट को एक साथ लाता है। यह सुरक्षित
इलाकों, इको-सेंसिटिव ज़ोन, जंगलों,
वेटलैंड्स, कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन और पर्यावरण
की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य जगहों के हिसाब से योजनाओं का ऑटोमेटेड प्रॉक्सिमिटी एनालिसिस (दूरी का
विश्लेषण) करने में मदद करता है। इससे एक्सपर्ट अप्रेज़ल कमेटियों और रेगुलेटरी
अथॉरिटीज को सही और तेज़ी से फ़ैसले लेने के लिए सबूतों पर आधारित जानकारी मिलती
है।
संरक्षित क्षेत्रों, इको-सेंसिटिव ज़ोन /इको-सेंसिटिव एरिया या वन क्षेत्रों में स्थित योजनओं के लिए वाइल्डलाइफ़ क्लीयरेंस की ज़रूरत वाले प्रस्तावों की जांच कई स्तरों पर की जाती है। इसमें राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन और राज्य वन्यजीव बोर्ड शामिल होते हैं। इसके बाद, अनुशंसित मामलों की जांच मंत्रालय और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (एस सी एन बी डब्ल्यू एल) करती है। यह समिति हर मामले के आधार पर उस इलाके की इकोलॉजिकल संवेदनशीलता, वन्यजीवों के आवास और कॉरिडोर पर पड़ने वाले कुल और खास असर, और नुकसान कम करने के प्रस्तावित उपायों की जांच करती है। एस सी एन बी डब्ल्यू एल वन्यजीव क्लीयरेंस के लिए प्रस्तावों की सिफारिश तभी करती है जब असर, नुकसान कम करने के उपायों और ज़रूरी सुरक्षा उपायों को शामिल करने पर ठीक से विचार कर लिया जाता है। इसी तरह, पर्यावरण पर पड़ने वाले असर और प्रोजेक्ट के हिसाब से ज़रूरी सुरक्षा उपायों (जिसमें पर्यावरण प्रबंधन योजना में बताए गए नुकसान कम करने के उपाय भी शामिल हैं) पर ठीक से विचार करने के बाद ही प्रस्तावों को पर्यावरण क्लीयरेंस दी जाती है। प्रोजेक्ट प्रमोटर तब तक कोई निर्माण या प्रोजेक्ट से जुड़ी दूसरी गतिविधियां शुरू नहीं कर सकते जब तक कि वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के प्रावधानों के तहत ज़रूरी वाइल्डलाइफ़ क्लीयरेंस न मिल जाए।
वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान, कुल 20 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स/गतिविधियों को ई सी दी गई। ये योजनए ऐसे
इलाकों में स्थित थे (पूरी तरह या आंशिक रूप से) जो 'संरक्षित
क्षेत्र' या 'इको-सेंसिटिव ज़ोन'
/'इको-सेंसिटिव एरिया' के अंतर्गत आते हैं।
केद्र/राज्य/केंद्र
शासित प्रदेश स्तर पर 'विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति' द्वारा किए गए मूल्यांकन
के आधार पर, पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकने,
कम करने और उससे निपटने के लिए प्रोजेक्ट-विशिष्ट पर्यावरणीय
सुरक्षा उपाय तय किए जाते हैं। इनमें वन्यजीव संरक्षण, आवास
संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, क्षतिपूर्ति
वृक्षारोपण और पर्यावरणीय निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं। मंज़ूरी के चरण में
वैज्ञानिक मूल्यांकन और जांच-पड़ताल यह सुनिश्चित करती है कि पारिस्थितिक रूप से
संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएं।
यह जानकारी
पर्यावरण,
वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन
सिंह ने आज राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी
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पीके/केसी/एसके/एसएस
प्रविष्टि तिथि: 30
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