संसद में प्रश्न: रेडियोधर्मी कचरा
हमारे परमाणु
ऊर्जा कार्यक्रम के आरंभ से ही परमाणु कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को सर्वोच्च
प्राथमिकता दी गई है। भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा (रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित
निपटान) नियम,
1987 लागू किए हुए हैं, जिनके तहत रेडियोधर्मी
कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और निपटान के लिए कानूनी आवश्यकताएं तय की गई हैं। इन
नियमों के अनुसार, रेडियोधर्मी कचरा पैदा करने वाली सभी
सुविधाओं के लिए रेडियोधर्मी अपशिष्ट के विसर्जन के लिए एईआरबी से अनुमति लेना
आवश्यक है। यह अनुमति उस कचरे की मात्रा और गतिविधि को निर्दिष्ट करती है जिसे
परमाणु प्रतिष्ठान द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार ही निपटाया जा सकता है। एईआरबी
द्वारा निर्दिष्ट रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्सर्जन की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
पालन किए जा रहे मानदंडों और सुरक्षित प्रथाओं पर आधारित हैं। रेडियोधर्मी कचरे का
प्रबंधन, उपचार, भंडारण और निपटान AERB
द्वारा निर्धारित सुस्थापित प्रक्रियाओं और दिशा निर्देशों के
अनुसार किया जाना आवश्यक है।
कचरा प्रबंधन
के सिद्धांत के रूप में,
किसी भी भौतिक रूप में कचरे को पर्यावरण में तब तक नहीं छोड़ा या
निपटाया जा सकता जब तक उसे नियमों की मंजूरी, उनसे छूट या
बहिष्करण न मिल जाए। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और बैक-एंड ईंधन चक्र से निकलने वाले
रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन के लिए व्यापक रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन प्रणाली
स्थापित की गई है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन और रखरखाव गतिविधियों के
दौरान गैसीय, तरल और ठोस रूप में परमाणु कचरा उत्पन्न होता
है।
(अ) गैसीय कचरे का
उपचार उसके उत्पन्न होने के स्थान अर्थात स्रोत पर ही किया जाता है। इसके लिए
सक्रिय चारकोल पर सोखने और उच्च दक्षता वाले पार्टिकुलेट एयर फिल्टर द्वारा छानने
की प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाता है।
(आ) तरल कचरे का उपचार
विभिन्न प्रौद्योगिकीयों द्वारा किया जाता है, जैसे— छानना,
सोखना, रासायनिक उपचार, वाष्पीकरण,
आयन एक्सचेंज, रिवर्स ऑस्मोसिस आदि; यह कचरे की प्रकृति, मात्रा और उसमें रेडियोधर्मिता
की तीव्रता पर निर्भर करता है।
इस्तेमाल हो
चुके ईंधन यानी स्पेंट फ्यूल की रीप्रोसेसिंग यानी पुन: प्रसंस्करण के दौरान
निकलने वाले उच्चस्तरीय रेडियो एक्टिव कचरे को 'विट्रिफिकेशन'
अर्थात कांचन प्रक्रिया के ज़रिए कांच में परिवर्तित कर दिया जाता
है। इस विट्रिफाइड कचरे को कुछ समय के लिए 'सॉलिड स्टोरेज
सर्विलांस फैसिलिटी' में रखा जाता है। यह प्रक्रिया
इंटरनेशनल एटमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के दिशानिर्देशों और अंतरराष्ट्रीय
तौर-तरीकों के अनुरूप की जाती है।
कचरे को
अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करने यानी 'पार्टिशनिंग' प्रौद्योगिकी पर आधारित तकनीकी
प्रगति से स्वास्थ्य सेवा में इस्तेमाल होने वाले उपयोगी रेडियो-आइसोटोप, जैसे सीज़ियम-137 (सीएस-137), रूथेनियम-106
(आरयू-106) और स्ट्रॉन्शियम-90 (एसआर-90) को विभाजन के जरिए प्राप्त करना संभव हो
गया है। कीमती रेडियो न्यूक्लाइड्स प्राप्त करने के अलावा, पार्टिशनिंग
तकनीक से कांच के मैट्रिक्स में स्थिर करने से पहले एक्टिनाइड्स सहित लंबे समय तक
सक्रिय रहने वाले रेडियो-आइसोटोप को अलग करने में मदद मिलती है। पार्टिशनिंग तकनीक
ने जमा किए जाने वाले बचे हुए कचरे की मात्रा को बहुत घटा दिया है।
परमाणु ऊर्जा
विभाग (डीएई) आधुनिकतम उपायों से रेडियो एक्टिव कचरे का सुरक्षित प्रबंधन
सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। परमाणु कचरे का प्रबंधन/निपटान देश में'परमाणु ऊर्जा (रेडियो एक्टिव कचरे का सुरक्षित निपटान) नियम 1987' के प्रावधानों के अनुरूप सुरक्षित रूप में किया जाता है। देश में परमाणु
कचरा प्रबंधन के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही
बेहतरीन प्रथाओं के अनुरूप है और आईएईए के दिशानिर्देशों पर ही आधारित हैं।
डीएई 'क्लोज्ड फ्यूल साइकिल' यानी बंद ईंधन चक्र पर काम कर
रहा है, जिसमें देश के भीतरी स्रोतों से प्राप्त इस्तेमाल
किए जा चुके ईंधन को संसाधन माना जाता है।
इसके तहत इस्तेमाल किए जा चुके ईंधन के अधिकांश पुर्नउपयोगी घटकों को भविष्य के
रिएक्टरों में ईंधन के रूप में दोबारा प्रोसेस किया जाता है। रीप्रोसेसिंग के
दौरान निकलने वाले उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे को 'विट्रिफिकेशन'
अर्थात कांचन प्रक्रिया के माध्यम से विट्रिफाइड कांच में ढाल दिया
जाता है। 'पार्टिशनिंग' अर्थात विभाजक
प्रौद्योगिकी आने से परमाणु कचरे में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले रेडियोधर्मी
घटकों (जैसे एक्टिनाइड्स) को अलग करने और उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे से सामाजिक
प्रयोग के लिए उपयोगी रेडियोआइसोटोप निकालने से विट्रिफिकेशन से पहले ही कचरे की
मात्रा बहुत घटाई जा सकती है। इससे निकट
भविष्य में 'डीप जियोलॉजिकल रिपॉजिटरी' अर्थात गहन भूवैज्ञानिक भंडारण
सुविधा की आवश्यकता खत्म हो सकती है।
यह जानकारी
आज लोकसभा में प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध; कार्मिक,
लोक शिकायत और पेंशन; परमाणु ऊर्जा और
अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर में
दी।*****
पीके/केसी/आईएम/(रिलीज़ आईडी: 2292129) आगंतुक पटल : 71 प्रविष्टि तिथि: 29 JUL 2026 by PIB Delhi