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सीएक्यूएम ने अमृतसर एवं तरनतारन ज़िला प्रशासन के साथ पराली जलाने से रोकने के उपायों की समीक्षा की; हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया

एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस.डी. अत्री की अध्यक्षता में सीएक्यूएम की एक उच्च स्तरीय टीम ने धान की कटाई के वर्तमान मौसम में पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया।

इन जिलों की पहचान धान की पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट जिलों के रूप में की गई है। क्षेत्र भ्रमण करने के अलावा, आगंतुक टीम ने आज अमृतसर में अमृतसर एवं तरनतारन जिले के उपायुक्तों तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की। यह यात्रा, फ्लाइंग स्क्वाड्स की तैनाती के अलावा, आयोग द्वारा धान की पुआल जलाने को कम करने और समाप्त करने की उच्च प्राथमिकता के अनुरूप है, जो एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में सर्दियों की हवा प्रदूषण का एक मुख्य कारण है।

इस चर्चा में धान के पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) इस्तेमाल को असरदार बनाने के लिए संबंधित विभागों एवं ज़िला प्रशासन की तैयारियों और आपसी तालमेल की समीक्षा पर बल दिया गया। आयोग ने किसानों को सीआरएम मशीनें समय पर उपलब्ध कराने, उन्हें जागरूक बनाने, सूचना, शिक्षा एवं संचार से जुड़ी गतिविधियां चलाने और ज़रूरी मदद देने में सुविधाएं उपलब्ध कराने के महत्व पर बल दिया।

समीक्षा बैठक के साथ-साथ, सीएक्यूएम ने अमृतसर और तरनतारन ज़िलों के चुने हुए हॉटस्पॉट गांवों और सुविधाओं का दिनांक 09.10.2026 और 10.10.2026 को क्षेत्र दौरा किया। इसका उद्देश्य ज़मीनी स्थिति का जायजा लेना और पराली जलाने से रोकने के उपायों के लागू करने की समीक्षा करना था।

अमृतसर ज़िले के संबंध में, समीक्षा बैठक और क्षेत्र दौरा के दौरान फ़सल की कटाई एवं खरीद की स्थिति के साथ-साथ फ़सल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की उपलब्धता एवं तैनाती पर चर्चा की गई। यह जानकारी दी गई कि धान के पराली को इकट्ठा करने और उसके प्रबंधन के लिए अमृतसर और आस-पास के ज़िलों से बेलर मशीनें काम कर रही हैं। धान के पुआल की गांठों के इस्तेमाल के लिए बॉयलर वाले उद्योग के साथ एक आपूर्ति श्रृंख्ला बनाई गई है। एक्स-सीटू प्रबंधन को आसान बनाने के लिए किसानों और संग्राहकों को इन उद्योग से जोड़ा गया है। ज़िले ने ज़िला प्रशासनिक परिसर में एक कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क भी बनाया है ताकि सीआरएम मशीनरी की ज़रूरत वाले किसानों की पहचान की जा सके और उन्हें यह मशीनरी आसानी से उपलब्ध हो सके। आग लगने और पराली जलाने की घटनाओं की जानकारी देने के लिए ज़िला-स्तर पर एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।

 तारनतारन जिले के संबंध में, समीक्षा बैठक और क्षेत्र दौरा के दौरान चर्चा में जिले में कटाई और खरीद की स्थिति और सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता एवं तैनाती पर चर्चा शामिल थी। जानकारी दी गई कि धान के पराली के असरदार एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए तरनतारन और आस-पास के ज़िलों में बेलर मशीनें काम कर रही हैं और ज़िले ने किसानों के लिए सीआरएम मशीनरी की खरीद एवं उपलब्धता के अपने लक्ष्यों को बहुत हद तक प्राप्त कर लिया है। नोडल/क्लस्टर अधिकारियों और ज़मीनी स्तर के अन्य कर्मचारियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फील्ड पेट्रोलिंग एवं निगरानी के साथ-साथ, धान की पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए आईईसी गतिविधियों एवं प्रवर्तन उपायों पर भी बल दिया गया।

दोनों ज़िलों के अधिकारियों ने सीएक्यूएम के कानूनी निर्देशों को लागू करने, रोकथाम के उपायों को मज़बूत करने और अपने-अपने ज़िलों में पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए ठोस प्रयास करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इसके अलावा, निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत, आयोग ने पंजाब के 18 ज़िलों में 01.10.2026 से 30.11.2026 तक की अवधि के लिए 'फ़्लाइंग स्क्वाड' तैनात किए हैं, जिनमें संगरूर, तरनतारन, फ़िरोज़पुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फ़ाज़िल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फ़रीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर एवं फ़तेहगढ़ साहिब शामिल हैं।

सीएक्यूएम ने ज़िला, नोडल और क्लस्टर अधिकारियों द्वारा लगातार एवं असरदार क्षेत्र निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है, विशेष रूप से हॉटस्पॉट इलाकों में; यानी कम लागत वाले सेंसर, निगरानी के दूसरे तरीकों एवं नियमों को लागू करने में कोई ढील नहीं बरतनी चाहिए। इसके अलावा, एक्स-सीटू प्रबंधन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और सीआरएम मशीनरी, बेलर, क्षेत्रीय कर्मचारियों, निगरानी प्रणालियों और नियंत्रण कक्षों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए किसानों, संग्राहकों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच घनिष्ठ समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

सीएक्यूएम निरंतर संबंधित राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और जिला प्रशासनों द्वारा धान के अवशेष जलाने की प्रभावी रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों की निगरानी, समन्वय एवं समीक्षा करता है। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा सामूहिक एवं समन्वित प्रयासों की आवश्यकता दोहराई है, साथ ही किसानों एवं अन्य हितधारकों की सक्रिय मदद एवं सहयोग के की बात की है ताकि वर्तमान धान की कटाई के मौसम में पुआल जलाने को प्रभावी तरीके से रोका जा सके।

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पीके/केसी/आरटी/एके/डीए प्रविष्टि तिथि: 10 OCT 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2321809) आगंतुक पटल : 344

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