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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

एसबीएम-यू की उपलब्धियां और स्थिति

  एसबीएम-यू की उपलब्धियां और स्थिति भारत सरकार ने 2 अक्टूबर , 2014 को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) का शुभारंभ किया , जिसका उद्देश्य देश के शहरी क्षेत्रों को खुले में शौच मुक्त बनाना और महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश सहित देश के शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न नगरपालिका ठोस अपशिष्ट ( एमएसडब्ल्यू) का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना था। एसबीएम-यू 2.0 को 1 अक्टूबर , 2021 को पांच वर्षों की अवधि के लिए शुरू किया गया है , जिसका लक्ष्य स्रोत पर ही अपशिष्ट का पृथक्करण , घर-घर जाकर संग्रहण और अपशिष्ट के सभी भागों का वैज्ञानिक प्रबंधन , जिसमें वैज्ञानिक लैंडफिल में सुरक्षित निपटान और सभी पुराने कचरा स्थानों का सुधार शामिल है और इसके    माध्यम से सभी शहरों को अपशिष्ट मुक्त स्थिति प्राप्त करना है। 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्थानीय स्थानीय निकायों ने अक्टूबर 2019 में खुद को खुले में शौच मुक्त (ओ डी एफ ) घोषित कर दिया। यह उपलब्धि 63.83 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आई एच एच एल ) इकाइयों के निर्माण के साथ हासिल की गई है , जो मिशन के लक...
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डंप साइट की तीव्र सुधार योजना

  लगभग 25 करोड़ मीट्रिक टन (एमटी) पुराने कचरे से भरे कुल 2488 डंपसाइटों (जिनमें 1000 टन से अधिक कचरा है) की पहचान सुधार के लिए की गई है। अब तक 1138 डंपसाइटों का पूर्ण सुधार हो चुका है और 1020 साइटों पर काम चल रहा है। अब तक 15.51 करोड़ मीट्रिक टन ( 62 प्रतिशत) कचरे का निपटान किया जा चुका है और 8484.15 एकड़ ( 56 प्रतिशत) भूमि को खाली करा लिया गया है। पुराने डंपसाइटों के सुधार की स्थिति का राज्यवार विवरण  https://sbmurban.org/swachh-bharat-mission-progess पर उपलब्ध है। डंपसाइट सुधार त्वरण कार्यक्रम (डीआरएपी) एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य 214 पुराने कचरा डंपसाइटों के सुधार में तेजी लाना है , जो शेष बचे कचरे का 80 प्रतिशत हिस्सा हैं , और सितंबर 2026 तक उत्पादक शहरी उपयोग के लिए भूमि को पुनः प्राप्त करना है , साथ ही नए डंपसाइटों के निर्माण को रोकना है। डीआरएपी में प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के 214 सबसे कठिन डंपसाइटों के 100 प्रतिशत सुधार के लिए 200 शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) शामिल हैं। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने 29 राज्यों/केंद्र शासित प्...

अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, विलंब को कम और पर्यावरण अनुपालन को मजबूत करने के लिए सरकार ने वायु एवं जल अधिनियमों के अंतर्गत समान सहमति दिशा-निर्देशों में संशोधन किया

  सरकार ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम , 1981 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम , 1974 के अंतर्गत अधिसूचित एकसमान सहमति दिशानिर्देशों में संशोधन किया है ताकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उद्योगों के लिए सहमति प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके। इस कदम का उद्देश्य प्रक्रियात्मक विलंब को कम करना और पर्यावरण प्रशासन को मजबूत करना है। पिछले वर्ष जारी किए गए दिशानिर्देश स्थापना सहमति (सीटीई) और संचालन सहमति (सीटीओ) प्रदान करने , अस्वीकार करने या रद्द करने के लिए एक समान ढांचा प्रदान करते हैं। ये दिशानिर्देश देश भर में सहमति प्रबंधन में एकरूपता , पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। यह महत्वपूर्ण सुधार समेकित सहमति और प्राधिकरण का प्रावधान है। एसपीसीबी अब एक ही आवेदन पर कार्रवाई कर सकते हैं और वायु एवं जल अधिनियमों के तहत सहमतियों के साथ-साथ विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत प्राधिकरणों को शामिल करते हुए एकीकृत अनुमतियां जारी कर सकते हैं। एकीकृत सहमतियों से कई आवेदनों की आवश्यकता कम हो जाती है , अनुमोदन की समय सीमा कम हो जाती ह...

सरकार ने सार्वजनिक अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की स्थापना में तेजी लाने के लिए नियामक ढांचे को तर्कसंगत बनाया

औद्योगिक प्रदूषण के नियंत्रण , रोकथाम और कमी के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने हेतु ठोस सुरक्षा उपाय और कठोर पर्यावरणीय निगरानी प्रदूषण नियंत्रण अवसंरचना को सुदृढ़ करने और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (सीईटीपी) को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को युक्तिसंगत बनाया है। इस सुधार का उद्देश्य औद्योगिक समूहों में सीईटीपी की स्थापना में तेजी लाना है , साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और नियामक निगरानी में कोई समझौता न हो। सीईटीपी सामूहिक प्रदूषण नियंत्रण सुविधाएं हैं जो उद्योगों के समूहों द्वारा उत्पन्न औद्योगिक अपशिष्टों का उपचार करती हैं , विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों द्वारा , जिन्हें व्यक्तिगत उपचार प्रणाली स्थापित करने में तकनीकी या वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ये सुविधाएं औद्योगिक अपशिष्टों के केंद्रीकृत उपचार , वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रभावी निगरानी को सक्षम बनाकर प्रदूषण को कम करने के लिए बनाई गई है...

नई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम अधिसूचित; 01 अप्रैल, 2026 से लागू होगी

·         ठोस अपशिष्ट के स्रोत का चार-स्तरीय पृथक्करण अनिवार्य ; बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां निर्धारित ·         नए नियमों में ' प्रदूषक भुगतान सिद्धांत ' के आधार पर उल्लंघन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान ·         ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन ट्रैकिंग एवं निगरानी तथा अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए तीव्र् भूमि आवंटन का प्रावधान केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम , 2026 को अधिसूचित किया है , जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2016 का स्थान लेंगे। ये नियम पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम , 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं और 01 अप्रैल , 2026 से पूर्ण रूप से लागू होंगे। संशोधित नियम परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत करते हैं , जिसमें कचरे का कुशल पृथक्करण एवं प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है...

इंडिया एनर्जी वीक 2026: हाइड्रोजन जोन का उद्घाटन, भारत की निम्न-कार्बन ऊर्जा भविष्य यात्रा को नया आयाम मिला

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने आज गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन समारोह के उपरांत हाइड्रोजन जोन का उद्घाटन किया। ऑयल इंडिया द्वारा आयोजित इस हाइड्रोजन जोन में अत्याधुनिक हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों और नवोन्मेषी समाधानों का प्रदर्शन किया गया है , जो भारत के निम्न-कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह जोन हाइड्रोजन के उत्पादन , भंडारण एवं उपयोग से जुड़ी नवाचारपूर्ण गतिविधियों को एक मंच पर प्रस्तुत करता है , जिससे आगंतुकों को उन विविध मार्गों का समग्र दृष्टिकोण प्राप्त होता है , जो वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति प्रदान कर रहे हैं। चुनिंदा प्रदर्शनियों और उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से , हाइड्रोजन जोन एक केंद्रित व ज्ञानवर्धक मंच प्रदान करता है , जिससे यह समझ विकसित होती है कि हाइड्रोजन किस प्रकार शोधन , उर्वरक , इस्पात एवं गतिशीलता जैसे कठिन-से-कार्बनमुक्त किए जाने वाले क्षेत्रों को डीकार्बनाइज कर सकता है। साथ ही यह भारत को उभरते वैश्विक हाइड्रोजन बाजारों में एक ...

नीति आयोग द्वारा जयपुर में "भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहन (ईएलवी), बेकार टायरों और ई-अपशिष्ट तथा लिथियम-आयन बैटरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना" संबंधी विषय पर तीन महत्वपूर्ण रिपोर्ट लॉन्च की गई

  नीति आयोग ने 22 जनवरी , 2026 को जयपुर में मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के इंटरनेशनल मटेरियल रिसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस (आईएमआरसी) में "भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों (ईएलवी) , बेकार टायरों और ई-अपशिष्ट तथा लिथियम-आयन बैटरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने" संबंधी विषय पर तीन रिपोर्ट लॉन्च कीं। इन रिपोर्टों में भारत में सर्कुलर इकोनॉमी इकोसिस्टम की चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है और बुनियादी ढांचे के विकास , क्षेत्र के औपचारिककरण ,  एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) फ्रेमवर्क को मजबूत करने और रेवेन्यू जेनरेशन के लिए आर्थिक क्षमता बढ़ाने हेतु सुझाव दिए गए। माननीय प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित भारत का विजन अनिवार्य रूप से कम कार्बन वाले और संसाधन-कुशल विकास मार्ग पर आधारित है , जिसके लिए स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के व्यापक कार्यान्वयन की आवश्यकता है। इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरण , लिथियम-आयन बैटरी और ऑटोमोटिव वाहन , डिजिटलीकरण को सशक्त बनाने , मोबिलिटी में सुधार करने और एनर्जी ट्रांजिशन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत मे...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये