सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत तीन प्रमुख बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में मान्यता, यह मान्यता एकीकृत हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत के परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


 दीनदयाल, वी.ओ. चिदंबरनार और पारादीप बंदरगाहों को रणनीतिक हाइड्रोजन केंद्रों के रूप में विकास हेतु चिन्हित किया गया,“भारत के बंदरगाह वैश्विक व्यापार मार्गों पर अपनी रणनीतिक उपस्थिति के माध्यम से इस क्षेत्र के सतत रसद क्षेत्र में परिवर्तन को गति प्रदान करेंगे:” श्री सर्बानंद सोनोवाल

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) के अंतर्गत तीन प्रमुख बंदरगाहों - दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (तमिलनाडु) और पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (ओडिशा) को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता दी है। यह मान्यता एकीकृत हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत के परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्नों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह मिशन बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन केंद्रों के विकास को बढ़ावा देता है जो उत्पादन और उपभोग के केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करेंगे। इससे स्थायी और प्रतिस्पर्धी हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की स्थापना में सहायता मिलेगी।

इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “यह मान्यता भारत की समुद्री यात्रा में निर्णायक क्षण है क्योंकि हम वैश्विक समुद्री क्षेत्र में आधुनिक, सक्षम और अग्रणी बनने की तरफ बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम सतत विकास के पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं जो भारत को 2070 तक नेट जीरो बनने के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में शक्ति प्रदान करेगा। बंदरगाह इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण नोड हैं। ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में, हमारे बंदरगाह स्वच्छ ऊर्जा नवाचार के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेंगे। अग्रणी समुद्री देश के रूप में, भारत के बंदरगाह न केवल अपने देश को सशक्त बनाएंगे बल्कि इस क्षेत्र को स्थायी रसद की ओर ले जाने के लिए पूर्वी और पश्चिमी व्यापार मार्गों पर अपनी रणनीतिक स्थिति का भी लाभ उठाएंगे।

लंबी दूरी के हाइड्रोजन परिवहन से जुड़ी रसद और तकनीकी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह मिशन क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल अपनाता है। यह दृष्टिकोण प्रारंभिक चरण की परियोजना व्यवहार्यता को बढ़ाता है, बुनियादी ढाँचे के अभिसरण को सक्षम बनाता है, और चिन्हित क्षेत्रों में पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने में सहायता करता है।

 27 जून 2025 को जारी हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर (एचवीआईसी) और ग्रीन हाइड्रोजन हब स्थापित करने के लिए संशोधित योजना दिशानिर्देश, बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन गतिविधि में सक्षम संभावित क्षेत्रों की पहचान और समर्थन के लिए रूपरेखा प्रदान करते हैं। इन दिशानिर्देशों के घटक B2 के तहत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के बिना स्थानों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दे सकता है। इससे अन्य केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं के तहत उपलब्ध प्रोत्साहनों और लाभों तक पहुँच आसान हो जाती है।

इन प्रावधानों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी ने दीनदयाल, वी.ओ. चिदंबरनार और पारा दीपबंदरगाह क्षेत्रों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता देने को मंजूरी दे दी है।  इन निर्दिष्ट क्षेत्रों में स्थापित परियोजनाएँ केंद्र और राज्य सरकारों की अन्य प्रासंगिक योजनाओं और नीतियों के अंतर्गत उपलब्ध लाभों के लिए पात्र होंगी, जिनमें राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी योजनाएँ भी शामिल हैं। इन बंदरगाहों को मान्यता मिलने से औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा मिलने, हरित निवेश आकर्षित होने और स्वच्छ ईंधन प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे 2070 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने के भारत के व्यापक दृष्टिकोण को बल मिलेगा। यह मान्यता सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से जारी की गई है।

******

पीके/केसी/पीके प्रविष्टि तिथि: 10 OCT 2025 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2177690) आगंतुक पटल : 327

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

एकल उपयोग प्लास्टिक हमारी वुसंधरा को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है... पूरा विश्व इस समय इसके खतरे को कम करने में लगा है... छत्तीसगढ़ भी अपना योगदान दे रहा है... जिसमें दुर्ग जिले का उल्लेखनीय योगदान... समीक्षा बैठक..!

गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा दुर्ग की समीक्षा बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू की क्रांतिकारी पहल से पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा रहे... "नवाचार प्रयत्न"...  "बर्तन बैंक" की सराहना की... उल्लेखनीय है कि, अधिकारियों से गृहमंत्री ने कहा “काम बोलता है..!” पर्यावरण नियम कुंजी :: छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा जिले की समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सभापति व बर्तन बैंक की संस्थापिका, जो कि, प्रदेश में “बर्तन वाली दीदी” के नाम से मशहूर हैं श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू को विशेष रूप से आमंत्रित कर बर्तन बैंक के बारे में जानकारी ली और इस नवाचार के लिए बर्तन बैंक की जमकर सराहना की उन्होंने अधिकारियों के सामने श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति की गई पहल का उद्धाहरण रखते हुए कहा कि, “नाम नहीं...काम बोलता है”। हमारी महिला जनप्रतिनिधि विगत दस वर्ष से बर्तन बैंक को लेकर समर्पित होकर कार्य कर रही है। “नो डिस्पोजल और नो प्लास्टिक कैंपेन” में यह मील का पत्थर साबित हो रही है। यही कारण है कि, अब प्...

कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम - केंद्र ने कृषि वानिकी में व्यापार को आसान बनाने के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदर्श नियम जारी किए

  आगामी एनटीएमएस पोर्टल पर कृषि वानिकी वृक्षारोपण के जियो-टैग किए गए डेटा को रखा जाएगा व पेड़ों की कटाई के लिए किसानों के आवेदनों को मंजूरी देने की सुविधा होगी / ग्रमीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास के साथ इकोलॉजिकल आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए किसान-हितैषी कदम   वन,पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालयइसने कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम’ जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य नियामक ढांचे को सरल बनाने/  कृषि वानिकी को बढ़ावा देने में राज्यों /  केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करना है। कृषि वानिकी कई लाभ प्रदान करती है। इसमें ग्रामीण आजीविका को बढ़ाना , मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार , जैव विविधता का संरक्षण , वृक्ष आवरण में वृद्धि , जल संरक्षण , जलवायु लचीलापन में योगदान देना साथ ही  प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना शामिल है। इन मॉडल नियमों का उद्देश्य - इन मॉडल नियमों का उद्देश्य कृषि वानिकी भूमि के पंजीकरण /  वृक्षों की कटाई और परिवहन के प्रबंधन के लिए सरलीकृत प्रक्रियाएँ प्रदान करके एक सुव्यवस्थित विनिय...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...