सरकार ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत दो प्रमुख संस्थानों को भंडार गृह के रूप में अधिसूचित किया
राष्ट्रीय भंडार नेटवर्क को और सशक्त किया गया, जिससे जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा अनुसंधान और नवाचार को सुगम बनाया जा सकेगा
राष्ट्रीय
जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु
परिवर्तन मंत्रालय के परामर्श से, दो संस्थानों- कोच्चि
स्थित समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई) को 'रेफरल केन्द्र भवसागर' और आघारकर अनुसंधान संस्थान,
पुणे स्थित 'महाराष्ट्र एसोशिसन फॉर द
कल्टीवेशन ऑफ साइंस (MACS) सूक्ष्मजीव संग्रह और राष्ट्रीय
कवक संवर्धन संग्रह'---को जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत 'निर्दिष्ट भंडार' के रूप में अधिसूचित किया है।
यह धारा
केंद्र सरकार को विभिन्न श्रेणियों के जैविक संसाधनों के लिए संस्थानों को भंडार
(रिपॉजिटरी) के रूप में नामित करने का अधिकार देती है। ये भंडार जैविक सामग्रियों, जिनमें वाउचर नमूने भी शामिल हैं, के सुरक्षित
संरक्षण में सहायता करेंगे तथा साथ ही, नई खोजी गई
प्रजातियों और अनुसंधान एवं वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले
जैविक संसाधनों के दस्तावेज़ीकरण को सुदृढ़ बनाएंगे।
इन भंडारों को जैविक सामग्रियों को सुरक्षित संरक्षण में रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, और किसी भी व्यक्ति द्वारा नए प्रजाति की खोज किए जाने पर उसे नामित भंडार को सूचित करना तथा संबंधित वाउचर नमूने जमा करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने ऐसे संस्थानों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जो भंडार के रूप में मान्यता प्राप्त करना चाहते हैं। संस्थानों से प्राप्त प्रस्तावों पर प्राधिकरण (एनबीए की शासी निकाय) द्वारा विचार किया जाता है और अधिसूचना के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अनुशंसित किया जाता है।
इस संदर्भ
में,
कोच्चि स्थित समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी
केंद्र(सीएमएलआरई) के रेफरल केन्द्र भवसागर तथा पुणे स्थित अघारकर अनुसंधान
संस्थान से उनके 'महाराष्ट्र एसोशिसन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ
साइंस (एमएसीएस) सूक्ष्मजीव संग्रह और राष्ट्रीय कवक संवर्धन संग्रह' के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इन प्रस्तावों की विशेषज्ञ समिति द्वारा
विधिवत जांच की गई और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप अधिसूचना के लिए अनुशंसित
किया गया।
पुणे स्थित
आघारकर अनुसंधान संस्थान में स्थित एमएसीएस सूक्ष्मजीव संग्रह एक सुव्यवस्थित और
स्थापित सुविधा है,
जिसे सूक्ष्मजीव संस्कृतियों के संरक्षण में दीर्घकालिक विशेषज्ञता
प्राप्त है। इसने दुर्लभ और कठिनाई से विकसित होने वाले सूक्ष्मजीवों, जैसे अवायवीय और अतिवादी प्रजातियों को संभालने में विशेष क्षमताएं विकसित
की हैं। इसका संग्रह देश के सबसे विविध और सुव्यवस्थित रूप से वर्णित संग्रहों में
से एक है, जो कृषि, स्वास्थ्य और
उद्योग से जुड़े अनुसंधान एवं अनुप्रयोगों को सहयोग प्रदान करता है।
पुणे स्थित
आघारकर अनुसंधान संस्थान में स्थित भारतीय राष्ट्रीय कवक संवर्धन संग्रह
(एनएपसीसीआई) कवक विविधता को समर्पित एक प्रमुख भंडार है। यह भारत के विभिन्न
आवासों से एकत्रित प्रमाणित कवक संस्कृतियों का संरक्षण करता है और कवक की पहचान
एवं वर्गीकरण से जुड़े अनुसंधान को सहयोग प्रदान करता है। यह सुविधा शैक्षणिक
संस्थानों,
शोध संगठनों और उद्योगों को अपनी सेवाएं प्रदान करती है, साथ ही प्रशिक्षण और सहयोगात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण
में भी योगदान देती है।
अब तक, अधिनियम की धारा 39 के तहत 18-संस्थानों को राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित किया जा चुका है। इन दो संस्थानों के शामिल होने से राष्ट्रीय भंडार नेटवर्क और अधिक सुदृढ़ हुआ है, जिससे जैविक संसाधनों के संरक्षण तथा उनके व्यवस्थित दस्तावेजीकरण को और बढ़ावा मिलेगा।
इससे यह
सुनिश्चित होगा कि जैविक सामग्रियों का उचित वैज्ञानिक परिस्थितियों में संरक्षण
किया जाए और उन्हें पारदर्शी तथा जवाबदेह तरीके से अनुसंधान एवं नवाचार के लिए
उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही, यह पहुंच एवं
लाभ-साझेदारी प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन में भी सहायता प्रदान करेगा
क्योंकि इससे ट्रेसबिलिटी और रिकॉर्ड-रखरखाव में सुधार होगा।
यह पहल
जैव-विविधता पर सम्मेलन के उद्देश्यों के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को
दर्शाती है और जैविक संसाधनों के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देने के
प्रयासों को सुदृढ़ करती है, साथ ही यह उनके उपयोग से प्राप्त
होने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे को भी सुनिश्चित करती है।
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पीके/केसी/पीकेपी(रिलीज़
आईडी: 2249926) आगंतुक पटल : 754 प्रविष्टि तिथि: 07 APR 2026 by PIB Delhi