भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी, 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
ठोस
अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार,
ठोस अपशिष्ट को स्रोत पर ही चार भागों में अलग करना अनिवार्य है:
·
गीला अपशिष्ट,
·
सूखा अपशिष्ट,
·
स्वच्छता अपशिष्ट
·
और विशेष देखभाल अपशिष्ट।
इसके साथ ही, थोक अपशिष्ट
उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है, जिन्हें विस्तारित
थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व का पालन करना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उत्पन्न अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण पर्यावरण के अनुकूल तरीके से हो। ये नियम संग्रहण,
परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान सहित ठोस
अपशिष्ट प्रबंधन के सभी चरणों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी को केंद्रीकृत ऑनलाइन
पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वित करते हैं।
इन नियमों
में शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों, राज्य/केंद्र शासित
प्रदेश सरकारों और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के लिए विशिष्ट भूमिकाएं और
जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। नियमों के अनुसार, औद्योगिक
इकाइयों, जिनमें सीमेंट संयंत्र और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र
शामिल हैं, के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) के
उपयोग हेतु ईंधन प्रतिस्थापन दर को वर्तमान पांच प्रतिशत से बढ़ाकर छह वर्षों में 15 प्रतिशत तक किया जाना है। ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के
लिए भूमि के त्वरित आवंटन को सुगम बनाने के लिए, नियमों में
विकास के लिए श्रेणीबद्ध मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के लिए ऑनलाइन रिपोर्ट जमा
करना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों के तहत अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं का ऑडिट
भी किया जाएगा।
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पीके/केसी/जेके/एमपी प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2246833) आगंतुक पटल : 383