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जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पर राष्ट्रीय नवाचार ने 651 जिलों में जलवायु जोखिम का आकलन किया; 310 जिले संवेदनशील पाए गए, पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि को बढ़ावा

सरकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए)” परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है, जिसका उद्देश्य कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करना तथा भविष्य के लिए तैयार कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना और खाद्यान्न की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

परियोजना के अंतर्गत, जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि के जोखिम एवं संवेदनशीलता का आकलन अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) के प्रोटोकॉल के अनुसार 651 प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में जिला स्तर पर किया गया है। इनमें से 310 जिलों को संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया गया, जिनमें 109 जिलों को ‘अत्यंत उच्च’ तथा 201 जिलों को ‘उच्च’ संवेदनशीलता श्रेणी में रखा गया है। इन 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं (डीएसीपी) भी तैयार की गई हैं, ताकि मौसम संबंधी असामान्यताओं का सामना किया जा सके तथा राज्य कृषि विभागों द्वारा उपयोग के लिए स्थान-विशिष्ट जलवायु-सहनशील फसलों, किस्मों और प्रबंधन पद्धतियों की सिफारिश की जा सके।

एनआईसीआरए के अंतर्गत, जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति किसानों की सहनशीलता और अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने के लिए 448 मॉडल जलवायु-सहनशील गांवों में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से स्थान-विशिष्ट जलवायु-सहनशील प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया है। ये गांव 151 जलवायु-संवेदनशील जिलों में फैले हुए हैं।

एनआईसीआरए के तहत गांव स्तर पर बीज बैंक और सामुदायिक नर्सरी स्थापित करने के लिए क्षमता निर्माण भी किया जा रहा है। कई एनआईसीआरए गांवों में सूखा एवं बाढ़ सहन करने वाली जलवायु-सहनशील धान, गेहूं, सोयाबीन, सरसों आदि की किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसके अतिरिक्त, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (एटीएमए) के अंतर्गत विभिन्न कृषि प्रथाओं से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने पिछले 10 वर्षों (2014–2024) के दौरान 2900 किस्में जारी की हैं, जिनमें से 2661 किस्में एक या अधिक जैविक एवं/अथवा अजैविक तनावों के प्रति सहनशील हैं।एनआईसीआरए के अंतर्गत, लघु एवं सीमांत किसानों को जलवायु-सहनशील कृषि प्रथाओं के लिए वर्तमान में आच्छादित 151 जिलों से आगे अतिरिक्त संवेदनशील जिलों में तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। किसानों की भागीदारी पर आधारित ग्राम स्तरीय संस्थाओं, जैसे ग्राम जलवायु जोखिम प्रबंधन समितियां तथा बीज एवं चारा बैंक, की स्थापना की गई है। इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों, विशेषकर जलवायु-सहनशील कृषि को बढ़ावा देने के लिए 731 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) स्थापित किए हैं। केवीके किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिनके अंतर्गत 18.56 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

सरकार फसल उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आजीविका में सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित प्रणालियों का उपयोग कर रही है। ‘किसान e-मित्र” वॉइस-आधारित एआई चैटबॉट, जो 11 क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन करता है, पीएमकिसान और अन्य योजनाओं से संबंधित किसानों के प्रश्नों में सहायता प्रदान करता है। यह प्रतिदिन 20,000 से अधिक प्रश्नों का समाधान करता है और अब तक 95 लाख से अधिक प्रश्नों का उत्तर दे चुका है। इसके अतिरिक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ‘भारत विस्तार” नामक एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल मंच शुरू किया है, जो किसानों को एक ही इंटरफेस के माध्यम से वास्तविक समय में परामर्श, सरकारी योजनाओं की जानकारी, बाजार भाव और मौसम संबंधी अपडेट प्रदान करता है। वर्तमान में यह हिंदी और अंग्रेज़ी का समर्थन करता है तथा इसे 11 भाषाओं तक विस्तारित करने की योजना है। इसमें 24×7 एआई सहायक ‘भारती’ भी उपलब्ध है, जो फोन के माध्यम से तत्काल सहायता प्रदान करती है।राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग कर कीट प्रकोप का प्रारंभिक पता लगाती है, जिससे किसानों को जलवायु-जनित फसल नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। इस प्रणाली का उपयोग वर्तमान में 10,000 से अधिक विस्तार कर्मियों द्वारा किया जा रहा है और यह 61 फसलों तथा 400 से अधिक कीटों को कवर करती है। फील्ड फोटोग्राफ और उपग्रह चित्रों के आधार पर एआई-आधारित विश्लेषण का उपयोग फसल-मौसम अनुकूलन तथा बुवाई पैटर्न की निगरानी के लिए भी किया जा रहा है। इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने ‘किसान सारथी’ नामक आईसीटी-आधारित मंच शुरू किया है, जो किसानों को फसल चयन, कीट प्रबंधन और उत्पादन अनुकूलन के संबंध में डिजिटल परामर्श प्रदान करता है। इस मंच पर 3.43 लाख से अधिक गांवों के 2.75 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं।

पर्यावरणीय परिवर्तनशीलता से निपटने के लिए सूखा-रोधी एवं उच्च उपज वाली बीज किस्मों के प्रसार को भी बढ़ावा दिया गया है।यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एके/एसएस प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2244726) आगंतुक पटल : 288

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