सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के प्रभावी प्रवर्तन पर विचार-विमर्श करने हेतु देश भर के उपायुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस समीक्षा बैठक में देश भर से लगभग 759 से अधिक उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों ने भाग लिया।

 


पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जल जीवन मिशन 2.0 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों/कलेक्टरों के साथ राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित की


समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री के सुरक्षित जल एवं स्वच्छता सेवाओं के दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया गया और जिलों से सेवाओं की आपूर्ति, जल स्थिरता और ग्रामीण स्वच्छता प्रशासन को मजबूत करने का आग्रह किया गया

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के प्रभावी प्रवर्तन पर विचार-विमर्श करने हेतु देश भर के उपायुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस समीक्षा बैठक में देश भर से लगभग 759 से अधिक उपायुक्तों/जिला मजिस्ट्रेटों ने भाग लिया।

इस राष्ट्रीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मेन्ना ने की। बैठक में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोआन, एसबीएम (जी) की संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक सुश्री ऐश्वर्या सिंह, जल की संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीना नाइक तथा पेयजल और स्वच्छता विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे

अपने उद्घाटन भाषण में, डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मेन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), दोनों अब एक ऐसे चरण में पहुंच गए हैं जहां ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर सेवाओं की विश्वसनीय आपूर्ति, कार्यक्षमता, स्थिरता और सामुदायिक स्वामित्व की ओर जाना चाहिए।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तारित करने की हालिया मंजूरी पर प्रकाश डालते हुए, सचिव ने कहा कि जेजेएम 2.0 ग्रामीण भारत में परिसंपत्तियों के  निर्माण से हटकर सतत पेयजल सेवा की आपूर्ति की दिशा में बदलाव का एक प्रतीक है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि नए ढांचे के तहत जिला प्रशासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभागों (पीएचईडी) की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इसी संदर्भ में, डीडब्ल्यूएसडब्ल्यू के सचिव ने जिला स्तर पर सेवाओं की आपूर्ति की निगरानी हेतु समर्पित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) डैशबोर्ड के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जिला प्रशासकों से नियमित रूप से इस डैशबोर्ड की स्थिति की समीक्षा करने, बैठकों के कार्यवृत्त अपलोड करने और नियमितता, पर्याप्तता, जल की गुणवत्ता, शिकायत निवारण एवं योजनाओं के संचालन व रखरखाव (ओ एंड एम) सहित पेयजल सेवाओं से संबंधित विभिन्न कमियों को दूर करने का आग्रह किया।

इसके अलावा, उन्होंने ग्राम स्वच्छता, पेयजल की स्थिरता और समग्र जन स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण घटकों के रूप में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर देते हुए अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रह, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान को सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय में चल रही एक जनहित याचिका में नियमों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का हवाला देते हुए, उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रवर्तन को मजबूत करने और ग्राम पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्राम पंचायतों को अपशिष्ट पृथक्करण, प्रसंस्करण और अपशिष्ट प्रबंधन की समझ के बारे में जागरूक होना चाहिए।

बैठक को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोआन ने जेजेएम और एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन एवं निगरानी में जिला कलेक्टरों की भूमिका के महत्व पर जोर दिया। मिशन के व्यापक दायरे को रेखांकित करते हुए, उन्होंने बताया कि जेजेएम लगभग 5.91 लाख गांवों, 2.62 लाख ग्राम पंचायतों, 16 लाख से अधिक बस्तियों और 19.41 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को कवर करता है, जिससे लगभग 96 करोड़ लोगों को लाभ मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मिशन ने ग्रामीण भारत में व्यापक परिसंपत्तियों का निर्माण किया है और भविष्य में इसके संचालन एवं रखरखाव हेतु पर्याप्त सहायता की आवश्यकता होगी। पीने योग्य पानी की सार्वभौमिक उपलब्धता के सतत विकास लक्ष्य का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत इसे 2030 से पहले, दिसंबर 2028 तक हासिल करने के लिए तैयार है। इसमें जिला प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

पीएम जनमन/दा-जुगा में जनजातीय एवं पीवीटीजी परिवारों की मौजूदगी पर जोर देते हुए, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पीछे न छूटे और 2027 तक सभी आदिवासी और पीवीटीजी बस्तियों को पूरी तरह से कवर करने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी बताया कि जेजेएम के कार्यान्वयन को मजबूत करने हेतु जिला कलेक्टरों के साथ राज्यस्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पहली बैठक 27 मई को महाराष्ट्र में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होगी। अगले छह महीनों में सभी राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा ताकि जिलावार प्रगति की समीक्षा की जा सके, कमियों को दूर किया जा सके और राज्य स्तर से कार्यान्वयन का मार्गदर्शन किया जा सके।उन्होंने बताया कि सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रगति) की बैठक में इन दोनों मिशनों की प्रगति की समीक्षा की जा सकती है।

संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने में जिला कलेक्टरों और पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भी कहा गया कि इस मिशन की समीक्षा एवं चर्चा राज्य-क्षेत्रीय परिषद की बैठकों सहित विभिन्न उच्चस्तरीय अंतर-सरकारी मंचों पर की गई हैजहां इस मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन को राज्यों के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में पहचाना गया है।

उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में 19 मई 2026 को आयोजित 26वीं केन्द्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्यों को जेजेएम 2.0 पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जेजेएम और एसबीएम (जी) की प्रगति को नियमित रूप से सांसदों की अध्यक्षता में होने वाली जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (डीआईएसएचए) की बैठकों में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जिला कलेक्टरों से अनुरोध किया गया कि वे घरेलू नल जल कवरेज, योजना की प्रगति, हर घर जल प्रमाणन, ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं की कार्यशीलता, जल की गुणवत्ता की निगरानी, ​​तृतीय पक्ष द्वारा निरीक्षण, डीडब्ल्यूएसएम द्वारा प्रशासनिक निरीक्षण और एसबीएम (जी) के तहत प्रगति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को शामिल करें। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों को जिला स्तर पर हुई प्रगति की समीक्षा करने, कमियों की पहचान करने और पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं में सुधार हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने में सहायता मिलेगी।राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में जेजेएम 2.0 और एसबीएम-जी 2.0 पर प्रस्तुतियां दी गईं। संयुक्त सचिव (जल) श्रीमती स्वाति मीना नाइक ने सतत सेवाओं की आपूर्ति, सामुदायिक भागीदारी और जिला स्तरीय प्रशासन पर जोर देते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के सुधार-उन्मुख कार्यान्वयन ढांचे पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि मिशन का वर्तमान लक्ष्य संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सतत आधार पर सुरक्षित और पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ये प्रणालियां अगले 25 से 30 वर्षों तक कार्यशील बनी रहें।

प्रस्तुति इन मुख्य विषयगत क्षेत्रों पर केन्द्रित थी:

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत 11 संरचनात्मक सुधार – इसका उद्देश्य शासन-आधारित, प्रौद्योगिकीय रूप से सक्षम और सुनिश्चित गुणवत्ता वाली ग्रामीण पेयजल प्रणाली का निर्माण करना है।

i. संस्थागत संरचना: स्पष्ट रूप से परिभाषित भूमिकाओं, जवाबदेही और नागरिक-केन्द्रित निगरानी से लैस बहुस्तरीय शासन को सुदृढ़ बनाना।

ii. उपयोगिता-आधारित दृष्टिकोण: पेशेवर और विश्वसनीय सेवा वितरण के लिए ग्राम-स्तरीय सूक्ष्म सुविधाओं और क्षेत्रीय थोक जल सुविधाओं को बढ़ावा देना।

iii. ग्राम पंचायतों के लिए तकनीकी ढांचा: ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति प्रणालियों की  शुरूआत, हस्तांतरण, परिसंपत्तियों के रिकॉर्ड और नियमित संचालन एवं रखरखाव में सहायता प्रदान करना।

iv. जल की गुणवत्ता संबंधी प्रशासन: नियमित जल परीक्षण, सामुदायिक निगरानी, ​​मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्रों को सुनिश्चित करना।

v. स्रोत की स्थिरता और जल सुरक्षा: जलभृत नियोजन, भूजल पुनर्भरण, स्रोत संरक्षण, बजट निर्माण और संबंधित कार्यक्रमों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना।

vi. डिजिटल डेटा संबंधी प्रशासन: वास्तविक समय में निगरानी और डेटा-आधारित योजना के लिए सुजलम भारत, सुजल गांव आईडी, डैशबोर्ड और निर्णय-सहायता प्रणालियों का उपयोग।

vii. सहभागी शासन, जन भागीदारी: आईईसी गतिविधियों, ग्राम सभा के खुलासे और डिजिटल प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

viii. क्षमता निर्माण: हब-एंड-स्पोक प्रशिक्षण मॉडल के माध्यम से ग्राम पंचायतों, वीडब्ल्यूएससी, जिला के अधिकारियों और राज्य के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देना।

ix. मानव संसाधन का कौशल विकास: नल जल मित्रों, बहु-कुशल तकनीशियनों और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आधारित सुजलम शक्ति सहभागिता के माध्यम से स्थानीय तकनीकी सहायता को मजबूत करना।

x. संचालन एवं वित्तीय स्थिरता: संचालन एवं रखरखाव संबंधी बजट, निवारक रखरखाव, लागत वसूली और संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना।

xi. अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान: अनुसंधान एवं विकास, पायलट परियोजनाओं, स्टार्टअप संबंधी सहायता और साक्ष्य-आधारित जलवायु के अनुकूल समाधानों को बढ़ावा देना।

·         सुजलम भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: विशिष्ट जीआईएस-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम, अनुक्रमिक जल प्रवाह मानचित्रण और सुजलम भारत आईडी तथा बस्ती-स्तर के सुजल गांव आईडी के आवंटन की प्रगति पर विस्तृत कार्यान्वयन संबंधी अपडेट प्रस्तुत किए गए। सुजल ग्राम आईडी की अवधारणा, उद्देश्य और विस्तृत प्रक्रिया को समझाने के लिए प्रस्तुति के दौरान एक ऑडियो-विजुअल वीडियो भी चलाया गया।

·         सख्त चार-चरणीय कमीशनिंग और हैंडओवर प्रोटोकॉल: ग्राम सभाओं द्वारा सामुदायिक सत्यापन के माध्यम से ग्राम पंचायतों को हर घर जल के रूप में प्रमाणित करना, न्यूनतम 15 दिनों का अनिवार्य परीक्षण संचालन और सुझाई गई चरणबद्ध आईईसी प्रक्रिया के अनुसार जल अर्पण दिवस के माध्यम से समुदाय को औपचारिक रूप से सौंपना।

·         जल उत्सव: प्रस्तुति में जल पर सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत करने के लिए तीन स्तरीय जल उत्सव रणनीति पर प्रकाश डाला गया। राष्ट्रीय स्तर पर, जल महोत्सव प्रत्येक वर्ष 8 मार्च से 22 मार्च तक मनाया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और विश्व जल दिवस को जोड़ता है। इस अवधि के दौरान, राज्य, जिले और ग्राम पंचायतें जल संसाधनों की समीक्षा करती हैं, टैंकों की सफाई, रिसाव कम करने, संचालन और रखरखाव को बढ़ावा देती हैं और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करती हैं। राज्य स्तर पर, राज्य जल उत्सव जल संरक्षण, सतही जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल परंपराओं पर केन्द्रित होता है। ग्राम पंचायत स्तर पर, लोक जल उत्सव जल सुरक्षा, सुरक्षित पेयजल, संरक्षण प्रथाओं और जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा करने के लिए स्थानीय त्योहारों, मेलों और सामुदायिक सभाओं का उपयोग करता है। राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित जल महोत्सव 2026 को भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया, जिसमें भविष्य के संस्करणों में व्यापक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। 

·         उन्नत जल गुणवत्ता संबंधी प्रशासन के आयाम: घरेलू, विद्यालय और आंगनवाड़ी स्तर पर सतही जल, भूजल स्रोतों और स्थानीय वितरण बिंदुओं के लिए सख्त एवं नियमित परीक्षण की आवृत्तियों को संस्थागत बनाना। 

·         जन भागीदारी को सशक्त बनाना: संचालन, जल की गुणवत्ता की निगरानी और शुल्क संग्रह के प्रबंधन हेतु सुजलम शक्ति समूहों और नल जल मित्रों को प्रशिक्षण और तैनाती के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर शासन को बढ़ाने की रणनीतियां। 

प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में लक्षित संतृप्ति: प्रमुख राष्ट्रीय विकास उप-कार्यक्रमों में प्रदर्शन की समीक्षा, जोखिम की पहचान और डेटा संबंधी कमियों का समाधान, जिनमें शामिल हैं:

  •          विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) गांवों के लिए पीएम-जनमन।
  •          आकांक्षी जिला और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम।
  •          दूरस्थ अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वीवीपी 1.0 एवं 2.0)

डेटा-संचालित जवाबदेही उपकरण: प्रशासकों को व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (सीआईआरपी) मॉड्यूल, स्रोत स्थिरता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस), और जल सेवा आंकलन के माध्यम से नागरिक प्रतिक्रिया लूप जैसे विशेष डिजिटल इंटरफेस के सक्रिय उपयोग पर प्रशिक्षण देना।

एसबीएम (जी) की संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम 2026 पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एसबीएम (जी) चरण II का लक्ष्य ओडीएफ प्लस (मॉडल) की उपलब्धि हासिल करना है, जिसमें रिपोर्ट किए गए संसाधनों के सत्यापन और प्रभाव आकलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टरों को नए निर्देशों को लागू करने का कार्य सौंपा गया है, जिसमें स्रोत पर ही अपशिष्टों का अनिवार्य पृथक्करण, बड़े पैमाने पर अपशिष्ट उत्पन्न करने वालों की पहचान एवं पंजीकरण और पुराने अपशिष्टों का उपचार शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि इन नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, साथ ही सख्त निगरानी और रिपोर्टिंग की आवश्यकताएं भी निर्धारित की गई हैं।राज्यों और जिलों को प्रणाली पर दर्ज सभी परिसंपत्तियों का सत्यापन करने और उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करने की सलाह दी गई। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि चालू वर्ष में व्यक्तिगत घरेलू शौचालय निर्माण के तहत केवल दोहरे गड्ढे वाले शौचालयों को ही मंजूरी दी जानी चाहिए। जिलों को पीएम जनमन/पीवीटीजी परिवारों के लिए पर्याप्त स्वच्छता कवरेज और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठकों का पूरा उपयोग एसबीएम (जी) की प्रगति और एसडब्ल्यूएम नियमों के अनुपालन की समीक्षा करने के लिए किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी स्वच्छता परिणाम और दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्वच्छता सुनिश्चित हो सके।

प्रस्तुति का मुख्य केन्द्रबिंदु ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का कार्यान्वयन था, जिसकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बारीकी से निगरानी की जा रही है। जिला स्तर पर प्रवर्तन के लिए जिला कलेक्टरों को एकल प्राधिकारी नामित किया गया है। नियमों के अनुसार, स्रोत के स्तर पर चरणबद्ध तरीके से पृथक्करण, भारी अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान एवं पंजीकरण, ग्राम पंचायतों द्वारा प्रमाणन और पुराने अपशिष्ट स्थलों का ग्रामीण मानचित्रण आवश्यक है।

ज़िलों को 31 अक्टूबर तक सभी पुराने अपशिष्ट स्थलों की पहचान पूरी करने और निर्धारित समयसीमा के अनुसार सुधार कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सटीक रिपोर्टिंग, कड़ाई से अनुपालन और स्थानीय निकायों के साथ घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

इस संवाद के दौरान, सीधी (मध्य प्रदेश), वलसाड (गुजरात) और शिवसागर (असम) के जिला कलेक्टरों ने जेजेएम 2.0 के तहत कार्यान्वयन संबंधी प्रमुख मुद्दों पर प्रश्न उठाए। इन मुद्दों में पूर्ण हो चुकी जल आपूर्ति योजनाओं का स्थानीय निकायों को हस्तांतरण, संचालन एवं रखरखाव योजना, ग्राम स्तरीय संचालकों के लिए योग्यता संबंधी मानदंड, सुजलम भारत पर पुरानी एवं गैर-जेजेएम जल आपूर्ति परिसंपत्तियों का मानचित्रण और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह शामिल थे। इन प्रश्नों का उत्तर एनजेजेएम के एएस एंड एमडी ने दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिलों को संचालन एवं रखरखाव व्यवस्था की अग्रिम योजना बनानी चाहिए, सभी ग्रामीण जल आपूर्ति संपत्तियों के मानचित्रण के लिए सुजलम भारत को एक साझा मंच के रूप में उपयोग करना चाहिए, प्रशिक्षित स्थानीय संचालकों से संबंधित व्यावहारिक चिंताओं की जांच करनी चाहिए और उपयोगकर्ता शुल्क प्रणाली और सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत करने के लिए राज्यों और ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।

अपने समापन भाषण में, एनजेजेएम के एएस एवं एमडी श्री कमल किशोर सोआन ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पेयजल उपलब्ध कराने के मिशन को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह संवाद जेजेएम और एसबीएम (जी) के लिए नियमित समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि प्रस्तुति और जिलावार प्रदर्शन विवरण जिला कलेक्टरों और मुख्य सचिवों के साथ अनुवर्ती कार्रवाई तथा निगरानी के लिए साझा किए जाएंगे।

उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रमुख कार्य बिंदुओं की समीक्षा करने, स्थानीय कार्यान्वयन संबंधी कमियों को दूर करने और अपने जिलों में पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं में सुधार करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों मिशनों के तहत सेवाओं की आपूर्ति  को मजबूत करने में जिला कलेक्टरों का नेतृत्व महत्वपूर्ण होगा।  

***

पीके/केसी/आर / डीए प्रविष्टि तिथि: 22 MAY 2026 by PIB Delhi  (रिलीज़ आईडी: 2264401) आगंतुक पटल : 239

 

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

एकल उपयोग प्लास्टिक हमारी वुसंधरा को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है... पूरा विश्व इस समय इसके खतरे को कम करने में लगा है... छत्तीसगढ़ भी अपना योगदान दे रहा है... जिसमें दुर्ग जिले का उल्लेखनीय योगदान... समीक्षा बैठक..!

गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा दुर्ग की समीक्षा बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू की क्रांतिकारी पहल से पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा रहे... "नवाचार प्रयत्न"...  "बर्तन बैंक" की सराहना की... उल्लेखनीय है कि, अधिकारियों से गृहमंत्री ने कहा “काम बोलता है..!” पर्यावरण नियम कुंजी :: छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा जिले की समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सभापति व बर्तन बैंक की संस्थापिका, जो कि, प्रदेश में “बर्तन वाली दीदी” के नाम से मशहूर हैं श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू को विशेष रूप से आमंत्रित कर बर्तन बैंक के बारे में जानकारी ली और इस नवाचार के लिए बर्तन बैंक की जमकर सराहना की उन्होंने अधिकारियों के सामने श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति की गई पहल का उद्धाहरण रखते हुए कहा कि, “नाम नहीं...काम बोलता है”। हमारी महिला जनप्रतिनिधि विगत दस वर्ष से बर्तन बैंक को लेकर समर्पित होकर कार्य कर रही है। “नो डिस्पोजल और नो प्लास्टिक कैंपेन” में यह मील का पत्थर साबित हो रही है। यही कारण है कि, अब प्...

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित, मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली , नए एचपीसी सिस्टम का नाम 'अर्का' और 'अरुणिका' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया , नए एचपीसी सिस्टम का नाम ' अर्का ' और ' अरुणिका ' रखा गया है - जो पृथ्वी के प्राथमिक ऊर्जा स्रोत सूर्य से उनके संबंध को दर्शाता है  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित , मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का उद्घाटन किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 850 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। यह परियोजना विशेष रूप से चरम घटनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय और सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह दो प्रमुख स्थलों पर स्थित है - पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और नोएडा में राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ)।   आईआईटीएम सिस्टम 11.77 पेटा फ्लॉप्स और 33 पेटाबाइट स्टोरेज की प्रभावशाली क्षमता से लैस है , जबकि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ सुविधा में 8.2...

कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम - केंद्र ने कृषि वानिकी में व्यापार को आसान बनाने के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदर्श नियम जारी किए

  आगामी एनटीएमएस पोर्टल पर कृषि वानिकी वृक्षारोपण के जियो-टैग किए गए डेटा को रखा जाएगा व पेड़ों की कटाई के लिए किसानों के आवेदनों को मंजूरी देने की सुविधा होगी / ग्रमीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास के साथ इकोलॉजिकल आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए किसान-हितैषी कदम   वन,पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालयइसने कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम’ जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य नियामक ढांचे को सरल बनाने/  कृषि वानिकी को बढ़ावा देने में राज्यों /  केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करना है। कृषि वानिकी कई लाभ प्रदान करती है। इसमें ग्रामीण आजीविका को बढ़ाना , मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार , जैव विविधता का संरक्षण , वृक्ष आवरण में वृद्धि , जल संरक्षण , जलवायु लचीलापन में योगदान देना साथ ही  प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना शामिल है। इन मॉडल नियमों का उद्देश्य - इन मॉडल नियमों का उद्देश्य कृषि वानिकी भूमि के पंजीकरण /  वृक्षों की कटाई और परिवहन के प्रबंधन के लिए सरलीकृत प्रक्रियाएँ प्रदान करके एक सुव्यवस्थित विनिय...