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पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

  संसदीय प्रश्न: पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम , 2026, नियमों में परिभाषित संबंधित राज्य सरकारों , शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों तथा थोक अपशिष्ट उत्पादकों द्वारा देश में ठोस अपशिष्ट के पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित प्रबंधन के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करते हैं। नियमों में अन्य बातों के साथ स्रोत पर ही ठोस अपशिष्ट का चार श्रेणियों—गीला अपशिष्ट , शुष्क अपशिष्ट , स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट तथा विशेष देखभाल अपशिष्ट—में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। साथ ही , थोक अपशिष्ट उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित की गई है , जिन पर विस्तृत थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व (एक्‍सटेंडेड बल्‍क वेस्‍ट जॅनॅरेटर रिस्‍पॉन्सिबिलिटी ) का निर्वहन करना अनिवार्य है , जिससे उत्पन्न अपशिष्ट का संग्रहण , परिवहन और प्रसंस्करण सुनिश्चित किया जा सके। नियमों में केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सभी चरणों—संग्रहण , परिवहन , प्रसंस्करण तथा निपटान—की ऑनलाइन ट्रैकिंग एवं निगरानी का प्रावधान किया गया है। नियमों में पर्वतीय क्षेत्रों तथा द्व...

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) पहली बार 2016 में तैयार और जारी की गई थी। सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श के बाद 2019 में इस योजना में संशोधन किया गया। संशोधित एनडीएमपी केन्द्र और राज्य स्तर के सभी सेक्टरों , मंत्रालयों एवं विभागों के साथ-साथ जिला स्तर के अधिकारियों को एक साथ लाता है तथा आपदा से जुड़े जोखिम को कम करने में उनकी भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों को निर्धारित करता है।   एनडीएमपी के निम्नलिखित मुख्य स्तंभ हैं: ·         राष्ट्रीय विधिक नियमों - आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 और आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009 - का पालन करना ·         उन समझौतों के तहत वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने में सक्रिय रूप से भाग लेना जिन पर भारत ने हस्ताक्षर किए हैं - जैसे आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क , सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एवं कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी 21), जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता ·         आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लि...

भारतीय शहरों में अर्बन हीट आइलैंड के प्रभाव को कम करना, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2019 में 'हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय दिशा-निर्देश' तैयार किए हैं।

  भारतीय संविधान की 12 वीं अनुसूची के अनुसार , नगर नियोजन राज्य सरकारों और शहर के स्तर पर शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी)/शहरी विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आता है। भारत सरकार योजनाओं के माध्यम से हस्तक्षेप , सलाह , दिशा-निर्देशों , वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता के ज़रिए शहरी नियोजन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्यों के प्रयासों को गति देती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार , राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2019 में ' हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय दिशा-निर्देश ' तैयार किए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार , शहरों को अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों की पहचान करने के लिए संवेदनशीलता का आकलन करना चाहिए और अपनी हीट एक्शन प्लान (एचएपी) में उचित शमन उपायों को शामिल करना चाहिए। अब तक 23 राज्यों , 195 जिलों और 64 शहरों द्वारा हीट एक्शन प्लान (एचएपी) तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा , राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने "भारतीय शहरों में लू के दौरान अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा...

बारिश का पानी जमा करें (कैच द रेन) : जल संरक्षण के लिए एक बार फिर राष्ट्रीय अपील

' मन की बात ' के 28 जून 2026 को प्रसारित 135 वें संस्करण में माननीय प्रधानमंत्री ने देशवासियों से वर्षा की प्रत्येक बूंद बचाने तथा जल संरक्षण अभियान को पूरे देश में लगातार गति देने का आह्वान किया। इसकी प्रतिक्रिया में 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देश भर में एक केन्द्रित राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया गया , जिसका उद्देश्य वर्षा जल को जमा करना , भूजल पुनर्भरण , पारंपरिक जल स्रोतों को पहले जैसा करने , वृक्षारोपण गतिविधियों तथा जनभागीदारी को सशक्त बनाना था। “ कैच द रेन — इस मिशन के जरिये हमें वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को मिलकर बचाना है। मैं सभी देशवासियों से विशेष आग्रह करता हूँ कि वर्षा जल की हर एक बूंद को सामूहिक प्रयास से संरक्षित करें।” — माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हमें जो काम करने हैं: ·          प्रत्येक घर , सोसायटी एवं कार्यस्थल वर्षा जल संचयन प्रणाली को अपनाए। ·          उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण करना तथा अनुपयोगी बोरवेलों की मरम्मत कर उ...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

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