सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

भारत और जापान ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के कार्यान्वयन नियमों को अपनाया

भारत गणराज्य की सरकार और जापान की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत 08.06.2026 को संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के 'कार्यान्वयन नियम' को अपनाया है।

पिछले वर्ष, भारत और जापान ने संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (जेसीएम) के लिए सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओसी ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या उसे समाप्त करने वाली गतिविधियों पर सहयोग के लिए एक ढांचा स्थापित किया, साथ ही भारत में सतत विकास परिणामों का समर्थन किया और दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) की प्राप्ति में योगदान दिया।

कार्यान्वयन के नियम में सुदृढ़ शासन व्यवस्था को परिभाषित किया गया है, जिसमें दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति, पारदर्शी परियोजना अनुमोदन प्रक्रियाएं, तृतीय-पक्ष प्रमाणीकरण और सत्‍यापन, सतत विकास सुरक्षा उपाय और क्रेडिटों (कार्बन क्रेडिटों) के जारी किए जाने और हस्तांतरण पर नज़र रखने के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर शामिल हैं।संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह जलवायु परिवर्तन के शमन और सतत विकास को समर्थन देने के लिए भारत में कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों से संबंधित परियोजनाओं में निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को गति प्रदान करेगी।

***

पीके/केसी/एमके/एमयू प्रविष्टि तिथि: 16 JUN 2026 3:02PM by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2273717) आगंतुक पटल : 476

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, वर्ष 1981 hindi PDF Download link - इसे वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए अधिनियमित किया गया है

भारत में वायु प्रदूषण के निवारण , नियंत्रण और रोक की व्यवस्था करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम , वर्ष 1981 में अधिनियमित किया गया और वर्ष 1987 में संशोधित किया गया है उल्लेखनीय है की वायु प्रदुषण के लिए अग्रलिखित अधिनियम और नियम वर्त्तमान में विधिमान्य है जिनको आप अग्रलिखित वेब लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं :- अधिनियम को डाउनलोड करने के लिए निचे लिखे नामों (इस लिंक) पर क्लिक करें 👇👇👇 वायु (प्रदूषण की रोकथाम औरनियंत्रण) अधिनियम 1981 वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 , को वर्ष 1987 में किया गया संशोधन   [1981 की सं. 1 , (29/3/1981)] सूचनाएं डाउनलोड करने के लिए नाम पर क्लिक करें 👇👇👇 संशोधित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक , अधिसूचना (ENG) जी.एस.आर. 935( ई) , [14/10/1998] – अमोनिया (एनएच 3) के लिए परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (ENG) जी.एस.आर. 389( ई) , [23/9/1994] – सीपीसीबी ने दिल्ली , कलकत्ता , वडोदरा और कानपुर में प्रयोगशलाओं की पुनर्स्थापना की (ENG) सा.आ. 1032( ई) , [12/12/1989] – संघ शासित प्रदे...

एकल उपयोग प्लास्टिक हमारी वुसंधरा को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है... पूरा विश्व इस समय इसके खतरे को कम करने में लगा है... छत्तीसगढ़ भी अपना योगदान दे रहा है... जिसमें दुर्ग जिले का उल्लेखनीय योगदान... समीक्षा बैठक..!

गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा दुर्ग की समीक्षा बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू की क्रांतिकारी पहल से पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा रहे... "नवाचार प्रयत्न"...  "बर्तन बैंक" की सराहना की... उल्लेखनीय है कि, अधिकारियों से गृहमंत्री ने कहा “काम बोलता है..!” पर्यावरण नियम कुंजी :: छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा जिले की समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सभापति व बर्तन बैंक की संस्थापिका, जो कि, प्रदेश में “बर्तन वाली दीदी” के नाम से मशहूर हैं श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू को विशेष रूप से आमंत्रित कर बर्तन बैंक के बारे में जानकारी ली और इस नवाचार के लिए बर्तन बैंक की जमकर सराहना की उन्होंने अधिकारियों के सामने श्रीमती श्रद्धा पुरेंद्र साहू द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति की गई पहल का उद्धाहरण रखते हुए कहा कि, “नाम नहीं...काम बोलता है”। हमारी महिला जनप्रतिनिधि विगत दस वर्ष से बर्तन बैंक को लेकर समर्पित होकर कार्य कर रही है। “नो डिस्पोजल और नो प्लास्टिक कैंपेन” में यह मील का पत्थर साबित हो रही है। यही कारण है कि, अब प्...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जिला अधिकारियों को पराली जलाने के मामले में अकर्मण्‍य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को फसल की कटाई के मौसम में पराली जलाने को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव के कारण पराली जलाना गंभीर चिंता का विषय है और आयोग पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों , राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र , दिल्‍ली सरकार ,  राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों , पंजाब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और इससे संबंधित संस्थानों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। 2021 , 2022 और 2023 के दौरान अनुभवों और सीखों के आधार पर , धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान के...

पद्मजा नायडू हिमालयन चिड़ियाघर ने भविष्य के लिए लाल पांडा आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण को बायोबैंकिंग सुविधा के साथ मजबूत किया

  पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क , दार्जिलिंग के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग एंड ऑग्मेंटेशन प्रोग्राम को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ जूज़ एंड एक्वेरियम द्वारा 2024 डब्ल्यूएजेडए कंजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के लिए शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक के रूप में चुना गया है। विजेता की घोषणा 7 नवंबर 2024 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के टारोंगो चिड़ियाघर में 79 वें डब्ल्यूएजेडए वार्षिक सम्मेलन में की जाएगी। 2022 और 2024 के बीच , नौ कैप्टिव-ब्रेड रेड पांडा (सात मादा और दो नर) को पश्चिम बंगाल के सिंगालीला नेशनल पार्क (एसएनपी) में छोड़ा गया। रिहा की गई सात मादाओं में से तीन ने जंगल में पाँच शावकों को जन्म दिया। पीएनएचजेडपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के वन्यजीव विंग के साथ मिलकर सिंगालीला नेशनल पार्क और दार्जिलिंग डिवीजन में कई आवास बहाली की पहल की है। पीएनएचजेडपी सीसीएमबी , आईआईएसईआर और डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों के साथ लाल पांडा से संबंधित कई आंतरिक और सहयोगी शोध कार्य कर रहा है।  पीएनएचजेडपी के संरक्षण प्रयास को इसके बायोबैंकिंग और जेनेटिक रिसोर्स सुविधा से और अधिक मजबूती मिल...

महत्वपूर्ण है बर्तन बैंक : एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं से उत्पन्न वैश्विक खतरे को रोकना की कार्य योजना पर जिला प्रशासन दुर्ग के साथ सामाजिक कार्यकर्ता की बैठक संपन्न

प्लास्टिक के दोना-पत्तल, प्लास्टिक ग्लास एवं चम्मच तथा पालीथीन कैरीबैग वर्तमान में पूरे विश्व के लिए खतरा बन गए है ।  एकल उपयोग प्लास्टिक से उत्पन्न खतरा शहरों के लिए भी घातक साबित हो रहा है । प्लास्टिक वस्तुओं का कचरा नगरीय संरचना अर्थात ड्रेनेज पाईप और नालियों को जाम करके गंदगी और संक्रामक बीमारियो को फैलता हैं तथा पाईप लाईन में फंसे प्लास्टिक कचरे को निकलने के लिए भी स्थानीय लोगों को अनावश्यक खर्च का वहन करना पड़ता है । जिससे आर्थिक नुकसान भी होता है । वैसे तो एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं से हमें त्वरित सुविधा मिलती है लेकिन इसके दुष्परिणाम बेहद घातक है । हमारी नदियों और समुद्र को एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं ने दूषित कर दिया है तथा खेती किसानी और बागान की उपजाऊ जमीन भी प्लास्टिक वस्तुओं के कचरे से बंजर हो रही है ।  उल्लेखनीय है कि, इस विषय पर विगत दिनों दुर्ग जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में रखते हुए..  सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू के नवाचार कल्पना वाली बर्तन बैंक की सफलता की जानकारी दी थी और अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए थे इसी क्रम में श्रद्धा साहू एवं अमोल मालुसर...

कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम - केंद्र ने कृषि वानिकी में व्यापार को आसान बनाने के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदर्श नियम जारी किए

  आगामी एनटीएमएस पोर्टल पर कृषि वानिकी वृक्षारोपण के जियो-टैग किए गए डेटा को रखा जाएगा व पेड़ों की कटाई के लिए किसानों के आवेदनों को मंजूरी देने की सुविधा होगी / ग्रमीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास के साथ इकोलॉजिकल आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए किसान-हितैषी कदम   वन,पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालयइसने कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम’ जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य नियामक ढांचे को सरल बनाने/  कृषि वानिकी को बढ़ावा देने में राज्यों /  केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करना है। कृषि वानिकी कई लाभ प्रदान करती है। इसमें ग्रामीण आजीविका को बढ़ाना , मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार , जैव विविधता का संरक्षण , वृक्ष आवरण में वृद्धि , जल संरक्षण , जलवायु लचीलापन में योगदान देना साथ ही  प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना शामिल है। इन मॉडल नियमों का उद्देश्य - इन मॉडल नियमों का उद्देश्य कृषि वानिकी भूमि के पंजीकरण /  वृक्षों की कटाई और परिवहन के प्रबंधन के लिए सरलीकृत प्रक्रियाएँ प्रदान करके एक सुव्यवस्थित विनिय...