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भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (आईएसीएस) और एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र (एसएनबीएनसीबीएस) के शोधकर्ताओं ने, एक नया छिद्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ (सहसंयोजक कार्बनिक ढांचा) विकसित किया है, जो लिथियम आयनों - बैटरी में ऊर्जा संग्रहित करने वाले छोटे आवेशित कणों - को बहुत सरलता से मूव करने में सक्षम बनाता है।

  अगली पीढ़ी की रिचार्जेबल बैटरियों के लिए अल्‍ट्रा-फास्‍ट कार्बनिक एनोड डिज़ाइन किए ,  शोधकर्ताओं ने बेहतर ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली लिथियम-आयन बैटरियों के लिए एक नया छिद्रयुक्त कार्बनिक एनोड पदार्थ डिजाइन किया है। इलेक्ट्रिक वाहनों , स्मार्टफोन , लैपटॉप और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग के साथ , ऐसी बैटरियों की आवश्यकता भी बढ़ रही है जिन्हें जीवनकाल को प्रभावित किए बिना तेजी से चार्ज किया जा सके। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत आने वाले भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (आईएसीएस) और एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र (एसएनबीएनसीबीएस) के शोधकर्ताओं ने इस चुनौती का समाधान करने के लिए , एक नया छिद्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ (सहसंयोजक कार्बनिक ढांचा) विकसित किया है , जो लिथियम आयनों - बैटरी में ऊर्जा संग्रहित करने वाले छोटे आवेशित कणों - को बहुत सरलता से मूव करने में सक्षम बनाता है।   इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस) की डॉ. उर्मीमाला मैत्रा और एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस) के डॉ. प्रदीप पचफुले क...

चुंबकीय वृक्ष अवधारणा शोधकर्ताओं को सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में छिपे प्रवाह को उजागर करने में मदद करती है

शोधकर्ताओं ने सूर्य की सतह और उसकी ऊपरी परतों के बीच एक छिपे हुए सम्‍बंध का खुलासा किया है। इसके साथ पृथ्वी पर उपग्रहों , संचार प्रणालियों , नौवहन नेटवर्क और यहां तक ​​कि बिजली ग्रिड को भी प्रभावित करते अंतरिक्ष मौसम को समझने में नए आयाम जुड़े हुए हैं। कई वर्षों से वैज्ञानिकों को यह पता है कि सूर्य में गर्म गैस , या प्लाज्मा का एक धीमा लेकिन स्थिर प्रवाह होता है। यह भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ता है। यह मेरिडियनल प्रवाह के नाम की गति के रूप में जाना जाता है जो एक विशाल कन्वेयर बेल्ट की तरह काम करती है। यह सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों को उसकी सतह पर स्थानांतरित करने में मदद करती है। यह सूर्य के 11 वर्षीय सौर चक्र को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे सूर्य के धब्बों और अन्य प्रकार की सौर गतिविधियों की उपस्थिति को प्रभावित होती है। हालांकि , अब तक इस प्रवाह को केवल सूर्य की निचली वायुमंडलीय परतों में ही देखा गया था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान , आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (एआरआईएस) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए एक नए अध...

‘परिवर्तन (परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वाहन परिसंपत्तियों का त्वरित नवीनीकरण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम) योजना’ के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में चल रहे पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को स्वच्छ भारत स्टेज (बीएस)-VI मानक वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

  आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने एनसीआर में पुराने ट्रकों और बसों को तेजी से बदलने के लिए ' परिवर्तन ' योजना के दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दी,  परिवर्तन योजना दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की कल्‍पना को आगे ले जाती है आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने ‘परिवर्तन (परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वाहन परिसंपत्तियों का त्वरित नवीनीकरण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम) योजना’ के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में चल रहे पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को स्वच्छ भारत स्टेज (बीएस)- VI मानक वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। योजना को 9,585 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून , 2026 को मंजूरी दी थी। इसमें 5,041 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। अब इस योजना के विस्तृत परिचालन संबंधी दिशा-निर्देशों को केन्‍द्र...

शहरी जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना , CapaCITIES ने शहरी जलवायु लचीलेपन के लिए एक खाका तैयार किया

शहरी जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना: आज नई दिल्ली में CapaCITIES कार्यक्रम की प्रगति का जश्न मनाने के लिए CapaCITIES की विरासत और आगे का रास्ता ' कार्यक्रम आयोजित , CapaCITIES के तीन नॉलेज प्रोडक्ट्स लॉन्च किए गए , CapaCITIES ने शहरी जलवायु लचीलेपन के लिए एक खाका तैयार किया कैपेसिटीज (CapaCITIES) कार्यक्रम की एक दशक में हुई प्रगति का जश्न मनाते हुए , ICLEI दक्षिण एशिया और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम ' शहरी जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना: कैपेसिटीज की विरासत और आगे का रास्ता ' 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया । कैपेसिटीज कार्यक्रम ने भारतीय शहरों को शहरी गवर्नेंस में कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-लचीले विकास को मुख्यधारा में लाने के लिए ज्ञान , उपकरण और संस्थागत क्षमताएं प्रदान की हैं। CapaCITIES परियोजना के बारे में भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित और वर्ष 2016 में शुरू की गई , भारत में कम कार्बन और जलवायु-लचीले शहरी विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना (कैपेसिटीज) कार्यक्रम ने कम कार्...

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सीवर चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के कारण एक मजदूर की मौत और दो अन्य के घायल होने की घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और उज्जैन अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई हैरिपोर्ट में जांच की स्थिति के साथ-साथ मृतक श्रमिक के परिजनों और घायलों को दिए गए मुआवजे (यदि कोई हो) का विवरण भी शामिल होना चाहिए भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है जिसमें बताया गया है कि 7 जुलाई , 2026 को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सीवर चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के कारण एक मजदूर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। बताया जाता है कि यह घटना उज्जैन में भैरवगढ़ रोड पर पिपली नाका के पास हुई , जब पीड़ित सीवर चैंबर में दाखिल हुए और बेहोश हो गए। आयोग के अनुसार समाचार रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य , यदि सत्य हैं , तो ये मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मामले हैं। अतः आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और उज्जैन के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच की स्थिति के साथ-साथ मृतक श्रमिक और घायल के परिजनों को दिए गए मुआवजे (यदि कोई हो) का विवरण भी शा...

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में आयोग के मानक ढांचे के अनुसार शहरी सड़कों के पुनर्विकास का आकलन करने के लिए 10.07.2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया।

सीएक्यूएम ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में शहरी सड़कों के 17 हिस्सों का निरीक्षण किया आयोग ने सड़कों और आसपास के रास्तों के उचित पक्कीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया , और साथ ही पुनर्विकास कार्यों को समय पर पूरा करने पर भी बल दिया वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में आयोग के मानक ढांचे के अनुसार शहरी सड़कों के पुनर्विकास का आकलन करने के लिए 10.07.2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। इसमें लगभग 46.87 किलोमीटर में फैले 17 सड़क खंडों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 9 में पूर्ण पक्कीकरण पाया गया जबकि 8 सड़क खंडों में अभी भी पूर्ण पक्कीकरण नहीं हुआ था। जिससे पता चलता है कि पुनर्विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की आवश्यकता   है। आयोग ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) और नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सड़क खंडों का निरीक्षण करने के लिए चार फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए। निरीक्षण में जीएनआईडीए के अंतर्गत आने वाले 11 और नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले 6 सड़क खंड शामिल...

एनएमसीजी ने गंगा बेसिन के 63 शहरों में शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं का विस्तार किया

  पहले चरण के तहत 13 शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं (यूआरएमपी) पूरी हुईं ; उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश और बिहार में विस्तार कार्य जारी रहेगा नदी-केंद्रित शहरी नियोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए , राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (एनआईयूए) के सहयोग से 13 शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं (यूआरएमपी) पूरी कर ली हैं। इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए , चरण- 1 के तहत 27 शहरों और चरण- 2 के तहत 33 अतिरिक्त शहरों के लिए यूआरएमपी तैयार की जा रही हैं , जिससे गंगा बेसिन के कुल शहरों की संख्या 60 तक पहुंच जाएगी। नमामि गंगा कार्यक्रम के तहत समर्थित यह पहल , नदी स्वास्थ्य को शहरी नियोजन के साथ एकीकृत करने के विश्व के सबसे बड़े समन्वित प्रयासों में से एक है। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा दिसंबर 2019 में कानपुर में आयोजित राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में व्यक्त किए गए विजन पर आधारित है , जिसमें उन्होंने शहर-केंद्रित विकास से हटकर नदी-केंद्रित विजन अपनाने का आह्वान किया था , जो नदियों को शहरी नियोजन और नागरिक जीवन के के...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

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