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वेस्टवॉटर से आगे: इस्तेमाल किए गए पानी को संसाधन में बदलना

तेज़ी से बढ़ते शहरों में , पानी का इस्तेमाल होने के बाद पानी का चक्र खत्म नहीं होता। घरों , कारखानों और आस - पड़ोस से बहकर निकलने वाले पानी को बेकार नहीं माना जाना चाहिए। सही व्यवस्था के साथ , इस्तेमाल किए गए पानी को एकत्र किया जा सकता है , उसका उपचार किया जा सकता है , पुनर्चक्रित किया जा सकता है और फिर से काम में लाया जा सकता है। यह बदलाव ' स्वच्छ भारत मिशन - अर्बन ' (SBM-U) के अंतर्गत शहरी स्वच्छता के लिए नया दृष्टिकोण बना रहा है। इसके केंद्र में इस्तेमाल किए जा चुके पानी का प्रबंधन ( ' यूज़्ड वॉटर मैनेजमेंट ' (UWM)) है , जो इस्तेमाल किए गए पानी का उपचार करने , अनुपचारित सीवेज को जल स्रोतों में जाने से रोकने और सुरक्षित रूप से दोबारा इस्तेमाल करने पर बल देता है। इस प्रक्रिया में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ( एसटीपी ) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं , जो वेस्टवॉटर मैनेजमेंट को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और आगे इस्तेमाल के लिए पानी बचाने के अवसर में बदल देते हैं। इस दृष्टिकोण को ' वॉटर प्लस ' सर्टिफ़िकेशन से और मज़बूती मिलती है , जो शहरों को घरों और व्यावसाय...

वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के सख्त, समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन की मांग

  सीएक्यूएम ने पराली जलाने की रोकथाम , वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण की तैयारियों की समीक्षा की   राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की सुरक्षा एवं प्रवर्तन संबंधी उप-समिति ने सीएक्यूएम के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा की अध्यक्षता में 29.09.2026 को अपनी 26 वीं बैठक आयोजित की। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को लक्षित रूप से कम करने के लिए संबंधित एनसीआर राज्य सरकारों/जीएनसीटीडी और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा की जा रही तैयारियों , कार्यान्वयन और अनुपालन उपायों की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक के दौरान , आयोग द्वारा जारी विभिन्न वैधानिक निर्देशों के कार्यान्वयन और क्षेत्र-विशिष्ट उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उप-समिति ने दिनांक 15.05.2026 के निर्देश संख्या 99 और धान की पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2026 के दौरान इन घटनाओं की रोकथाम और नियंत्रण हेतु संबंधित कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए पंजाब , हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों का ...

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के लिए दिशानिर्देश जारी किए। 767 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना को नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में 2030-31 तक लागू किया जाएगा

  केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय तटीय मिशन (एनसीएम 2.0) के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश जारी किए। 767 करोड़ रुपये के स्वीकृत परिव्यय वाली यह केंद्रीय क्षेत्र योजना , देश के नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में 2030-31 तक लागू की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य भारत के तटीय क्षेत्रों की मजबूती और स्थिरता को बढ़ाना तथा नीली अर्थव्यवस्था की क्षमता को उजागर करना है। इसे तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। दिशा-निर्देशों का शुभारंभ करते हुए श्री यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह मिशन तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जोखिम आकलन , पारिस्थितिकी तंत्र बहाली , प्रदूषण प्रबंधन , जैव विविधता संरक्षण , सतत पर्यटन , स्थानिक योजना , अनुसंधान और क्षमता निर्माण जैसे कार्यों को करेगा। इसके अतिरिक्त , यह एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित कार्यान्वयन ढांचे के माध्यम से व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र म...

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नई दिल्ली में जेआईसीए के सहयोग से आयोजित 'प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन' कार्यशाला का शुभारंभ किया

परियोजना में क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जो स्थानीय ज्ञान और चुनौतियों को प्रतिबिंबित करते हों ; नवीनतम वैज्ञानिक दृष्टिकोणों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर आधारित ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है: श्री भूपेंद्र यादव केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में ' प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन ' विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का आयोजन मंत्रालय ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से किया था। कार्यशाला में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और जेआईसीए इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि ने भाग लिया। विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभागों , भारतीय अनुसंधान संस्थानों और वानिकी क्षेत्र के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया। क्षमता संवर्धन परियोजना ( 2025-26 से 2031-32) का उद्देश्य वन एवं वन्यजीव प्रबंधन की बदलती आवश्यकताओं , उभरती जलवायु एवं पर्यावरणीय चिंताओं और क्षेत्र में उनकी बढ़ती विविध जिम्मेदारियों को ध्य...

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारत में बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन के छठे चक्र के शुभारंभ कार्यशाला का उद्घाटन किया; एमईई-टीआर 2026 के लिए तकनीकी मैनुअल जारी

स्थल-विशिष्ट परिदृश्य प्रबंधन और अनुकूलनशील संरक्षण पद्धतियों की आवश्यकता है , जिनमें स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को शामिल किया जाए: श्री भूपेंद्र यादव , एमईई-टीआर 2026 में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ को बाघ अभयारण्यों के एक अलग मूल्यांकन मानदंड के रूप में शामिल किया जाएगा केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में भारत में बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन के छठे चक्र (एमईई-टीआर) के शुभारंभ कार्यशाला का उद्घाटन किया। इसका आयोजन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से किया। शुभारंभ कार्यशाला के साथ एमईई-टीआर के छठे चक्र की शुरुआत हुई , जिसमें देश के सभी 58 बाघ अभयारण्यों को शामिल किया जाएगा। कार्यशाला में एनटीसीए , डब्ल्यूआईआई , राज्य वन विभागों , बाघ अभयारण्य प्रबंधन टीमों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा छठे चक्र के ढांचे , कार्यप्रणाली और कार्यान्वयन पर चर्चा की। अपने उद्घाटन संबोधन में श्री भूपेंद्र यादव ने रेखांकित किया कि भारत ने बाघ संरक्षण के ल...

विशेष अभियान 6: कोयला मंत्रालय ने ई-कचरा निपटान, कबाड़ प्रबंधन और कार्यस्थल के आधुनिकीकरण को लक्ष बनाया

कोयला मंत्रालय 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान 6 का नेतृत्व करने जा रहा है। इस अभियान के तहत मंत्रालय के सभी प्रशासनिक कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में ई-कचरे के व्यवस्थित संग्रहण , पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा । पर्यावरणीय उत्‍तरदायित्‍व और ' कचरे से सम्‍पदा ' में परिवर्तन के राष्ट्रीय विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए महीने भर चलने वाली इस पहल में कार्यस्थल के आधुनिकीकरण , कार्यालयीन स्थान के इष्टतम उपयोग , डिजिटलीकरण में तेजी लाने और कबाड़ के निपटान को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्‍य स्वच्छ , स्‍थायी और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस को बढ़ावा देना तथा मजबूत संस्थागत तंत्र को और सुदृढ़ करना है। विशेष अभियान 6 के तैयारी चरण के दौरान श्रीमती चेतना शुक्ला   (डीडीजी) , श्री रॉबिन गंगटे (डीएस) तथा अधिकारियों ने 23 सितम्‍बर , 2026 को लोक नायक भवन स्थित रिकॉर्ड कक्ष की समीक्षा की। इस प्रक्रिया में फाइलों का व्यवस्थित वर्गीकरण करने तथा पुराने या अनावश्यक अभिलेखों की प...

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने स्कूली आउटरीच को मजबूत करने के लिए पहले इको-क्लब शिक्षकों के ओरिएंटेशन के साथ विश्व गैंडा दिवस मनाया

  राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (एनजेडपी) , नई दिल्ली ने आज विश्व गैंडा दिवस 2026 के अवसर पर जागरूकता और शैक्षणिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य गैंडा संरक्षण को बढ़ावा देना और वन्यजीव व जैव विविधता संरक्षण में जनता तथा स्कूलों की भागीदारी को मजबूत करना था। अपने स्कूल आउटरीच पहल के तहत चिड़ियाघर ने इको-क्लब के प्रभारी शिक्षकों के लिए अपना पहला ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें दिल्ली के 12 स्कूलों के शिक्षकों ने भाग लिया। निदेशक (एनज़ेडपी) ने शिक्षकों के साथ बातचीत की और पर्यावरण शिक्षा व संरक्षण जागरूकता के लिए चिड़ियाघर और स्कूलों के बीच सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम ने शिक्षकों को चिड़ियाघर की पर्यावरण शिक्षा पहलों , प्रकृति-आधारित शैक्षणिक गतिविधियों , नागरिक विज्ञान पहलों और अन्य आउटरीच कार्यक्रमों से अवगत कराया। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण पर्यावरण दिवसों और अन्य प्रासंगिक अवसरों पर आयोजित होने वाली कार्यशालाओं , जागरूकता कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में स्कूलों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना भी है। इसके बाद चिड़ि...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये