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बादल फटने की घटनाएं

हिमाचल प्रदेश में बादल फटने , अचानक बाढ़ , भूस्खलन और अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए एक बहुक्षेत्रीय केंद्रीय टीम (एमएससीटी) का गठन किया गया है।   इस टीम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ; केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) , रुड़की ; भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) , पुणे ; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) , इंदौर और अन्य संबंधित एजेंसियों के विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त , भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) , केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है। इस टीम को हिमाचल प्रदेश में बढ़ती चरम मौसम संबंधी घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने , सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक और जमीनी स्थितियों का विश्लेषण करने , विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित और जांचने तथा ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मौसम विशेषज्ञों , वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य अध...

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने सरसों के आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त 15.52 करोड़ रुपये की एबीएस राशि जारी की

  सरसों की खेती के क्षेत्रफल के आधार पर 26 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 3 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के बीच राशि का बंटवारा किया जाएगा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने मैसर्स पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से 15.52 करोड़ रुपये की एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) राशि जारी की है। इस कंपनी ने भारत के जैविक संसाधनों का उपयोग के माध्‍यम से सरसों (ब्रासिका जुनसिया) की दस व्यावसायिक संकर किस्में विकसित की हैं। यह राशि 26 राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी) और 3 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी) को दी जाएगी। प्रत्येक राज्य में सरसों की खेती के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के आधार पर एबीएस हिस्सेदारी की गणना की जाएगी।मैसर्स पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन ने दस किस्मों का विकास स्वयं किया , लेकिन इसके मूल अंश खुले बाजार और व्यापारियों से प्राप्त किए थे। चूंकि किसी एक किसान या समुदाय को स्रोत के रूप में पहचाना नहीं जा सका , इसलिए एनबीए ने ऐसे मामलों में एबीएस वितरण के तौर-तरीकों को निर्धारित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया।विशेषज्ञ समिति द्वा...

जैविक खतरों से निपटने के लिए एनडीएमए का राष्ट्रीय तैयारी ढांचा

  सरकार देश में किसी भी जैविक हमले से निपटने के लिए तैयार है। जैविक आपदाओं के प्रबंधन संबंधी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दिशानिर्देश , 2008 में जैविक सुरक्षा , और जन स्वास्थ्य तैयारियों को शामिल करते हुए खतरे की पहचान और जोखिम प्रबंधन का ढांचा मौजूद है। जैविक और जन स्वास्थ्य आपात स्थितियों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना , 2019 में भी शामिल किया गया है।   स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र , भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और अन्य नामित एजेंसियों सहित संबंधित वैज्ञानिक , सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निरंतर तकनीकी मूल्यांकन , रोग निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी का कार्य किया जाता है।राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एनडीएमए) दिशानिर्देश और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना जैविक आपात स्थितियों की रोकथाम , तैयारी , शीघ्र पता लगाने , नियंत्रण और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करते हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को जैविक आपदा के लिए नोडल मंत्रालय नामित किया गया है। मंत्रालय ने बताया है कि स्वास्थ...

विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर भारत ने हाथी संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की

हाथियों के भविष्य को सुरक्षित करना हमारे जंगलों , जैव विविधता और पर्यावरण विरासत को सुरक्षित करना है , केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर हाथियों और मनुष्यों के लिए साझा भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि भारत में 14 राज्यों में 33 हाथी अभयारण्य और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 150 हाथी गलियारे हैं। श्री यादव ने कहा कि हाथियों की उन्नत जनसंख्या निगरानी और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए कड़े उपाय हाथी संरक्षण को मजबूत कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा , “ हाथियों के भविष्य को सुरक्षित करके ही हम अपने जंगलों , जैव विविधता और पर्यावरण विरासत को सुरक्षित कर सकते हैं।” उन्होंने यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया कि आने वाले समय में भी देश के जंगलों और प्राकृतिक दृश्यों में हाथी स्वतंत्र रूप से विचरण करते रहें।  इस अवसर पर , केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पोस्...

संरक्षित क्षेत्रों में पर्यावरणीय मंज़ूरी

  संसदीय प्रश्न: संरक्षित क्षेत्रों में पर्यावरणीय मंज़ूरी केंद्र सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम , 1986 की धारा 3 की उप-धारा ( 1) और उप-धारा ( 2) के खंड ( v) के अंतर्गत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-ईआईए 2006 जारी की है। समय-समय पर संशोधित ईआईए अधिसूचना , 2006 के प्रावधानों के अनुसार , पर्यावरण सेवाओं सहित भौतिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं/गतिविधियों को ईआईए अधिसूचना , 2006 ( संशोधित) की अनुसूची के 7 के अंतर्गत बताया गया है। ऐसी परियोजनाओं/गतिविधियों का मूल्यांकन केंद्रीय स्तर पर ' श्रेणी ए ' की परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ई ए सी द्वारा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर ' श्रेणी बी ' की परियोजनाओं के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाता है। इसमें परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय प्रभावों पर विचार किया जाता है। कुछ मामलों में , बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कुछ हिस्से टाइगर रिजर्व या अन्य संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या उनसे सटे हो सकते हैं। ऐसे प्रस्तावों को परिवेश पोर्टल के माध्यम से ...

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर एनसीसीआर अध्ययन

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय , राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) के माध्यम से तूतुकुडी और मन्नार की खाड़ी सहित भारतीय तट के चुनिंदा स्थानों पर माइक्रोप्लास्टिक , मेसोप्लास्टिक , मैक्रोप्लास्टिक और समुद्री कचरे पर नजर रखता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सिंथेटिक फिलामेंट्स माइक्रोप्लास्टिक के प्रमुख प्रकार हैं , जबकि नदी का पानी और छोड़े , खोए या फेंके हुए मछली पकड़ने के उपकरण (एएलडीएफजी) माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। तटीय पर्यावरण में उपलब्ध माइक्रोप्लास्टिक और मैक्रोप्लास्टिक की मात्रा के आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय तटीय नियंत्रण समिति (एनसीसीआर) ने क्लीन कोस्ट सूचकांक (सीसीआई) विकसित किया है। सीसीआई आकलन के अनुसार तूतुकुडी तट और मन्नार की खाड़ी को ' ठीक-ठाक स्वच्छ ' श्रेणी में रखा गया है। मन्नार की खाड़ी और तूतुकुडी तट के किनारे तलछट में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा 28 से 60 कण/ 50 ग्राम के बीच पाई गई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस क्षेत्र में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के कोई बड़े केंद्र नहीं पाए गए हैं। राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) भारती...

रेडियोधर्मी कचरा

  संसद में प्रश्न: रेडियोधर्मी कचरा   आमतौर पर , परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को स्थाई रूप में बंद करने तक उनके संचालन की संपूर्ण अवधि में निकलने वाले रेडियोधर्मी ठोस कचरे की मात्रा 0.15 क्यूबिक मीटर/वर्ष/मेगावाट के दायरे में होती है। निपटान किए गए रेडियोधर्मी कचरे की मात्रा और स्थान से संबंधित रिकॉर्ड नियमित रूप से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) के पास जमा किए जाते हैं। हमारे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के आरंभ से ही परमाणु कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा (रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान) नियम , 1987 लागू किए हुए हैं , जिनके तहत रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और निपटान के लिए कानूनी आवश्यकताएं तय की गई हैं। इन नियमों के अनुसार , रेडियोधर्मी कचरा पैदा करने वाली सभी सुविधाओं के लिए रेडियोधर्मी अपशिष्ट के विसर्जन के लिए एईआरबी से अनुमति लेना आवश्यक है। यह अनुमति उस कचरे की मात्रा और गतिविधि को निर्दिष्ट करती है जिसे परमाणु प्रतिष्ठान द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार ही निपटाया जा सकता है। एईआरबी द्वारा निर्दिष्ट रेडियो...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

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